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शरीर में घुल रहा जहर! खाने के साथ कंज्यूम कर रहे माइक्रोप्लास्टिक, इन 5 तरीकों से करें बचाव

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Source :- LIVE HINDUSTAN

5 possible way to avoid microplastics from food and drinks: खाने-पीने की चीजों के साथ शरीर में चुपके से प्लास्टिक नाम का जहर भी तेजी से घुल रहा। इससे बचने के लिए जरूरी है कि किचन में इन 5 तरह के बदलावों को जरूर शामिल किया जाए।

सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन एक स्टडी के मुताबिक 80 प्रतिशत लोगों के शरीर में खाने और पानी के साथ माइक्रोप्लास्टिक के अंश भी पाए गए हैं। फल, सब्जी, दूध, पानी और ऐसी ही पता नहीं कितनी चीजें हर रोज हम खाते हैं और इन खाने-पानी की चीजों के साथ चुपके से प्लास्टिक के बेहद छोटे कण शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। जो हमे धीरे-धीरे ही सही पर बीमार बनाते हैं। सुनकर हैरानी होगी साल लेकिन दुनिया के 21 देशों के कई नमक सैंपल में 90 प्रतिशत माइक्रोप्लास्टिक मिल चुका है। तो अगर आप प्लास्टिक के इन महीन कणों से खुद के शरीर को बचाना चाहते हैं तो खाने-पीने और किचन से जुड़ी इन आदतों में बदलाव लाना शुरू कर दें।

प्लास्टिक के कंटेनर पानी भरना बंद करें

पानी माइक्रोप्लास्टिक के एक्सपोजर का सबसे बड़ा सोर्स है। स्टडी में पाया गया है कि बोतल और नल दोनों तरह के पानी में माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। लेकिन बोतल की पैकिंग और कैप के फ्रिक्शन की वजह से इसमे प्लास्टिक के कणों की मात्रा ज्यादा होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक कार्बन या फिर अच्छे फिल्टर की मदद से पानी को छाना जाए तो इन माइक्रोप्लास्टिक के कणों को कम किया जा सकता है। अगर घर में आ रही पानी की सप्लाई सेफ है तो इसे फिल्टर कर स्टील या कांच की बोतल में भरकर पीना सेफ ऑप्शन है।

प्लास्टिक टिफिनबॉक्स और कंटेनर

बच्चों से लेकर बड़ों के लिए प्लास्टिक के टिफिनबॉक्स दूसरा सबसे बड़ा माइक्रोप्लास्टिक का सोर्स है। यहीं नहीं लोग प्लास्टिक के कंटेनर में खाने-पीने के सामान रखते हैं। इन्हें रीयूज करने, बार-बार खोलने प्लास्टिक के बारीक पार्टिकल फूड्स में मिल जाते हैं। वहीं हीट की वजह से ये सिचुएशन और खराब हो जाती है। अगर प्लास्टिक के कंटेनर में आपने खट्टे, एसिडिकी चीजों को रखा है या फिर ऑयली फूड रख रहे तो ये तेजी से इन जहरीले कणों को खाने में समेटते हैं। किचन से ऐसे प्लास्टिक के कंटेनर खासतौर पर जो पुराने, घिसे, टूटे-फूटे और फीके-बेरंगे हो गए हैं। उन्हें किचन से बाहर निकालें। धीरे-धीरे प्लास्टिक की बजाय स्टील के स्टोरेज बॉक्स को किचन में जगह दें।

प्लास्टिक में माइक्रोवेव

माइक्रोवेव सेफ प्लास्टिक कंटेनर को हीटिंग के लिए माइक्रोवेव में डालने से बड़ी मात्रा में नैनोप्लास्टिक के कण खाने में घुलते हैं। इन डिब्बों में जब ऑयली, नमकीन और एसिडिक फ्लेवर के खाने को गर्म किया जाता है तो हीट की वजह से सरफेस में प्लास्टिक तेजी से ब्रेकडाउन होती है और पार्टीकल्स खाने में घुलते हैं।

यहीं नहीं गर्म चाय और पानी को प्लास्टिक की गिलास में पीने से उसमे माइक्रोप्लास्टिक्स के कण घुलकर शरीर में तेजी से पहुंचते हैं।

प्लास्टिक के किचन के सामान

आजकल किचन में काफी सारी चीजें प्लास्टिक की मिल जाएंगी। प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड, करछूल, स्क्रैच वाले नॉनस्टिक पैन। ये सारी चीजें कुकिंग के टाइम हीट के संपंर्क में आती है और फिर प्लास्टिक और भी ज्यादा तेजी से खाने में घुलकर शरीर में पहुंचता है। जितना हो सके तो इन प्लास्टिक के बर्तन और नॉनस्टिक कोटिंग वाले बर्तनों को रसोई से बाहर करें।

फल और सब्जियां

बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक के बैग में प्रोसेस्ड फूड्स, जिनकी पैकेजिंग से लेकर हैंडलिंग तक में प्लास्टिक खाने के साथ तेजी से घुलती है। इस खतरे को कम करने के लिए ताजी सब्जियों और फलों, अनाज, मछली को खाने से पहले अच्छी तरह से धोकर कुछ हद तक इन्हें हटाकर साफ किया जा सकता है। जिससे माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में उतनी तेजी से ना घुसे और शरीर को हेल्दी रखे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN