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एक घंटा पहले
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला होता है तो वो मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएगा.
शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा जल्द शुरू होने की उम्मीद है.
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो उनका देश क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार है.
अराग़ची ने कहा, “अगर वॉशिंगटन हम पर हमला करता है, तो हम अमेरिकी क्षेत्र पर हमला नहीं करेंगे, लेकिन हम इस क्षेत्र (मध्य पूर्व) में उनके ठिकानों (सैन्य बेस) पर हमला करेंगे.”
ये बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और ट्रंप के दामाद ज़ेरेड कुशनर ने अमेरिकी विमान वाहक पोत अब्राहम लिंकन का दौरा किया.
दरअसल, शुक्रवार को ओमान में अमेरिका-ईरान के बीच शीर्ष स्तर की बातचीत हुई थी. अराग़ची ने कहा है कि अगली बैठक की तारीख़ अभी तय नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्ष इसे जल्द आयोजित करने पर सहमत हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शनिवार तड़के कहा था, “हम अगले हफ्ते की शुरुआत में फिर मिलेंगे.”
हालांकि शुक्रवार को ओमान में हुई बातचीत के कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने को लेकर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए.
इसमें स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये टैरिफ़ कितना होगा, लेकिन माना जा रहा है कि यह 25% तक हो सकता है.
‘न्यूक्लियर एनरिचमेंट ईरान का हक़ है’
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अराग़ची ने इस इंटरव्यू में कहा कि शुक्रवार को हुई बातचीत अप्रत्यक्ष थी और सिर्फ़ परमाणु मुद्दे तक ही सीमित थी.
विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा, “ईरान के नज़रिए से यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती. यूरेनियम संवर्धन ईरान का अधिकार है और यह निश्चित तौर पर जारी रहना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “वे (अमेरिका) बमबारी करके भी इस क्षेत्र में ईरान की क्षमताओं को ख़त्म नहीं कर पाए.”
हालांकि विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ एक “आश्वस्त करने वाला” समझौता करने के लिए तैयार है.
ईरान के मिसाइल प्रोग्राम के बारे में बात करते हुए अराग़ची ने दोहराया, “न तो अभी और न ही भविष्य में मिसाइलों पर बातचीत हो सकती है, क्योंकि यह सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है.”
बीबीसी अरबी के अनुसार, ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी ने कहा कि ‘ईरान के ख़िलाफ़ कोई भी सैन्य कार्रवाई दुश्मनों पर भारी पड़ेगी और उन्हें ख़ासी चोट पहुंचाएगी.’
उन्होंने कहा कि ‘दुश्मन अच्छी तरह जानते हैं कि किसी भी सैन्य आक्रामकता का अंत उनकी रणनीतिक हार में होगा और इससे युद्ध का दायरा पूरे इलाक़े में फैल जाएगा.’
एयरक्राफ़्ट कैरियर पर विटकॉफ़ और कुशनर
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अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे स्टीव विटकॉफ़ ने शनिवार को बताया कि उन्होंने एयरक्राफ़्ट कैरियर अब्राहम लिंकन का दौरा किया है.
इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य हस्तक्षेप की धमकी के बाद मध्य पूर्व भेजा है. यह दौरा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बातचीत के दूसरे दौर से पहले हुआ है.
विटकॉफ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “आज यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और मैंने यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके स्ट्राइक ग्रुप पर मौजूद बहादुर नाविकों और मरीन से मुलाक़ात की, जो हमें सुरक्षित रखते हैं और ताक़त के जरिए राष्ट्रपति ट्रंप के शांति के संदेश का समर्थन करते हैं.”
विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन इस समय अरब सागर में तैनात है, जो ईरान से ज़्यादा दूर नहीं है.
बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, एक्सियोस रिपोर्टर बराक रैविड ने कहा कि “लिंकन और उसके साथ मौजूद स्ट्राइक ग्रुप भविष्य में ईरान पर किसी भी संभावित अमेरिकी हमले में अहम भूमिका निभाने वाले हैं. यह दौरा ईरान के साथ हुई बातचीत के एक दिन बाद हुआ है और यह तेहरान के लिए संदेश है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं.”
सीएनएन की रिपोर्टर काइली एटवुड ने भी एक्स पर लिखा कि ‘खबरों से जुड़े सूत्रों ने उन्हें बताया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने के बावजूद, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और तैनाती बढ़ने का रुझान जारी है.’
हालांकि ट्रंप ने कहा है कि ईरान अब बेसब्री से समझौता करने को तैयार है, “पिछली बार उन्होंने ऐसा नहीं सोचा था लेकिन मुझे लगता है कि इस बार उन्होंने अपना मन बना लिया है. हम देखेंगे कि क्या डील होती है लेकिन इतना तय है कि यह पिछली बार से अलग होगी.”
दोहा में क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री
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वार्ता के बाद दोहा पहुंचे अब्बास अराग़ची ने अल जज़ीरा फ़ोरम को संबोधित करते हुए ‘इसराइल के क्षेत्रीय वर्चस्व और फ़लस्तीन का मुद्दा उठाया.’
अराग़ची ने कहा कि फ़लस्तीन का मुद्दा “यह परखने की कसौटी है कि क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून का अब भी कोई मतलब रह गया है और क्या मानवाधिकार सच में सार्वभौमिक हैं.”
उन्होंने कहा, “ग़ज़ा में इसराइल के अपराधों की मानवीय क़ीमत ने पूरी मानवता की अंतरात्मा को घायल किया है.”
उन्होंने कहा कि इन “आपदाओं” ने लाखों लोगों को झकझोर दिया है, जिनमें ईसाई, यहूदी और सभी धर्मों के लोग शामिल हैं. ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि “किसी बच्चे की ज़िंदगी सौदेबाज़ी का जरिया नहीं हो सकती, भूख को हथियार नहीं बनाया जा सकता, अस्पताल युद्ध का मैदान नहीं होता और परिवारों की हत्या को वैध आत्मरक्षा नहीं माना जा सकता.”
ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा, “किसी भी क्षेत्र में तब तक स्थिरता नहीं आ सकती जबतक एक पक्ष को क़ानून से ऊपर जाकर कार्रवाई करने की छूट दी जाती रहेगी.”
अराग़ची ने कहा कि वर्चस्व का सिद्धांत इसराइल को अपने सैन्य हथियारों के विस्तार की छूट देता है, जबकि क्षेत्र के अन्य देशों पर निःशस्त्रीकरण का दबाव बनाता है.
अराग़ची ने कहा, “इसराइल की विस्तारवादी परियोजना के लिए पड़ोसी देशों को सैन्य, तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमज़ोर करना ज़रूरी है.”
उन्होंने कहा, “इस परियोजना के तहत इसराइल को बिना किसी सीमा के अपने सैन्य शस्त्रागार का विस्तार करने की आज़ादी मिलती है, जबकि वह अन्य देशों से हथियार छोड़ने की मांग करता है. वह दूसरों पर अपनी रक्षा क्षमताएं घटाने का दबाव डालता है और वैज्ञानिक प्रगति के लिए उन्हें दंडित करता है.”
ईरानी मुद्रा निम्नतम स्तर पर
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इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी मुद्रा रियाल तेहरान के एक्सचेंज बाज़ारों में और भी गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.
एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी क़ीमत क़रीब 15.9 लाख रियाल हो गई है. एक सप्ताह पहले जब अमेरिकी विमानवाहक पोत मध्य पूर्व में पहुंचा था तब यह एक डॉलर के मुकाबले 15 लाख रियाल तक पहुंच गई थी.
पिछले साल के अंत में और इस साल की शुरुआत में ईरान में हुए सरकार विरोधी व्यापक प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य बेड़ा भेजा था और कार्रवाई की धमकी दी थी.
अमेरिका स्थित एक ईरानी मानवाधिकार समूह का दावा है कि इन प्रदर्शनों में लगभग छह हज़ार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई.
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