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वापस लौटीं तो मारी जाएंगी, वहीं शरण दे दो; ईरानी फुटबॉल टीम के लिए ट्रंप की ऑस्ट्रेलिया से अपील

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया में मौजूद ईरानी महिला फुटबॉल टीम के लिए चिंता जाहिर की है। मैच के दौरान ईरान के राष्ट्रगान का विरोध करने वाली महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम से उन्हें शरण देने की मांग की।

ईरान के खिलाफ जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया में मौजूद ईरानी महिला फुटबॉल टीम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से अपील की है कि वह ईरानी टीम को वापस भेजने की गलती न करें और उन्हें ऑस्ट्रेलिया में ही शरण दे दें, क्योंकि अगर उन्हें वापस तेहरान भेज दिया गया, तो संभव है कि इस्लामिक शासन द्वारा उन्हें जान से मार दिया जाएगा। गौरतलब है कि ईरानी महिला टीम को लेकर सोशल मीडिया समेत अन्य प्लेटफार्म्स पर यह मांग इसलिए उठ रही है क्योंकि पिछले हफ्ते एक मैच के दौरान उन्होंने ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था।

सोशल मीडिया पर इन महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंताओं को लेकर बढ़ती मांग के बीच ट्रंप ने भी अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने ट्रुथ सोशल ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि अगर ऑस्ट्रेलिया उन्हें वापस भेजता है, तो वह एक भयानक मानवीय भूल कर रहा है। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया ऐसा करने को तैयार नहीं है, तो अमेरिका उन्हें शरण देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने लिखा, “ऑस्ट्रेलिया एक भयानक मानवीय गलती कर रहा है अगर वह ईरान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को ईरान वापस भेजने देता है, जहां उन्हें संभवतः मार दिया जाएगा। ऐसा मत कीजिए, मिस्टर प्रधानमंत्री, उन्हें शरण दीजिए। अगर आप नहीं देंगे तो अमेरिका उन्हें ले लेगा।”

क्या है पूरा मामला?

ऑस्ट्रेलिया में एक टूर्नामेंट खेलने पहुंची ईरानी महिला फुटबॉल टीम उस वक्त सुर्खियों में आ गई थी, जब दक्षिण कोरिया के खिलाफ 2 मार्च को हुए पहले मैच में जब ईरान का राष्ट्रगान बजा और सभी खिलाड़ी खामोशी से खड़ी रहीं। यह घटना उस समय हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए थे, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके बाद ईरान की सरकारी मीडिया में इन खिलाड़ियों के खिलाफ काफी तीखे बयान सामने आए। उन्हें ‘युद्धकालीन गद्दार’ और उनके इस कदम को ‘अपमान की चरम सीमा करार’ दिया गया।

इस घटना के बाद टीम लगातार अपने मैच खेलते रही, लेकिन रविवार को फिलीपींस के खिलाफ 2-0 की हार के बाद उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा था, जिसके बाद अब उन्हें वापस ईरान लौटना होगा। इस अंतिम मैच के दौरान भी कुछ प्रशंसकों ने ईरान के पेहलवी वंश के झंड़े लहराए और राष्ट्रगान के दौरान जमकर हूटिंग की। इसके बाद ईरान में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। लगभग 66 हजार से ज्यादा लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर करते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार से मांग की गई कि खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए, क्योंकि ईरान में उनकी जान को खतरा हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN