Home  लाइफस्टाइल समाचार राजपूत और मुगल काल का शाही खानपान: छप्पन भोग वाली थाली में...

राजपूत और मुगल काल का शाही खानपान: छप्पन भोग वाली थाली में क्या खाते थे राजा-महाराजा?

14
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत में राजा-महाराजाओं ने लंबे अरसे तक राज किया। उनकी थाली में छप्पन भोग होते थे, जो उन्हें फिट और लंबा जीवन देते थे। चलिए आज बताते हैं मुगल और राजपूत काल के राजा-महाराजाओं की थाली में खाने के लिए क्या-क्या होता था।

भारत में सालों पहले राजा-महाराजाओं का राज हुआ करता था, जिसमें सबसे ज्यादा राज राजपूत और मुगलों ने किया। दोनों ही शासक अपना दबदबा बनाए हुए थे और उनकी राजसी ठाठ-बाट और स्वादिष्ट भोजन के चर्चे भी खूब होते थे। राजपूत जहां राजस्थानी परंपरा, स्वाद को आगे बढ़ा रहे थे, वही मुगल नॉन-वेजिटेरिन डिशेज में कई नई चीजों को ट्राई कर रहे थे। राजा-महाराजा वही चीजें खाते थे, जिससे उनकी सेहत अच्छी रहे और उम्र लंबी बनी रहे। आज हम आपको दोनों विरासतों के खान-पान के बारे में डिटेल में बताने जा रहे हैं।

राजपूतों का खान-पान: मिट्टी की खुशबू और रणभूमि की ताकत

राजपूत शासकों का जीवन युद्ध, पराक्रम और अनुशासन से भरा था। इसलिए उनका भोजन ऊर्जा से भरपूर, पौष्टिक और स्थानीय संसाधनों पर आधारित होता था।

1- दाल-बाटी-चूरमा: शाही थाली की पहचान

राजस्थान की शान मानी जाने वाली दाल-बाटी-चूरमा राजपूत रसोई की आत्मा थी।

बाटी: गेहूं के आटे से बनी गोल रोटियां, जिन्हें अंगारों में पकाया जाता था।

दाल: पंचमेल दाल जिसमें मूंग, चना, तूर, उड़द और मसूर का मिश्रण।

चूरमा: घी और गुड़ या शक्कर से बना मीठा मिश्रण। घी की सुगंध और मसालों की सादगी इस व्यंजन को राजसी लेकिन धरती से जुड़ा बनाती थी।

2- लाल मांस: तीखे स्वाद की परंपरा

राजपूतों का प्रसिद्ध व्यंजन लाल मांस था, जो खास लाल मिर्च, लहसुन और देसी मसालों से तैयार किया जाता था। तेज मसाले और गाढ़ी ग्रेवी इसे एक दमदार स्वाद देते थे। जो वीर योद्धाओं की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता था। इसे खाने से शरीर में ताकत आती है और उम्र भी बढ़ती है।

3- बाजरे की रोटी और कढ़ी

रेगिस्तानी इलाकों में बाजरा मुख्य अनाज था। बाजरे की रोटी के साथ खट्टी कढ़ी और लहसुन की चटनी परोसी जाती थी। यह भोजन सरल, टिकाऊ और लंबे समय तक पेट भरने वाला होता था। राजपूत भोज में चांदी की थालियां, पारंपरिक क्रम और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन भी किया जाता था। भोजन सम्मान और आतिथ्य का हिस्सा था।

मुगलों का खान-पान: खुशबू, नफासत और शाही ठाठ

मुगल दरबारों में खाना एक कला था। हर व्यंजन में रंग, खुशबू और प्रस्तुति का विशेष ध्यान रखा जाता था।

1- बिरयानी: परतों में सजा स्वाद

मुगल बिरयानी चावल और मांस की परतों से तैयार होती थी। केसर में भीगे चावल, दही और मसालों में मेरिनेट किया गया मांस। इलायची, दालचीनी, लौंग और जायफल और दम पद्धति से पकाई गई बिरयानी की खुशबू पूरे महल में फैल जाती थी।

2- कबाब: नर्मी और मसालों का मेल

सीख कबाब और शामी कबाब मुगल रसोई की शान थे।

कीमे में केसर, हरी इलायची, अदरक, लहसुन और सूखे मेवे मिलाए जाते थे।

धीमी आंच पर पके ये कबाब मुंह में घुल जाने वाले होते थे।

3- शीर खुरमा और शाही टुकड़ा

मुगल मिठाइयां भी उतनी ही खास थीं। दूध, सेवइयां, खजूर और मेवों से बना शीर खुरमा। केसर और चाशनी में डूबा शाही टुकड़ा। इन मिठाइयों में मिठास के साथ शाही नफासत झलकती थी। मुगल भोज में चांदी और सोने के बर्तनों का उपयोग, इत्र की खुशबू और सजे हुए दरबार माहौल को और भव्य बना देते थे।

आज हम शाही मिठाई या लाल मांस खाते हैं, तो ये राजा-महाराजाओं की देन है। इन सभी व्यंजनों में आज भी रॉयल टच देखने को मिलता है, जो इन्हें सबसे खास बनाते हैं। अगर आप रॉयल फूड लवर हैं, तो राजस्थान या लखनऊ जाएं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN