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ये तो पागलपन है, होर्मुज पहले खुला हुआ था; ट्रंप पर बरस पड़े अमेरिकी सांसद, खूब सुनाया

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ट्रंप पर हमला बोलते हुए अमेरिकी सांसद ने कहा कि दिक्कत यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले यह स्ट्रेट खुला हुआ था, अब हम उस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे हमने खुद पैदा किया है। यह तो पागलपन है।

अमेरिका और ईरान के बीच महीनेभर से युद्ध चल रहा है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा। इन हमलों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद अपने ही घर में घिर गए हैं। अमेरिकी सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान युद्ध में रोजाना दो बिलियन डॉलर की रकम खर्च कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पहले से खुला हुआ था, लेकिन अब हम उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे, जिसे हमने खुद ही पैदा किया है। सांसद ने इसे पागलपन बताया है।

अमेरिकी सांसद ने कहा, ”समस्या यह है, युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था। अब हम उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं जिसे हमने खुद पैदा किया है। यह तो पागलपन है। दो अरब डॉलर बहुत बड़ी रकम होती है। यह वह न्यूनतम राशि है जो इस युद्ध पर हर दिन खर्च की जा रही है।” उन्होंने इस युद्ध में हो रही अमेरिकियों की मौत का भी दावा किया और कहा कि अमेरिका में एक दर्जन से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जो अपने प्रियजनों को दफना रहे हैं, और अगर यह युद्ध जारी रहा तो ऐसे और भी दर्जनों परिवार हो सकते हैं। कीमतें न सिर्फ अमेरिका में, बल्कि पूरी दुनिया में आसमान छू रही हैं।

अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। यहां से वह भारत समेत चुनिंदा मित्र देशों के तेल टैंकरों को ही गुजरने दे रहा है। उसके निशाने पर यूरोप, अमेरिका, इजरायल आदि देशों के टैंकर है। वह बिना अनुमति के गुजर रहे तेल टैंकरों पर हमला कर रहा है। इसके अलावा, कुछ दिनों से उसने चुनिंदा देशों के जहाजों को गुजरने के लिए दो मिलियन डॉलर फीस भी लेने की बात कही है।

इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज खोलने के लिए ईरान को दी गई समयसीमा छह अप्रैल तक बढ़ा दी। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी को फिलहाल रोकेंगे। यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब युद्धविराम वार्ता को लेकर दोनों देश गतिरोध की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं तथा उन्होंने अपने-अपने रुख कड़े कर लिए। इस बीच, अमेरिका के हजारों और सैनिक इस क्षेत्र के करीब पहुंच गए हैं वहीं इजरायल ने ईरान समर्थित उग्रवादी समूह हिज्बुल्ला से लड़ने के लिए दक्षिणी लेबनान में और सैनिक भेजे हैं तथा ईरान ने महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN