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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के ‘फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास को युद्ध का आक्रामक पूर्वाभ्यास बताते हुए ‘भयानक परिणामों’ की चेतावनी दी है। जानिए इसके वैश्विक प्रभाव और पूरी खबर।
उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन अमेरिका की ताजा हरकतों से भड़के हुए हैं। उन्होंने पहले भी कई मौकों पर अमेरिका और अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया को चेतावनी दी है। ताजा मामला भी युद्ध अभ्यास से जुड़ा है जिसे किम जोंग उकसावे वाला कृत्य मान रहे हैं। किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने इस सप्ताह शुरू हुए अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना की है। किम यो जोंग ने इसे उकसाने वाला और आक्रामक युद्ध का पूर्वाभ्यास करार दिया है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को भारी नुकसान पहुंचाएगा। इससे पहले नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने मिडिल ईस्ट (ईरान) में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना की थी।
उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया केसीएनए (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को किम यो जोंग ने अपने बयान में कहा कि ‘फ्रीडम शील्ड’ नामक यह वार्षिक सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया के प्रति इन सहयोगी देशों की आदतन शत्रुतापूर्ण नीति को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास में 18,000 से अधिक दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैनिक शामिल हैं और यह उत्तर कोरिया के क्षेत्रीय भूभाग, समुद्र, हवा, बाहरी अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में दिन-रात चलाया जा रहा है।
भयानक परिणामों की चेतावनी
उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सैन्य शक्ति का यह प्रदर्शन ऐसे भयानक परिणामों को जन्म दे सकता है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हालिया वैश्विक संकटों से यह स्पष्ट हो गया है कि शत्रु ताकतों के सैन्य युद्धाभ्यास में अब केवल ‘अभ्यास’ और ‘वास्तविक युद्ध’ या ‘रक्षा’ और ‘हमले’ के बीच कोई अंतर नहीं रह गया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर ‘युद्ध की तैयारी’ बताया।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का पक्ष
दूसरी ओर, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि 9 मार्च से 19 मार्च तक चलने वाला यह सैन्य अभ्यास पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति का है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के खतरे से निपटने के परिदृश्यों पर काम करना है। दोनों देशों के अधिकारियों के अनुसार, यह सैन्य अभ्यास अमेरिका से दक्षिण कोरिया को ‘युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण’ सौंपने की तैयारियों का भी एक हिस्सा है। दक्षिण कोरिया का लक्ष्य है कि राष्ट्रपति ली जे मायुंग के कार्यकाल के समाप्त होने (वर्ष 2030) से पहले सैन्य कमान का यह हस्तांतरण पूरा कर लिया जाए।
ईरान के हालात और परमाणु हथियारों पर जोर
विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्धाभ्यास उत्तर कोरिया के लिए बेहद संवेदनशील समय पर हो रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाकर किए जा रहे ऑपरेशनों को देखते हुए, उत्तर कोरिया की अपने परमाणु हथियारों पर निर्भरता और भी पुख्ता हो सकती है। दक्षिण कोरिया के क्युंगनम विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ लिम इयूल-चुल के अनुसार किम यो जोंग का यह कहना कि ‘आक्रामक शक्ति ही सबसे अच्छा बचाव है’, इस बात को दर्शाता है कि वे ईरान जैसा हश्र नहीं झेलना चाहते। यह बयान देश और दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि परमाणु हथियार छोड़ने का मतलब उनके लिए तबाही होगा।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ शुरू किया बड़ा सैन्य अभ्यास
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसमें हजारों सैनिकों के हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह सैन्य अभ्यास फरवरी में उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ पार्टी की कांग्रेस बैठक के ठीक बाद हो रहा है, जिसमें नेता किम जोंग उन ने खुले तौर पर घोषणा की थी कि वह अपने देश के परमाणु शस्त्रागार का और अधिक विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
दक्षिण कोरिया के ‘ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ’ ने कहा कि लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक इस ‘फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास में हिस्सा लेंगे, जो 19 मार्च तक चलेगा। अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया में इस अभ्यास में शामिल अपने सैनिकों की संख्या नहीं बतायी है। इन दोनों सहयोगी देशों का यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटा कर ईरान के खिलाफ लड़ाई में ले जा रहा है। ‘यूएस फोर्सेज कोरिया’ ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संसाधनों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी।
अगर हमे खतरा हुआ तो दक्षिण कोरिया को मिटा देंगे: उत्तर कोरिया
उत्तर कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के संयुक्त अभ्यासों को आक्रमण का पूर्वाभ्यास बताता रहा है और इसे अपने सैन्य प्रदर्शनों और हथियार परीक्षणों को बढ़ाने का बहाना बनाता रहा है। अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास रक्षा उद्देश्य के लिए होते हैं। पिछले महीने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ तो परमाणु-संपन्न देश दक्षिण कोरिया को ‘पूरी तरह से मिटा’ सकता है। उन्होंने सियोल के साथ बातचीत करने से एक बार फिर इनकार कर दिया। सरकारी मीडिया ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी की एक बैठक के समापन के दौरान उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए अपने नीतिगत लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वाशिंगटन से बातचीत के लिए अपने रास्ते खुले रखे। हाल के वर्षों में किम ने सियोल के प्रति अपनी बयानबाजी को और तीखा कर दिया है और उसके साथ कूटनीति के प्रति अपनी अस्वीकृति पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य संघर्ष की आशंका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत किम के परमाणु हथियारों और मॉस्को तथा बीजिंग के साथ संबंधों के बल पर उत्तर कोरिया की अधिक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका स्थापित करना है।
आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने कहा कि किम ने अपनी परमाणु-संपन्न सेना को मजबूत करने के लिए नयी हथियार प्रणालियों को विकसित करने का भी आह्वान किया।
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