Source :- LIVE HINDUSTAN
हर किसी के लिए प्यार भरा अहसास एक जैसा नहीं होता है। कुछ लोगों के लिए वैलेंटाइन डे पर अकेलापन और ज्यादा बढ़ जाता है। खासतौर पर तब जब आप मेनोपॉज के दौर से गुजर रहे हो।
दुनियाभर में 14 फरवरी यानी वैलेंटाइन डे को मोस्ट रोमांटिक डे की लिस्ट में शामिल किया जाता है। इस दिन प्रेमी जोड़े अपने पार्टनर से प्यार का इजहार करते हुए उन्हें उनके पसंदीदा तोहफे और संदेश भेजते हैं। लेकिन हर किसी के लिए यह प्यार भरा अहसास एक जैसा नहीं होता है। कुछ लोगों के लिए इस दिन अकेलापन और ज्यादा बढ़ जाता है। खासतौर पर तब जब आप मेनोपॉज के दौर से गुजर रहे हो। मेनोवेदा की संस्थापक और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानने की कोशिश करते हैं आखिर मेनोपॉज के दौरान प्यार में अकेलापन क्यों बढ़ जाता है।
मेनोपॉज के दौरान क्यों बढ़ जाता है प्यार में अकेलापन
तमन्ना सिंह कहती हैं कि मेनोपॉज सिर्फ शरीर में होने वाला एक बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक औरत की जिंदगी का वह पड़ाव है जहां उसकी भावनाओं का समंदर अक्सर उफान पर होता है। एक तरफ शरीर अपनी पुरानी लय छोड़ रहा होता है और दूसरी तरफ मन में अनजानी सी उदासी और अकेलेपन की परतें जमने लगती हैं। प्यार और रिश्तों के बीच खड़ा यह ‘अकेलापन’ अक्सर पार्टनर की कमी से नहीं, बल्कि खुद से दूर हो जाने के अहसास से जन्म लेता है। जब चिड़चिड़ापन, रातों की नींद उड़ना और हार्मोनल उतार-चढ़ाव आपकी पहचान बनने लगें, तो अपनों के बीच रहकर भी खुद को अकेला पाना स्वाभाविक है। लेकिन यकीन मानिए, यह कोई ‘अंत’ नहीं है बल्कि यह एक मौका है अपने रिश्तों की बुनियाद को फिर से सींचने और एक-दूसरे को नए सिरे से समझने का।
क्या कहती हैं एक्सपर्ट
तमन्ना सिंह कहती हैं कि ‘मेरी क्लिनिकल प्रैक्टिस में एक वाक्य बार-बार सुनने को मिलता है- रिश्ता है, लेकिन अब पहले जैसा महसूस नहीं होता।’ यह भावनात्मक दूरी अक्सर मेनोपॉज के समय उभरती है और कई महिलाएं इसे अपनी व्यक्तिगत असफलता समझ लेती हैं। जबकि सच इससे काफी अलग होता है।
मेनोपॉज सिर्फ पीरियड्स बंद होना नहीं होता
मेनोपॉज केवल पीरियड्स बंद होने का चरण नहीं है, बल्कि एक गहरा हार्मोनल परिवर्तन है। इस समय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम होता है, जबकि स्ट्रेस हार्मोन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इन बदलावों का असर नींद, मूड, ऊर्जा, मेटाबॉलिज़्म, त्वचा और सबसे महत्वपूर्ण भावनात्मक जुड़ाव तथा यौन इच्छा पर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला के लिए थकान, चिड़चिड़ापन, हॉट फ्लैशेज, लो लिबिडो और भावनात्मक संवेदनशीलता सामान्य अनुभव बन जाते हैं। ऐसे में रिश्ते में दूरी महसूस होना असामान्य नहीं, बल्कि जैविक रूप से समझ आने वाली स्थिति है।
अकेलेपन की असली वजह
अकेलेपन की असली वजह केवल हार्मोन नहीं, बल्कि अनकहा बदलाव है। जब शरीर बदल रहा होता है लेकिन बातचीत नहीं बदलती, तब गलतफहमियां बढ़ती हैं। साथी इसे भावनात्मक दूरी समझ सकता है, जबकि महिला भीतर से केवल समझ, धैर्य और भावनात्मक सुरक्षा चाहती है।
उपाय
स्पष्ट और शांत संवाद
तमन्ना सिंह कहती हैं कि ‘मेरे अनुभव में इस चरण की सबसे प्रभावी रणनीति स्पष्ट और शांत संवाद है। अपने साथी को बताइए कि थकान और मूड स्विंग्स हमेशा नियंत्रण में नहीं होते, निकटता की आवश्यकता खत्म नहीं हुई है, केवल उसका स्वरूप बदल रहा है। आपको समाधान से पहले संवेदनशील सुनवाई चाहिए। जब संवाद ईमानदार होता है, तो भरोसा दोबारा बनता है और दूरी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
खुद से जुड़ना
दूसरा उपाय है कि खुद से फिर से जुड़ना। हार्मोनल बदलाव के समय शरीर अतिरिक्त देखभाल मांगता है। संतुलित पोषण, नियमित हल्की एक्सरसाइज, तनाव प्रबंधन और गहरी नींद केवल स्वास्थ्य की आदतें नहीं हैं, बल्कि रिश्तों को बेहतर बनाने वाले आधार भी हैं। जब ऊर्जा और भावनात्मक स्थिरता लौटती है, तो जुड़ाव स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है।
युवावस्था जैसा नहीं होता प्यार
यह समझना भी जरूरी है कि मिडलाइफ का प्यार युवावस्था जैसा नहीं दिखता। यह कम नाटकीय लेकिन अधिक सच्चा होता है, कम शब्दों वाला लेकिन अधिक भरोसेमंद। कई बार शांत साथ ही सबसे गहरा रोमांस बन जाता है।
सलाह- मेनोपॉज के दौरान महसूस होने वाला अकेलापन किसी अंत का संकेत नहीं है। यह एक संदेश है कि रिश्ता नए स्तर की समझ और देखभाल चाहता है। सही जानकारी, खुला संवाद और अच्छी सेल्फ केयर के साथ यही रिश्ता पहले से अधिक स्थिर और अर्थपूर्ण बन सकता है। सच यही है कि हर बदलाव दूरी नहीं लाता। कुछ बदलाव रिश्तों को पहले से अधिक गहरा और सच्चा बना देते हैं।
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