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Fitch Ratings: भारत 2026 में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से आगे होगी।
फिच रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2026 में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से आगे होगी।
फिच ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस की इकनॉमिक ग्रोथ पर ट्रेड पैटर्न में बदलाव का फिलहाल कम असर पड़ेगा, क्योंकि ये अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनका मैन्यूफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स कम है। भारत अमेरिकी टैरिफ के जोखिम को कम करने के लिए कई व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापार संबंध बढ़ा रहा है। हाल ही में उसने यूरोपीय संघ के साथ भी समझौता किया है।
पिछले दो महीनों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ सौदे किए हैं। अमेरिका के साथ यह समझौता 6 फरवरी को घोषित किया गया था। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है।
नीति और वित्तीय सुधार: मजबूत बुनियाद की ओर
नीतिगत मोर्चे पर फिच का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। दिसंबर में दर में कटौती के बाद अब RBI नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई है और बजट में अधिक खर्च मदों को शामिल किया है। वहीं, तेज वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने से राजस्व भी मजबूत हुआ है, जिससे मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में मामूली गिरावट की संभावना बढ़ी है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज का जीडीपी अनुपात अभी भी उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है।
7.3 ट्रिलियन का सपना: कैसे बदल रही है इंडियन इकनॉमी
भारत का इकनॉमिक ग्रोथ लगातार दुनिया का ध्यान खींच रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, देश 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विकास की यह रफ्तार निर्णायक नीति-निर्माण, संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते एकीकरण की मजबूती को दर्शाती है।
तेज वृद्धि के साथ भारत ने एक बार फिर वैश्विक साथियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उछाल मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और बढ़ती श्रम भागीदारी पर टिकी है। घरेलू निवेश में आई तेजी और निवेशकों के मजबूत विश्वास से स्थिर और व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था की झलक मिलती है।
जीडीपी आंकड़े: तेज छलांग का सबूत
कुछ दिन पहले पीआईबी पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक जीडीपी 8.2% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 5.6% थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी, जो पिछले साल की समान तिमाही में 6.5% थी। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़े भी बताते हैं कि दूसरी तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र में 3.1%, द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% और सेवा क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई।
पहली छमाही में 8% की रफ्तार
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी 8% की दर से बढ़ी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.1% थी। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र में 2.9% की मध्यम वृद्धि हुई, जबकि द्वितीयक (7.6%) और तृतीयक क्षेत्र (9.3%) ने लगातार शानदार विस्तार किया।
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