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एक घंटा पहले
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बांग्लादेश में नए कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने 13 देशों के शासनाध्यक्षों को आमंत्रित किया है.
ढाका में मौजूद बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित के अनुसार, अब तक जिन देशों को आमंत्रण भेजा गया है, उनमें चीन, सऊदी अरब, भारत, पाकिस्तान, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं.
शपथ ग्रहण समारोह 17 तारीख़ को आयोजित होगा.
बांग्लादेश के तेरहवें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है और पार्टी के अध्यक्ष तारिक़ रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे.
शुक्रवार को चुनाव के नतीजे आने के बाद पीएम मोदी ने तारिक़ रहमान को फ़ोन कर चुनाव में जीत के लिए बधाई भी दी थी. बीएनपी ने पीएम मोदी को इसके लिए शुक्रिया भी कहा है.
बीबीसी बांग्ला संवाददाता शुभज्योति घोष ने शनिवार को पुष्टि की थी कि बीएनपी के चेयरपर्सन ऑफ़िस ने शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी को भी आमंत्रण भेजे जाने की जानकारी दी है.
बीएनपी अध्यक्ष के फ़ॉरेन पॉलिसी एडवाइजर हुमायूं कबीर ने भी पुष्टि की है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तारिक़ के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया जाएगा.
हालांकि अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इन सबके बीच एक चर्चा ज़ोरों पर है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी तारिक़ रहमान के शपथ ग्रहण में ढाका जाएंगे?
शेख़ हसीना की सरकार के पतन के बाद भारत ने बीएनपी के साथ संवाद के रास्ते खोले हैं. बीएनपी की जीत पर बधाई देने वाले शुरुआती नेताओं में पीएम मोदी रहे हैं.
तारिक़ रहमान ने भी रचनात्मक रूप से भारत के साथ बहुआयामी रिश्ते को मजबूत करने पर ज़ोर दिया है.
किन नेताओं को होगा निमंत्रण
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शपथ ग्रहण के सवाल पर बीएनपी के नेता एएनएम एहसानुल हक़ ने शनिवार को ढाका में पत्रकारों के साथ बातचीत में उम्मीद जताई थी कि पीएम मोदी को आमंत्रण दिया जाएगा.
दक्षिण एशिया के नेताओं को आमंत्रित करने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मुझे ठीक ठीक तो नहीं पता है लेकिन उम्मीद है कि वे सभी को बुलाएंगे. पीएम मोदी को भी बुलाया जाना चाहिए. ये एक सामान्य शिष्टाचार है और आयोजक ऐसा करेंगे.”
बीएनपी ने अपने चुनावी अभियान में ‘सभी से मित्रता’ की नीति का वादा किया था.
पहले भी बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से संकेत दिया गया था कि शपथ ग्रहण समारोह में सार्क (दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों के नेताओं को आमंत्रण भेजा जाएगा, जिनमें पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ का भी नाम होगा.
राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकारों का मानना है कि साल 2014 में पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के बाद सार्क देशों के नेताओं का ऐसा जुटान, पहली बार ढाका में होने की संभावना है.
पीएम मोदी के बधाई संदेश की बीएनपी ने सराहना की है और एक्स पर लिखा, “बहुत-बहुत धन्यवाद माननीय नरेंद्र मोदी. नेशनल इलेक्शन में बीएनपी की निर्णायक जीत दिलाने में तारिक़ रहमान की लीडरशिप को आपने जिस तरह से माना, उसके लिए हम बहुत आभारी हैं.”
फ़्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कल यानी 16 फ़रवरी से भारत की यात्रा पर आ रहे हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मैक्रों के दौरे का पूरा शेड्यूल जारी किया है जिसमें वो 16 फ़रवरी को देर रात दिल्ली पहुंच रहे हैं और 17 फ़रवरी को उनका मुंबई में कार्यक्रम है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में मैक्रों के साथ होंगे, जहां राजभवन के दरबार हाल में एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे और प्रेस बयान जारी किया जाएगा.
मैक्रों का दौरा 19 फ़रवरी तक रहने वाला है और वो शाम को पेरिस रवाना होंगे.
इसलिए कुछ लोग अनुमान लगा रहे हैं कि अंतरारष्ट्रीय दौरे की व्यस्तता के चलते पीएम मोदी शायद ही तारिक़ रहमान के शपथ ग्रहण में जा पाएं, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
शपथ ग्रहण कब और कहां होगा
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बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार के मुताबिक़, इस बार परंपरा से हटकर कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह संसद परिसर में होगा.
अख़बार के मुताबिक़ शपथ ग्रहण समारोह बंगभवन के दरबार हॉल में नहीं होगा. इसके बजाय बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार मंगलवार को राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाज़ा से अपने कार्यकाल की शुरुआत करेगी.
द डेली स्टार ने मुख्य सलाहकार कार्यालय और कैबिनेट डिवीजन के कई सूत्रों के हवाले से बताया कि बीएनपी की पसंद के अनुसार समारोह संसद भवन में आयोजित करने की तैयारी चल रही है.
उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण मंगलवार सुबह 10 बजे इसी स्थान पर होगा, जबकि कैबिनेट का शपथ ग्रहण उसी दिन शाम 4 बजे निर्धारित है.
ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग में इस कार्यक्रम की पुष्टि की.
बीते 12 फ़रवरी को आयोजित हुए राष्ट्रीय चुनावों में 300 में से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को 209 सीटें जबकि प्रमुख प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं.
बीएनपी के साथ दिल्ली के बदलते समीकरण
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बीबीसी बांग्ला संवाददाता शुभज्योति घोष के अनुसार, अब जबकि अवामी लीग और शेख़ हसीना दोनों ही बांग्लादेश की राजनीति से बहिष्कृत हो चुके हैं, भारत बीएनपी के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि जानकारों का मानना है कि तारिक़ रहमान के साथ रिश्ते सुधारने में लंबा समय लगा.
उनके अनुसार, पिछले कई चुनावों से ये परंपरा रही है कि भारतीय प्रधानमंत्री, परिणाम घोषित होने के बाद विजयी पार्टी को आधिकारिक तौर पर बधाई देने वाले पहले नेता होते हैं.
शुक्रवार सुबह जब साफ़ तारिक़ रहमान की जीत स्पष्ट हो गई तो पीएम मोदी ने भी यह परंपरा दोहराई. पीएम मोदी ने पहले सुबह 9 बजे एक्स पर बधाई संदेश पोस्ट किया. आधे घंटे बाद उन्होंने बांग्ला में पोस्ट किया और फिर सीधे तारिक़ रहमान को फ़ोन किया.
ये मायने इसलिए रखता है क्योंकि इससे पहले तारिक़ रहमान को लेकर भारत सरकार का रवैया कमोबेश ठंडा रहा है.
बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में, एक मजबूत बीएनपी सरकार इस समय भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प है, जिसके बारे में भारत में सभी पर्यवेक्षक सहमत हैं.
और प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से अब यह स्पष्ट हो गया है कि बीएनपी की पिछली सरकारों के दौरान दिल्ली के साथ संबंध कितने भी अस्थिर रहे हों, भारत उन सभी पुराने मुद्दों को फिलहाल नजरअंदाज करते हुए, संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है.
शुभज्योति घोष के अनुसार साल 2014 में तारिक़ रहमान की ओर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया गया था, तब वह बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर लंदन में रह रहे थे.
चूंकि अवामी लीग और कांग्रेस के बीच ऐतिहासिक संबंध थे, इसलिए जब कांग्रेस के दस साल (2004-14) के शासन के बाद बीजेपी सत्ता में आई, तो तारिक़ रहमान ने बीजेपी सरकार के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को उपहार भी भेजा था, हालांकि भारत की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.
दिल्ली में कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ही तत्कालीन सरकार को तारिक़ रहमान से संबंध स्थापित न करने की सलाह दी थी.
जानकारों का कहना है कि अब पीएम मोदी का तारिक़ रहमान को बधाई संदेश, हसीना सरकार के पतन के बाद भारत के नज़रिए में आए बदलाव का संकेत है.
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