Source :- LIVE HINDUSTAN
2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही पाकिस्तान में आतंकी हमलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाहगाहों का आनंद ले रहे हैं।
Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव शुक्रवार को एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सहित कंधार और पक्तिका में भारी हवाई हमले किए हैं। पाकिस्तान सरकार ने इसे ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ (Operation Ghazab lil-Haq) नाम दिया है, जिसमें अब तक 133 अफगान तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?
इस सैन्य टकराव की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान ने 21 फरवरी को अफगानिस्तान के भीतर संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का दावा था कि उसके पास अकाट्य सबूत हैं कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलोच विद्रोही अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमले के लिए कर रहे हैं। इसके जवाब में, गुरुवार को अफगान तालिबान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की दर्जनों सीमा चौकियों पर कब्जा करने और 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया। इसी उकसावे के जवाब में पाकिस्तान ने शुक्रवार तड़के काबुल और कंधार पर मिसाइलें बरसा दीं।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया पर ऑपरेशन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि हमले में 133 तालिबानी लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए हैं। तालिबान के 2 कोर मुख्यालय, 3 ब्रिगेड मुख्यालय और 27 सैन्य चौकियां नष्ट कर दी गई हैं। 80 से अधिक टैंक, तोपें और बख्तरबंद गाड़ियां तबाह हुई हैं। पाकिस्तान ने तालिबान की 9 सामरिक चौकियों पर अपना कब्जा जमा लिया है।
पाकिस्तान इसे आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बता रहा है, वहीं संयुक्त राष्ट्र (UN) और अफगान सूत्रों ने अलग ही तस्वीर पेश की है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के इन हवाई हमलों में कम से कम 13 आम नागरिक मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। काबुल प्रशासन ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए सही समय पर उचित जवाब देने की चेतावनी दी है।
क्या है विवाद की असली जड़?
2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही पाकिस्तान में आतंकी हमलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाहगाहों का आनंद ले रहे हैं। हालांकि, काबुल इन आरोपों को हमेशा खारिज करता आया है। ताजा हमलों से पहले बाजौर जिले में एक आत्मघाती हमले में 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी, जिसका आरोप पाकिस्तान ने अफगान मूल के हमलावर पर लगाया था।
परमाणु शक्ति बनाम गुरिल्ला युद्ध
विशेषज्ञों के अनुसार, कागज पर पाकिस्तान की सैन्य शक्ति (6 लाख सक्रिय सैनिक, 400 लड़ाकू विमान और परमाणु हथियार) अफगानिस्तान की तुलना में कहीं अधिक है। हालांकि, तालिबान के पास दशकों का युद्ध लड़ने का अनुभव है। फिलहाल डूरंड लाइन पर दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं, जिससे दक्षिण एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
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