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नेपाल जा रहे US दूत सर्जियो गोर, पीएम बालेन से मुलाकात पर सस्पेंस! महाशक्तियों के बीच फंसा पड़ोसी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

नेपाल में नई सरकार बनते ही अमेरिका और चीन में कूटनीतिक होड़ तेज हो गई है। ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर के 30 अप्रैल के अहम नेपाल दौरे, चीनी आपत्तियों और इसके भू-राजनीतिक मायनों पर पढ़ें हमारी विस्तृत रिपोर्ट।

अमेरिका की ओर से नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) से मुलाकात का अनुरोध किया गया है। यह अनुरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास और दक्षिण तथा मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर के नेपाल दौरे के संदर्भ में आया है। लेकिन नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह इस मुलाकात को लेकर अभी पक्का फैसला नहीं ले पाए हैं। कारण? पीएम शाह ने स्पष्ट रूप से एक नया बेंचमार्क तय कर दिया है। वे विदेशी देशों के केवल मंत्री स्तर या उससे ऊपर के अधिकारियों से ही व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे। मार्च में शपथ लेने के बाद से पीएम बालेन शाह ने किसी भी विदेशी राजदूत या जूनियर अधिकारी से व्यक्तिगत मुलाकात नहीं की है, भले ही कई दूतावासों ने अनुरोध किया हो। उनका कहना है कि यह बेंचमार्क विदेश नीति को मजबूत और सम्मानजनक बनाने के लिए है।

नेपाल में प्रभाव जमाने की होड़

नेपाल में नए राजनीतिक समीकरण बनने के बाद विदेशी ताकतों, विशेषकर अमेरिका और चीन के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ तेज हो गई है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर 30 अप्रैल को काठमांडू के चार दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं।

सर्जियो गोर कौन हैं और उनका दौरा क्यों अहम है?

सर्जियो गोर को डोनाल्ड ट्रंप का बेहद करीबी माना जाता है। वह वर्तमान में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्यरत हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा जनवरी के मध्य में नेपाल से तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डीन थॉम्पसन को वापस बुलाए जाने के बाद से, काठमांडू में कोई स्थायी अमेरिकी राजदूत नहीं है। ऐसे में गोर नई दिल्ली से ही नेपाल के मामलों की देखरेख कर रहे हैं।

ट्रंप ने गोर को दक्षिण और मध्य एशिया के लिए ‘विशेष दूत’ भी नियुक्त किया है। इस कारण उनका कूटनीतिक कद अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव (समीर पॉल कपूर) से भी बड़ा हो गया है। इससे पहले वह वाइट हाउस में राष्ट्रपति के सहायक और ‘प्रेसिडेंशियल पर्सनेल’ के निदेशक रह चुके हैं, जहां उन्होंने रिकॉर्ड समय में हजारों राजनीतिक नियुक्तियां की थीं।

अमेरिका और चीन के बीच आमने-सामने की कूटनीति

नेपाल के नए प्रशासन को लुभाने के लिए वाशिंगटन और बीजिंग दोनों सक्रिय हैं। इस दौरे के ठीक पहले कुछ अहम कूटनीतिक घटनाक्रम हुए हैं।

अमेरिका के सहायक सचिव का दौरा

हाल ही में (बुधवार को) दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक सचिव समीर पॉल कपूर ने अपनी तीन दिवसीय नेपाल यात्रा संपन्न की है। उन्होंने नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले और विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को लेकर अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई।

कपूर को नेपाल सरकार की ओर से आश्वासन मिला है कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए पुराने कानूनों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने से भी मुलाकात की।

चीन का त्वरित पलटवार (काओ जिंग का दौरा)

जैसे ही कपूर अपनी यात्रा समाप्त कर रहे थे, चीन ने भी अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को काठमांडू भेज दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग की उप महानिदेशक काओ जिंग सोमवार को काठमांडू पहुंचीं। उन्होंने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राई और विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव भृगु ढुंगाना से मुलाकात की।

चीन की मुख्य चिंताएं

काओ जिंग ने उन पुरानी चिंताओं को दोहराया जो हाल ही में चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने विदेश मंत्री खनाल के सामने (7 अप्रैल को) रखी थीं।

  • अमेरिका के MCC (मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन) कॉम्पैक्ट के नेपाल में लागू होने पर आपत्ति।
  • नेपाल को अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (SPP) में शामिल न होने की चेतावनी।
  • अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क का हिस्सा बनने से बचने की सलाह।

प्रधानमंत्री शाह का कूटनीतिक प्रोटोकॉल: क्या होगी गोर से मुलाकात?

सर्जियो गोर के दौरे का मुख्य फोकस व्यापार और निवेश पर होगा। अमेरिकी पक्ष ने 1 मई को नेपाल के प्रधानमंत्री शाह के साथ गोर की बैठक का अनुरोध किया है। हालांकि, यह बैठक होगी या नहीं, इस पर संशय बरकरार है।

संशय का कारण

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक नया नियम तय किया है कि वह केवल विदेशी मंत्रियों या उससे उच्च स्तर के अधिकारियों से ही अकेले में मुलाकात करेंगे। वह विदेशी राजदूतों या जूनियर अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलने से बच रहे हैं। उन्होंने 8 अप्रैल को सभी राजदूतों से एक साथ संयुक्त मुलाकात की थी।

अमेरिकी अधिकारी कपूर ने अपनी यात्रा के दौरान पीएम शाह से मिलने का समय नहीं मांगा था, लेकिन गोर के हाई-प्रोफाइल बैकग्राउंड और ट्रंप से नजदीकी के कारण अमेरिका इस मुलाकात के लिए दबाव बना रहा है।

पीएम शाह की नई विदेश नीति का संदर्भ

बालेन शाह पूर्व काठमांडू मेयर रह चुके हैं और मार्च के आम चुनाव में भारी बहुमत से प्रधानमंत्री बने। उन्होंने सत्ता संभालते ही राजनयिक प्रोटोकॉल में बदलाव किया। पहले नए प्रधानमंत्री राजदूतों से अलग-अलग मिलते थे, लेकिन शाह ने इसे समाप्त कर दिया। उनका तर्क है कि इससे नेपाल की गरिमा बनी रहती है और छोटे-मोटे अधिकारियों से मिलने की परंपरा नहीं बढ़ती। उन्होंने कहा है कि नेपाल की विदेश नीति विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा समृद्धि पर आधारित होगी।

दौरे की तैयारियां

इस दौरे की तैयारियों को लेकर नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के उप-प्रमुख सुरेंद्र थापा ने गुरुवार को अमेरिकी राजनयिक जेसन मीक्स से मुलाकात की। मीक्स पहले काठमांडू में अमेरिकी दूतावास में काम कर चुके हैं और हाल ही में दिल्ली स्थानांतरित हुए हैं।

भारत का संभावित कदम

अमेरिका और चीन के इन बैक-टू-बैक दौरों को देखते हुए, भारत (नई दिल्ली) भी नेपाल की नई सरकार के साथ जुड़ने की तैयारी कर रहा है। भारत जल्द ही अपने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को काठमांडू भेज सकता है।

इस संभावित दौरे की जानकारी मॉरीशस में हुए नौवें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने दी थी, हालांकि भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पत्राचार नहीं हुआ है।

इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्री खनाल भारत द्वारा वित्त पोषित चल रही परियोजनाओं और कार्यक्रमों की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि भारत के साथ बातचीत का एजेंडा तय किया जा सके।

नेपाल वर्तमान में वैश्विक महाशक्तियों के लिए भू-राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया है। सर्जियो गोर का दौरा और उस पर नेपाली प्रधानमंत्री का रुख यह तय करेगा कि नेपाल का नया नेतृत्व अमेरिका, चीन और भारत के बीच कैसे संतुलन बनाता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN