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नाटो से इस देश को हटाओ, ब्रिटेन पर भी नजर; साथी देशों को सजा देने की तैयारी में अमेरिका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध में साथ ने देने वाले नाटो देशों को अमेरिका सजा देने की तैयारी कर रहा है। इस लिस्ट में सबसे पहला नाम स्पेन का है, जिसने अमेरिका के ईरान अभियान का खुलकर विरोध किया था। इसके अलावा दूसरे नंबर पर ब्रिटेन है, जिसने फॉकलैंड द्वीप को लेकर वाशिंगटन के रुख का विरोध किया था।

पश्चिम एशिया का संकट भले ही अभी थमा न हो, लेकिन अमेरिका ने इस युद्ध में साथ न देने वाले नाटो देशों को सजा देने की तैयारी शुरू कर दी है। पेंटागन से सामने आए एक ईमेल में इस बात का खुलासा हुआ है कि ट्रंप प्रशासन ईरान अभियान में साथ न देने वाले नाटो देशों को सजा देने के उपायों पर विचार कर रहा है। इसके अलावा फॉकलैंड द्वीप विवाद को लेकर ब्रिटेन के दावे पर वाशिंगटन के रूख की समीक्षा की जा रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन नाटो के अन्य देशों के अलावा मुख्य रूप से स्पेन से नाराज है। क्योंकि यही वह देश है, जिसने खुले तौर पर ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था। स्पेन ने ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका को खुले तौर पर खरी-खोटी सुनाई थी। इसके बाद ट्रंप ने भी इस पर अपना गु्स्सा जाहिर किया है। अब जबकि अमेरिका ईरान युद्ध से निकलने की कगार पर है, तो वह अब इसका हिसाब चुकता करने की प्रक्रिया में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों के बीच में इस बात को लेकर नाराजगी है कि नाटो देशों ने अपने एयर बेसों का उपयोग करने में भी देरी की थी। इसका जवाब देने के लिए पेंटागन में इस बात की चर्चा है कि जिन देशों ने मदद करने से इनकार किया था, उन्हें अब नाटो के बड़े पदों से दूर रखना है।

स्पेन और ब्रिटेन पर होगा असर

अमेरिका वैसे तो नाटो से सभी सहयोगियों से नाराज है, लेकिन मुख्य तौर पर यह स्पेन और ब्रिटेन के रवैए को लेकर परेशान है। ईरान युद्ध के समय जब राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज खोलने के लिए नाटो की मदद मांगी थी, तो स्पेन और ब्रिटेन ने ही सबसे पहले खुले तौर पर इससे इनकार किया था। इतना ही नहीं ब्रिटेन ने हिंद महासागर में मौजूद अपने बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत देने में भी काफी समय तक परहेज किया था। इसकी वजह से ट्रंप ने खुले आम ब्रिटिश पीएम का मजाक भी उड़ाया था। इसके अलावा इस युद्ध के ठीक पहले ब्रिटेन फॉकलैंड द्वीप पर अपना अधिकार छोड़ने की बात कर रहा था, जिसे लेकर भी ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की थी।

कमजोर दिख रहा नाटो

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोवियत रूस का सामना करने के लिए अमेरिका ने जिस सैन्य संगठन की स्थापना की थी। वह अब कमजोर दिख रहा है। यूक्रेन युद्ध के समय नाटो देशों का एक साथ न दिखना इस सैन्य संगठन की कमजोरी को उजागर करता है। पहले से ही इस संगठन के देशों से सैन्य खर्चे के नाम पर नाराज ट्रंप का गुस्सा ईरान युद्ध के बाद और भी ज्यादा बढ़ गया है। होर्मुज खोलने के लिए ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कई बार इन देशों का आह्वान किया, लेकिन कोई भी देश आगे नहीं आया। हालांकि, इससे पहले ट्रंप का जैसा रवैया रहा था, उसकी वजह से उम्मीद भी नहीं थी कि कोई देश आगे आएगा।

ट्रंप ने इन देशों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया है। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति के निजी मैसेज सार्वजनिक कर दिए। ब्रिटिश पीएम का मजाक उड़ाया। जर्मनी के चांसलर को भला-बुरा कहा और अपनी सबसे खास सहयोगी इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को भी खरी-खोटी सुना दी। इसके बाद जब होर्मुज पर मदद करने के लिए नाटो देश नहीं आए, तो ट्रंप ने इन देशों को कायर तक कह दिया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN