Home विश्व समाचार देखन में छोटन लगे, पर घाव करे गंभीर; ईरान पर क्या है...

देखन में छोटन लगे, पर घाव करे गंभीर; ईरान पर क्या है US मिलिट्री का तीन सूत्री प्लान? ट्रंप को आज ब्रीफिंग

13
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

US military Plan for Iran War: मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने Axios को बताया कि CENTCOM ने ईरान में एक छोटा लेकिन दमदार सैन्य ऑपरेशन की योजना बनाई है। इस योजना में वहां के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शामिल है।

US military Plan for Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष और तनातनी अब आठवें सप्ताह में प्रवेश कर रहा है। संघर्ष इतना लंबा खिंचने से अमेरिका में आम आदमी से लेकर सेना तक में उलझन और कशमकश है। युद्ध से लेकर सैन्य तैनाती तक पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ निर्णायक और आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए तीन नई योजनाएं पेश करने जा रहा है। Axios की रिपोर्ट में कहा गया है कि CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर राष्ट्रपति ट्रंप को दिए जाने वाली इस ब्रीफिंग का नेतृत्व करेंगे। यह इस बात का संकेत है कि राष्ट्रपति युद्ध को निर्णायक मोड़ पर ले जाने या बातचीत के गतिरोध को तोड़ने के लिए फिर से सैन्य अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।

छोटा लेकिन दमदार सैन्य ऑपरेशन

इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने Axios को बताया कि CENTCOM ने ईरान में एक “छोटा लेकिन दमदार” सैन्य ऑपरेशन की योजना बनाई है। इस योजना में संभवतः वहां के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शामिल है। इसका मकसद मौजूदा गतिरोध को तोड़ना और बातचीत के कई असफल दौरों के बाद दोनों पक्षों को किसी आम सहमति तक पहुंचाने की कोशिश करना है। यानी यह सैन्य ऑपरेशन देखने में भले ही छोटा लगे लेकिन उसके घाव गंभीर हों ताकि ईरान बातचीत के लिए झुकने को मजबूर हो सके।

दूसरी और तीसरी योजना क्या?

राष्ट्रपति ट्रंप के सामने पेश किए जाने वाले दूसरे प्लान के तहत होर्मुज़ समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz) के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा करना शामिल है, ताकि वहां से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू की जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम के लिए जमीनी सेना को तैनात करने की भी जरूरत पड़ सकती है। ब्रीफिंग में जिस तीसरी योजना पर चर्चा होने की संभावना है, उसमें विशेष बलों द्वारा एक ऑपरेशन चलाना शामिल है। इसका मकसद ईरान के पास मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करना होगा।

अगर ईरान ने किया हमला तो…

सूत्रों ने बताया कि जॉइंट चीफ़्स के चेयरमैन जनरल डैन केन के भी गुरुवार की इस ब्रीफिंग में शामिल होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सैन्य अधिकारी इस संभावना पर भी विचार कर रहे हैं कि इस नाकेबंदी के जवाब में अगर ईरान ने भी इस क्षेत्र में मौजूद US सेना के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब कैसे देना है। बता दें कि ट्रंप ने एक दिन पहले ही अपने सहयोगियों से होर्मुज़ समुद्री मार्ग की नाकेबंदी को लंबे समय तक जारी रखने की तैयारी करने को कहा है।

ईरान पर दबाव बनाना मुख्य रणनीति

दरअसल, ट्रंप इस नाकेबंदी को ईरान पर दबाव बनाने की अपनी मुख्य रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने ईरान के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही रोककर, वहां की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर दबाव बनाए रखने का फैसला किया है। उनके पास मौजूद अन्य विकल्पों में युद्ध को पूरी तरह खत्म करना या फिर से बमबारी शुरू करना शामिल है लेकिन, इन दोनों ही विकल्पों में नाकेबंदी के मुकाबले कहीं ज्यादा जोखिम है।

युद्ध में अब तक 25 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका अमेरिका

हालांकि, सूत्रों ने Axios को बताया कि अगर ईरान अपना विरोध जारी रखता है, तो US राष्ट्रपति सैन्य कार्रवाई करने के विकल्प को अपना सकते हैं क्योंकि वह ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात को पूरी तरह से “निचोड़ने” की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस बीच, पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ईरान के साथ इस युद्ध में अमेरिका अब तक 25 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है, जिसका अधिकांश हिस्सा गोला-बारूद की आपूर्ति में लगा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN