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दिल्ली हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी एआर रहमान के ख़िलाफ़ सुनाया फ़ैसला

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Source :- BBC INDIA

एआर रहमान

इमेज स्रोत, Ashish Vaishnav/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

2 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 6 मिनट

सुप्रीम कोर्ट ने 13 फ़रवरी को कहा कि फ़िल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ में शामिल गीत ‘वीरा राजा वीरा’ का संगीत ठाकर बंधुओं की रचित ‘शिव स्तुति’ से लिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज की बेंच के फ़ैसले को बरक़रार रखा है.

भारतीय शास्त्रीय गायक फ़ैयाज़ वसीफु़द्दीन ठाकर ने साल 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी.

याचिका में उन्होंने कहा था, ”निर्देशक मणिरत्नम की बनाई गई फ़िल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन 2’ में शामिल गीत ‘वीरा राजा वीरा’ का संगीत मेरे पिता नासिर फ़ैयाज़ुद्दीन ठाकर और ज़हीरुद्दीन ठाकर की रचित ‘शिव स्तुति’ के संगीत से कॉपी किया गया है.”

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वसीफ़ुद्दीन ठाकर ने अपनी याचिका में कहा कि दोनों के निधन के बाद क़ानूनी वारिसों के बीच हुए पारिवारिक समझौते के तहत उन्हें इसका कॉपीराइट दिया गया था.

उन्होंने कहा कि फ़िल्म की टीम ने ‘वीरा राजा वीरा’ की साउंड रिकॉर्डिंग के लिए उन्हें उचित श्रेय नहीं दिया.

उन्होंने मांग की कि फ़िल्म बनाने वाली कंपनियां मद्रास टॉकीज़, लाइका प्रोडक्शन और संगीतकार एआर रहमान उन्हें मुआवज़ा दें.

एआर रहमान की ओर से क्या कहा गया?

 मणि रत्नम (बीच में) और कमल हासन के साथ ए.आर. रहमान

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मामले की सुनवाई के दौरान एआर रहमान के वकील ने वसीफु़द्दीन ठाकर के आरोपों से इनकार किया.

रहमान की ओर से कहा गया कि ‘शिव स्तुति’ ध्रुपद शैली का पारंपरिक संगीत है. उनका तर्क था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत पश्चिमी संगीत की बुनियाद पर तैयार किया गया है और यह केवल हिंदुस्तानी संगीत परंपरा तक सीमित नहीं है.

एआर रहमान ने यह भी कहा कि पब्लिक डोमेन में मौजूद शास्त्रीय रचनाओं पर कोई भी व्यक्ति विशेष अधिकार का दावा नहीं कर सकता.

दिल्ली हाई कोर्ट में दो साल से चल रहे इस मामले में पिछले साल 25 अप्रैल को फ़ैसला सुनाया गया था.

फ़ैसले में जज ने कहा कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत ‘शिव स्तुति’ के संगीत के आधार पर और उससे प्रेरित होकर कुछ बदलावों के साथ बनाया गया है.

जज ने अपने फ़ैसले में कहा था कि एआर रहमान का संगीत याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन करता है और आदेश दिया था कि इस गीत की क्रेडिट स्लाइड सभी ओटीटी और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर बदली जाए.

उन्होंने कहा था कि क्रेडिट स्लाइड में यह लिखा जाए कि यह संगीत दिवंगत उस्ताद नासिर फ़ैयाज़ुद्दीन ठाकर और ज़हीरुद्दीन ठाकर की ‘शिव स्तुति’ पर आधारित है.

जज ने यह भी आदेश दिया था कि एआर रहमान दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास 2 करोड़ रुपये जमा करें, जो मामले के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा.

साथ ही उन्होंने एआर रहमान को कहा था कि वो वादी वसीफ़ुद्दीन ठाकर को मुक़दमे के ख़र्च के रूप में 2 लाख रुपये दें.

इसके ख़िलाफ़ एआर रहमान की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच में अपील की गई.

डिवीज़न बेंच ने एआर रहमान के ख़िलाफ़ दिए गए फै़सले को रद्द कर दिया. इसके बाद वसीफु़द्दीन ठाकर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की.

‘राग पर कोई दावा नहीं’

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला  बागची

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शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच के सामने इस याचिका पर सुनवाई हुई.

सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने कहा कि एआर रहमान ने स्वीकार किया है कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत ठाकरवाणी संगीत परंपरा से जुड़ा है.

उन्होंने रहमान के वकील से पूछा, ”ऐसे में क्या यह माना जा सकता है कि याचिकाकर्ता के पूर्वजों ने ही इसे सबसे पहले गाया था?”

इस पर एआर रहमान की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ जानकारी दी.

उन्होंने कहा, “जब 1991 में कुंटेचा, 2015 में उदय पावलकर, 2017 में निर्मला दवे और 2023 में कबीरी गरुम ने इसी संगीत का इस्तेमाल किया, तब याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं की.”

इस पर वसीफु़द्दीन ठाकर की ओर से कहा गया, “हम राग पर अधिकार का दावा नहीं कर रहे हैं. हम केवल संगीत के कंपोजिशन पर अधिकार का दावा कर रहे हैं.”

इस दौरान जस्टिस ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, ”यह विशेषज्ञों के बीच की लड़ाई नहीं है. आपका याचिकाकर्ता एक पेशेवर संगीतकार है. वे शास्त्रीय संगीत के अनुयायी हैं. वे सम्मान और पहचान की अपेक्षा करते हैं.”

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज की ओर से एआर रहमान को 2 करोड़ रुपये जमा करने के दिए गए आदेश को बरकरार रखा.

न्यायाधीशों ने एआर रहमान को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर जवाब देने के लिए समय देते हुए मामले की सुनवाई 20 फ़रवरी तक के लिए स्थगित कर दी.

कॉपीराइट विवाद क्यों जारी है?

संगीतकार इलैयाराजा

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फिल्म समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार आरएस अंधानन ने पहले बीबीसी तमिल से कहा था, ”ऐसे मामले तब सामने आने लगे जब इलैयाराजा ने अपने गीतों के लिए कॉपीराइट का दावा करते हुए मुक़दमा दायर किया.”

संगीतकार इलैयाराजा अपने गीतों का इस्तेमाल करने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई कर रहे हैं.

उन्होंने अक्तूबर 2021 में जारी एक बयान में भी इसका ज़िक्र किया था.

इलैयाराजा ने कहा था, ”2014 से मेरे गीतों पर जो अदालत का प्रतिबंध था, उसे हटाया जाएगा. उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”

इलैयाराजा ने पिछले वर्ष अप्रैल में अभिनेता अजीत कुमार की फिल्म ‘गुड, बैड, अगली’ में अपने रचित तीन गीतों के बिना अनुमति उपयोग पर फिल्म टीम को नोटिस भेजा था.

उन्होंने ‘ओथा रूपयम थारिन’, ‘एन जोदी मांजा कुरुवी’ और ‘इलामायी इधो इधो’ गीतों के लिए 5 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा है.

कॉपीराइट के बारे में बीबीसी तमिल से बात करते हुए वकील सरवनन ने कहा, ”संगीत से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरुक लोग अदालत का रुख़ कर अपने अधिकारों को बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं. यह स्वागत योग्य कदम है.”

वह फ़िलहाल इलैयाराजा की ओर से दायर किए गए कॉपीराइट मामलों को देख रहे हैं.

सरवनन कहते हैं, ”जब कोई फ़िल्म बनती है तो संगीत, गीत और बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए भुगतान किया जाता है. फिल्म रिलीज होने के बाद पूरी फिल्म बेची जा सकती है. फिर फिल्म को गीतों सहित प्रदर्शित किया जा सकता है. लेकिन जब गीतों का अलग से इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका अधिकार केवल संगीतकार के पास होता है. ये उसके संगीत कार्य के अधिकार होते हैं. यह बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत आता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS