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तेल संकट के बीच अमेरिका ने दी टेंशन, बोला- अब नहीं बढ़ेगी रूसी और ईरानी तेल पर छूट

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल को लेकर सख्त तेवर दिखाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अब छूट की समयसीमा बढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानियों को कोई छूट नहीं मिलेगी।

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत समेत तमाम देशों को रूसी और ईरानी तेल खरीद के लिए छूट की समयसीमा बढ़ा दी थी। पिछली समय सीमा 10 अप्रैल को खत्म हो रही थी जिसे एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। वहीं अब इस मामले में अमेरिका कड़े तेवर दिखा रहा है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि समुद्र में मौजूद रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति देने वाली छूट की अवधि बढ़ाने की अमेरिका की कोई योजना नहीं है।

अब नहीं बढ़ाई जाएगी छूट की समय सीमा

बेसेंट ने साथ ही कहा कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के लिए दी गई एक बार दी गई छूट को आगे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठता। बेसेंट ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, ‘ईरानियों के लिए छूट नहीं दी जाएगी।’ उन्होंने कहा, ”हमने नाकाबंदी कर रखी है और वहां से कोई तेल बाहर नहीं आ रहा।” उन्होंने कहा, ”हमें लगता है कि अगले दो-तीन दिन में उन्हें उत्पादन बंद करना पड़ेगा जो उनके तेल के कुओं के लिए बहुत खराब होगा।’

संकट में ऊर्जा बाजार

बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर दुनिया चिंतित है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार संकट में हैं। अमेरिका ने कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के इरादे से मार्च में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री के लिए छूट दी थी।

इसके बाद बेसेंट ने ‘वाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में कहा था कि प्रतिबंधों से दी गई राहत की अवधि बढ़ाने की उनकी कोई योजना नहीं है लेकिन इसके दो ही दिन बाद वित्त मंत्रालय ने छूट की अवधि बढ़ा दी थी। वित्त मंत्री ने वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के असर और अन्य विषयों पर ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से साक्षात्कार में अपने रुख में पहले आए बदलाव की वजह बताई।

बेसेंट ने कहा कि पिछले सप्ताह विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की बैठकों के दौरान ”10 से अधिक बेहद कमजोर और गरीब देशों ने मुझसे आकर कहा, क्या आप मदद कर सकते हैं?’ उन्होंने कहा, ”यह उन कमजोर और गरीब देशों के लिए था लेकिन मुझे नहीं लगता कि हम एक और बार अवधि का विस्तार करेंगे। मुझे लगता है कि समुद्र में मौजूद रूसी तेल का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN