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तेल की बूंद के लिए तरसा देगा ईरान, युद्ध चलता रहा तो बाब-अल-मंदेब को भी बंद करने की योजना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। युद्ध के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही फारस की खाड़ी से ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है।

Iran to close Bab-el-Mandeb: ईरान अब पूरी दुनिया को तेल की बूंद बूंद को तरसने की तैयारी कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग पूरी तरह से बंद होने के बाद पूरी दुनिया में ईंधन संकट गहराने के बाद अब ईरान तेल आपूर्ति के एक और अहम रास्ते को बंद करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेहरान का वॉर रूम अरब पेनिनसुला में बाब-अल-मंदेब के एक और स्ट्रेटेजिक चोकपॉइंट को बंद कर सकता है।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका और इजरायल ने उस पर हमले जारी रखे और युद्ध को लंबा खींचने का फैसला किया तो ईरान बाब-अल-मंदेब से जहाजों का रास्ता रोक देगा। रिपोर्ट में ईरान मिलिट्री मॉनिटर का हवाला दिया गया है। कहा जा रहा है कि अमेरिका ने नए सुप्रीम लीडर या अन्य लीडरशिप पर हमला किया तो ईरान यह विकल्प खोल सकता है।

ईरान की धमकी

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध खत्म होने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि ईरान अपने इलाके से एक लीटर तेल भी निर्यात नहीं होने देगा। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि ईरान में जारी युद्ध लगभग खत्म हो चुका है। हालांकि IRGC ने जवाब देते हुए कहा कि युद्ध का अंत ईरान तय करेगा और अगर अमेरिकी और इजरायली हमले जारी रहे तो तेहरान इस इलाके से एक लीटर तेल भी एक्सपोर्ट नहीं होने देगा।

अहम रास्ता है बाब-अल-मंदेब

गौरतलब है कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य एक संकरा और रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर और हिंद महासागर के बीच एक अहम समुद्री लिंक भी है। बाब अल-मंदेब अरब पेनिनसुला पर यमन और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में जिबूती के बीच स्थित है और यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग चोकपॉइंट्स में से एक के रूप में काम करता है।

गहराया संकट

यह रिपोर्ट्स ऐसे समय में सामने आई है जब युद्ध की वजह से खाड़ी इलाके का एक जरूरी जलमार्ग होर्मुज की खाड़ी लगभग बंद है। ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया था और इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों को भी निशाना बनाया था। स्वतंत्र शोध कंपनी रिस्टैग एनर्जी के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते रोजाना लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल भेजा जाता है, जो वैश्विक आपूर्ति का 20 प्रतिशत है। ऐसे में ईंधन आपूर्ति पर संकट गहरा गया है।

तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ीं

इस बीच पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष तेज होने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जबर्दस्त उछाल देखा गया। कच्चा तेल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाने के बाद थोड़ा नरम पड़ता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। जंग के दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर जाने से फारस की खाड़ी से तेल और गैस के उत्पादन तथा परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में खासा उछाल देखने को मिला है। इस जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान से तेल और गैस का निर्यात होता है। लेकिन निर्यात बाधित होने से इराक, कुवैत और यूएई को तेल उत्पादन घटाना पड़ा है। ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अधिक ऊर्जा लागत से महंगाई बढ़ने और उपभोक्ता खर्च पर दबाव की आशंका है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN