Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Fairfax Media via Getty Images
4 घंटे पहले
पढ़ने का समय: 8 मिनट
मशहूर गायिका आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्हें शनिवार शाम दिल का दौरा पड़ने के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉक्टर प्रतीप समदानी ने बीबीसी को बताया कि आशा भोसले फेफड़ों की बीमारी और उम्र से संबंधित अन्य बीमारियों से भी जूझ रही थीं. मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उनकी मृत्यु हो गई.
उनके निधन से पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री शोक में डूब गई है. साथ ही उनके प्रशंसकों के बीच भी काफ़ी मायूसी है.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
कलेक्टिव न्यूज़रूम की सीईओ और बीबीसी की तत्कालीन संवाददाता रूपा झा ने 2010 में आशा भोसले से बात की थी. आप यहां यह पूरी बातचीत सुन सकते हैं.
इसी इंटरव्यू से कुछ ख़ास बातें हम यहां अपने पाठकों के लिए रख रहे हैं.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

जब आंखों ही आंखों में होती थी बातें
रूपा झाः जब आप लोगों का- रफ़ी साहब, मुकेश जी, किशोर कुमार- का शुरुआती दौर था लाइव रिकॉर्डिंग का, ज़रा उसके बारे में बताइए.
आशा भोसलेः लाइव रिकॉर्डिंग ही होती थी तब, सारे म्यूज़िशियन सामने होते थे. हमें हमारी लाइनें पता होती थीं. सब लोग हम एक-दूसरे को मदद करते थे कि यह सुर इधर जा रहा है, उधर जा रहा है… मैं कान में बताती थी कि यह सुर इधर जाना या यहां रुकना है- इसी तरह की बातें. किशोर और रफ़ी के साथ मैं ऐसा बहुत करती थी.
दीदी की आदत थी कि वह सिर्फ़ आंखों से बताती थीं… कि शुरू करो. मैं उसको बताती थी कि अब तुम्हारी लाइन आ रही है. इस तरह हम एक-दूसरे को बताते थे.
रूपा झाः इस तरह की इशारेबाज़ी में आपकी सबसे अच्छी ट्यूनिंग किसके साथ थी?
आशा भोसलेः सभी के साथ अच्छी थी, किशोर के साथ बहुत अच्छी थी और दीदी के साथ भी. दीदी के साथ मेरे जो गाने हैं… जैसे आलाप के साथ शुरू होते हैं तो आलाप के लिए तो वन-टू दे नहीं सकते हैं, आलाप तो अचानक शुरू होता है. तो मैं दीदी को आड़ी आंख से देखती थी, उसका हाथ ऊपर जाता था तो मैं समझ जाती थी कि अब तान शुरू होने वाली है. तो ऐसे हमारा आलाप हमारा शुरू हो जाता था. शंकर-जयकिशन के गानों में इस्तेमाल बहुत होता था और वह हमको एक-दूसरे को देखकर ही करना पड़ता था.
पंचम ने झाड़ू गिफ़्ट किया
इमेज स्रोत, Pancham Unmixed
रूपा झाः आप सफ़ाई की इतनी शौकीन हैं कि पंचम दा ने झाड़ू गिफ़्ट किया था?
आशा भोसलेः झाड़ू और मच्छी… वह खाने-पीने के काफ़ी शौकीन थे और मैं खाना अच्छा बनाती थी. मैं खाना बनाती हूं तो मुझे मछली दी थीं- बनाने के लिए और उसे झाड़ू से ढक कर दिया था- सफ़ाई करने के लिए. साथ में एक बंगड़ी भी थी, उसमें भी एक सोने का झाड़ू लगाकर दिया था.
रूपा झाः पंचम जी के साथ गाने-संगीत को लेकर पति-पत्नी जैसा झगड़ा नहीं होता था?
आशा भोसलेः नहीं, लेकिन कभी-कभी मुझे कोई गाना पसंद नहीं आता था तो मैं कह देती थी कि मुझे पसंद नहीं आया. वह तर्क देता था कि यह अच्छा है, वह अच्छा है लेकिन मैं कहती थी कि नहीं पसंद आया तो नहीं पसंद आया. वैसे वह मेरी आंख के इशारे से समझ जाता था कि मुझे पसंद नहीं आया.
जैसे कि तीसरी कसम का रफ़ी साहब का गाना गाया- ‘तुमने मुझे देखा, होकर मेहरबां’. मुझे पसंद नहीं आया. मैंने पंचम को कहा कि तीसरी कसम के सारे गाने फ़ास्ट हैं यह स्लो लग रहा है… मुझे इसमें पंचम, बर्मन नहीं दिख रहा.
उन्होंने कहा कि वह सिचुएशन है ऐसी… मेरा बेटा भी मुझसे कहता है कि वह बहुत अच्छा गाना है लेकिन मैं कहती हूं कि मेरी अपनी पसंद है
पसंद की बात है तो पंचम के सब गाने अच्छे हैं.
चांद का अचार
इमेज स्रोत, Vijayananda Gupta/Hindustan Times via Getty Images
रूपा झाः इजाज़त के गाने कंपोज़ करने में क्या आपका और गुलज़ार जी का काफ़ी योगदान था?
आशा भोसलेः गुलज़ार जी के गाने अलग होते हैं… वह चांद का बहुत इस्तेमाल करते हैं… चांद यह, चांद वह, चांद की मिस्री, चांद को तोड़कर खाओ, कुछ भी कहते हैं… तो मैं उनसे मज़ाक़ करती हूं कि आप चांद का अचार डाल लो एक बार.
उनके लिखे हुए गाने बहुत अच्छे थे, अलग क़िस्म के… पंचम की बहुत बनती थी उनसे और झगड़े भी होते थे… पंचम कहते थे कि तुम्हें तो मीटर की समझ ही नहीं है लेकिन गाने अच्छे बन जाते थे.
इमेज स्रोत, PUNNET KUMAR
प्यार करने वालों को भैया कहकर मैनेज करना
रूपा झाः गाना गाने से पहले क्या आप जो एक्ट्रेस परदे पर वह गाना गाने वाली है उसके बारे में सोचती हैं?
आशा भोसलेः गाने से पहले मैं कहती हूं कि कम से कम फ़ोटो दिखाओ एक्ट्रेस की जिसके लिए गाना है. तो गाते हुए कम से कम उसका चेहरा सामने आएगा… तो चेहरा जब सामने आता है तो गाने का ढंग थोड़ा बदल जाता है.
रूपा झाः बहुत सारे फ़ैन्स होंगे, बहुत सारे लोग चाहते होंगे आपको- कैसे मैनेज करती थीं?
आशा भोसलेः बहुत मैनेज करना पड़ता है. मैं उस ज़माने की बात कर रही हूं… जब नाम है, काम चल रहा है, पैसा भी आ रहा है… तो सच्चे प्यार करने वाले भी थे और वैसे भी लोग थे, चिट्ठियां भी आती थीं.
मैंने उसे इस तरह मैनेज किया कि इग्नोर करना, भाईसाहब बोलना, भैया बोलना, कभी राखी बांध देना… और इस तरह सटक गए. इतना ज़रूर है कि कभी किसी से झगड़ा नहीं किया. इतने लोग थे प्यार करने वाले कि सबका जवाब नहीं दे सकते थे, मर जाते उसमें.
लता से तुलना
इमेज स्रोत, STRDELAFP via Getty Images
रूपा झाः ऐसे परिवार में पैदा होना जिसमें सब संगीतकार हों, गायक हों अच्छा होता है या नुक़सान होता है उसका?
आशा भोसलेः मेरा ख़्याल है कि नुक़सान ही होता है.
ऐसे परिवार में, जिसमें कोई बड़ा नाम वाला होता है, तो जो उसके नीचे होते हैं उन्हें बहुत मुश्किल होती है, ऊपर आने में. मेरे साथ क्या हुआ कि मैं घर से चली गई जल्दी और अपना नाम ख़ुद करने के लिए बहुत मेहनत की. और अपना काम खुद करके वहां से बाहर आई.
लेकिन सबको यह मौका नहीं मिलता है, वह नाम के नीचे दब जाते हैं.
आपने देखा होगा कि बड़े-बड़े आर्टिस्टों के बच्चों का क्या होता है… मां इतनी सुंदर है तो हर वक़्त यह तुलना होती है कि मां जैसी बेटी नहीं है, बहन जैसी दूसरी बहन नहीं है. इस तुलना में उनका भविष्य ख़राब हो जाता है.
या तो फिर विलायत हुसैन जैसे हों जो अपने बच्चों को तैयार करें, उतनी ही मेहनत करें, तभी उनका नाम होगा.
मुझे बहुत तकलीफ़ हुई, मुझे हमेशा तराजू में डालकर रखा था… यह बड़ी कि वह बड़ी, इसका नाम ज़्यादा कि उसका नाम, यह अच्छा गाती है या वह अच्छा गाती है और बहन जैसी नहीं है- हर वक्त मुझे यही सुनने को मिलता था.
अगर मैं पंजाब से आई होती या मद्रास से या गुजरात से तो लोग कहते कि नंबर वन पर है यह लड़की या कम से कम बराबरी का कहते लेकिन बहन होने के नाते मुझे हमेशा नीचा किया जाता था.
लगता है कि मैं अभी 30 की ही हूं
इमेज स्रोत, STRDEL/AFP via Getty Images)
रूपा झाः क्या कभी सोचा था कि इतना लंबा सफ़र तय कर पाएंगी?
आशा भोसलेः नहीं, कभी नहीं. मैं इतना लंबा सोचने वाली औरत नहीं हूं. इतने लोग होते हुए, लोग मुझे पहचानेंगे, दुनिया में नाम होगा, दुनिया के सिंगर्स में नाम आएगा, इतना कभी नहीं सोचा था.
रूपा झाः आपके गानों में जो ज़िंदादिली है, वह कैसे मेनटेन करती हैं?
आशा भोसलेः मैं बचपन से ही ऐसी हूं. मुझे बैठना पसंद नहीं है. मैं कुछ न कुछ करती ही रहती हूं. इसीलिए मैं खड़ी भी हूं, गाना भी गा लेती हूं और बात भी कर लेती हूं. सब लोग कहते हैं कि इस उम्र में ऐसा हो जाता है, वैसा हो जाता है लेकिन मुझे नहीं लगता है कि कुछ होता है… सच में मुझे लगता है कि मैं 30 की हूं.
रूपा झाः क्या लगता है कि कुछ ऐसा रह गया है जो करना चाहती हैं…
आशा भोसलेः बहुत सी चीज़ें हैं, जैसे कि मुझे लगता है कि मुझे अच्छी अंग्रेज़ी बोलनी आती तो कितना अच्छा होता, मैं फ़्रांस जाती हूं तो लगता है कि मुझे फ्रेंच क्यों नहीं आती और मैं मैक्सिको गई तो वहां की भाषा बोलना चाहती थी- गाने गा लेती हूं में वैसे लेकिन बोलना क्यों नहीं आता…
बाकी लोगों का पता नहीं लेकिन हर चीज़ मुझे आनी चाहिए थी. मुझे क्लासिकल की बहुत बड़ी गायिका होना चाहिए था, वैसे मैं अगर क्लासिकल में जाती तो मैं क्लासिकल की बहुत बड़ी गायिका बनती क्योंकि मुझे क्लासिकल पसंद है और मेरी आवाज़ जिस तरह की है, वह क्लासिकल के लिए ठीक है. आपने मेरे क्लासिकल गाने सुने होंगे हिंदी में, उससे आपको पता चलेगा कि मेरी आवाज़ क्लासिकल के लिए बहुत अच्छी है.
रिटायरमेंट?
इमेज स्रोत, Fairfax Media via Getty Images
रूपा झाः कभी आपको रिटायरमेंट का ख़्याल आता है?
आशा भोसलेः कभी नहीं आता… मुझे लगता है कि मैं गाते-गाते मरने वाली हूं. तब तक ज़िंदा रहें, जब तक आप काम कर सकते हैं… यह मेरे लिए बहुत बड़ी चीज़ है.
मैं कभी नहीं चाहूंगी कि लेटी रहूं. मुझे सब यह आशीर्वाद दें कि जब तक हूं, खड़ी रहूं.
जब तक जीने में मज़ा है, तब तक मरने में मज़ा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
शॉर्ट वीडियो
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
-

00:48
वीडियो, मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन, अवधि 0,48
-

00:58
वीडियो, ईरानी नेता जिस फ़्लाइट से पाकिस्तान पहुँचे, उसका नाम ‘मिनाब 168’ रखा गया, अवधि 0,58
-

00:36
वीडियो, पाकिस्तान पहुंचे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अवधि 0,36
-

00:22
वीडियो, लेबनान: फोन कैमरा में रिकॉर्ड हुए इसराइली हमले, अवधि 0,22
-

01:21
वीडियो, कोलकाता में 1880 से चल रही ट्राम में सफ़र करने वाले क्या बोले?, अवधि 1,21
-

01:32
वीडियो, मेलानिया ट्रंप ने जेफ़री एपस्टीन और सर्वाइवर्स को लेकर क्या कहा?, अवधि 1,32
-

01:17
वीडियो, नीतीश कुमार ने ली राज्यसभा सदस्य की शपथ, अवधि 1,17
-

00:42
वीडियो, वृंदावन में नाव दुर्घटना, 10 लोगों की मौत, अवधि 0,42
-

01:16
वीडियो, नेतन्याहू ने ट्रंप को अमेरिकी सैन्य अफ़सर को बचाने की दी बधाई, अवधि 1,16
-

00:50
वीडियो, जहां आग ने सब राख कर दिया था, वहां अब खिले कई फूल, अवधि 0,50
-

01:37
वीडियो, प्रदूषण की वजह से यहां बच्चों की नाक से खून निकलने लगा, अवधि 1,37
-

01:28
वीडियो, अंतरिक्ष से कैसी दिखती है हमारी पृथ्वी, नासा ने शेयर कीं ताज़ा तस्वीरें, अवधि 1,28
-

01:06
वीडियो, पाकिस्तान में पेट्रोल की क़ीमतों में बड़ी कटौती, अवधि 1,06
-

01:01
वीडियो, ईरान में गिरे अमेरिकी फ़ाइटर जेट का मलबा दिखा, रेस्क्यू अभियान जारी, अवधि 1,01
-

00:35
वीडियो, जब ग्रीस के आसमान का रंग लाल हो गया, अवधि 0,35
-

01:19
वीडियो, स्पेस में पहुंचे नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने कही ये बातें, अवधि 1,19
-

01:25
वीडियो, आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा का अब तक का सफर, अवधि 1,25
-

01:09
वीडियो, अमेरिका ने ईरान के ‘सबसे बड़े पुल’ पर किया हमला, क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री?, अवधि 1,09
-

01:05
वीडियो, ट्रंप ने कहा, आने वाले हफ़्तों में ईरान पर करेंगे बड़ा हमला, अवधि 1,05
-

01:09
वीडियो, नासा के आर्टेमिस-2 ने भरी चांद की ओर उड़ान, अवधि 1,09
SOURCE : BBC NEWS























