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अपडेटेड 2 घंटे पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते कुछ दिनों से लगातार दावा कर रहे हैं कि उनकी ईरान से बातचीत हो रही है. लेकिन दूसरी ओर ईरान अमेरिका के प्रस्ताव को कभी ख़ारिज करता है तो कभी कहता है कि हमसे अमेरिका की कोई बातचीत नहीं है.
साथ ही ईरान यह भी कह रहा है कि उसकी वजह से ट्रंप को ‘बातचीत’ के रास्ते पर आना पड़ा है.
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि उन्हें (ईरान) जल्दी गंभीर होना होगा, वरना बहुत देर हो जाएगी, फिर वापसी का रास्ता नहीं बचेगा.
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को हाल ही में एक 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया था.
लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री ने यह ज़रूर कहा था कि ईरान के टॉप लीडर ‘अलग-अलग प्रस्तावों’ पर विचार कर रहे हैं. जबकि बाद में ईरान की ओर से पांच शर्तें सामने आईं.
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डोनाल्ड ट्रंप ने अब क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “जो लोग ईरान की ओर से बातचीत कर रहे हैं, वो बहुत अजीब हैं. वे हमसे समझौता करने की ‘मिन्नतें’ कर रहे हैं, जो उन्हें करना भी चाहिए क्योंकि उनकी सैन्य ताक़त पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है और वापसी का कोई मौक़ा नहीं है.”
उन्होंने लिखा, “फिर भी वे सार्वजनिक तौर पर कहते हैं कि वे (ईरान) सिर्फ़ हमारे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं. यह ग़लत है, उन्हें जल्दी गंभीर होना होगा, वरना बहुत देर हो जाएगी. जब ऐसा होगा तो वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा और हालात अच्छे नहीं होंगे.”
डोनाल्ड ट्ट्रंप ने बुधवार को दावा किया, “ईरान बातचीत के लिए मानने से डरता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके अपने लोग उन्हें मार देंगे.”
अमेरिका ने रखा था 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
28 फ़रवरी को जब यह युद्ध शुरू हुआ था, तब अमेरिका और इसराइल को उम्मीद थी कि उनकी सैन्य ताक़त ईरान को जल्दी ही गिरा देगी.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद अमेरिका और इसराइली मीडिया ने बताया था कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की मदद से ईरान को 15 पॉइंट्स का युद्धविराम प्रस्ताव दिया है.
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इसराइल के चैनल 12 नेटवर्क पर अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताक के बारे में बताया गया.
इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकना और यमन में हूती और लेबनान में हिज़्बुल्लाह जैसी “प्रॉक्सी मिलिशिया” को समर्थन बंद करना शामिल है.
इसके बदले ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर कुछ हद तक शेयर्ड कंट्रोल मिलेगा.
यह योजना उन प्रस्तावों जैसी लग रही थी जो अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर ने गज़ा और यूक्रेन की शांति वार्ताओं में इस्तेमाल किए थे. कुछ रिपोर्ट्स में इस बात का भी ज़िक्र है कि यह प्लान अमेरिका ने पाकिस्तान के ज़रिए ईरान तक पहुंचाया था.
ईरान ने अमेरिका के सामने ही रख दीं 5 शर्तें
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इसके बाद बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सरकारी टीवी पर कहा, “कुछ विचार देश के बड़े नेताओं को बताए गए हैं और अगर कोई फ़ैसला लेना होगा, तो ज़रूर लिया जाएगा.”
लेकिन इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि अमेरिका के सामने युद्ध ख़त्म करने के लिए 5 शर्तें रखी गईं हैं.
सरकारी टीवी चैनल ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. यह जानकारी एक वरिष्ठ राजनीतिक-सुरक्षा अधिकारी के हवाले से दी गई. इसके उलट ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी 5 शर्तें रख दी थीं.
मुंबई में स्थित ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने भी एक एक्स पोस्ट में इन्हीं शर्तों का ज़िक्र किया, हालांकि बाद में उस पोस्ट को डिलीट कर दिया.
ईरान की ओर से जो 5 शर्तें रखी गईं वो कुछ यूं हैं –
– दुश्मन की तरफ़ से हो रहे ‘हमले और हत्याएं’ पूरी तरह रुकें
– ऐसा समाधान हो कि ईरान पर दोबारा युद्ध न थोपा जाए
– युद्ध से हुए नुक़सान के मुआवज़े की गारंटी मिले, इसका भुगतान हो
– पूरे मोर्चों पर और पूरे क्षेत्र में शामिल सभी समूहों के लिए युद्ध का अंत हो
– अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और गारंटी मिलनी चाहिए कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अधिकार जताने का हक़ है
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