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ट्रंप ने इस देश में भेज दिए 100 अमेरिकी सैनिक, यहां रोज होता है खून-खराबा; अब तेज होगी जंग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इस देश में बढ़ते आतंकी खतरों और हालिया नरसंहार के बाद अमेरिका ने 100 सैन्य कर्मियों को उत्तरी क्षेत्र में तैनात किया है। जानें कैसे बोको हरम और ISIL जैसे समूहों के खिलाफ यह ‘टेक्निकल सपोर्ट’ और ‘इंटेलिजेंस शेयरिंग’ गेम चेंजर साबित होगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने नाइजीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत किया है। हाल ही में लगभग 100 अमेरिकी सैनिक और संबंधित उपकरण नाइजीरिया पहुंचे हैं। यह पहली खेप है, जिसमें कुल 200 सैनिकों की तैनाती का प्लान है। नाइजीरियाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल समाइला उबा ने पुष्टि करते हुए कहा है कि ये सैनिक ट्रेनिंग, तकनीकी सहायता और खुफिया जानकारी शेयर करने के लिए आए हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लेंगे और पूरी कमान नाइजीरियाई सेना के पास ही रहेगी।

बताया जा रहा है कि यह तैनाती नाइजीरिया सरकार की औपचारिक मांग पर हुई है, जो देश में बढ़ते आतंकवादी हमलों से जूझ रही है। नाइजीरिया में बोको हराम, इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रॉविंस (ISWAP), लकुरावा जैसे इस्लामिक आतंकी समूह और अन्य सशस्त्र गिरोहों (बैंडिट्स) का आतंक लगातार बढ़ रहा है। उत्तर-पूर्वी इलाकों जैसे बोर्नो, योबे और अडामा में रोजाना हमले, अपहरण और हत्याएं हो रही हैं। हाल के महीनों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं, हजारों विस्थापित हुए हैं।

अमेरिकी सैनिकों की यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब देश में हिंसक हमले चरम पर हैं। पिछले सप्ताह के अंत में मोटरसाइकिलों पर आए बंदूकधारियों ने तीन गांवों में तांडव मचाया, जिसमें कम से कम 46 लोग मारे गए।

  • सबसे भीषण हमला नाइजर राज्य के कोंकोसो गांव में हुआ, जहां 38 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
  • नाइजीरिया वर्तमान में बोको हरम, ISWAP, और ‘लाकुरावा’ जैसे कई आतंकी गुटों से जूझ रहा है।
  • इसके अलावा, ‘डाकू’ समूह भी सक्रिय हैं जो फिरौती के लिए अपहरण और अवैध खनन में शामिल हैं।

ट्रंप का नाइजरिया पर दबाव

ट्रंप ने 2025 के अंत में नाइजीरिया पर खासा दबाव बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नाइजीरिया में ईसाइयों का नरसंहार हो रहा है और सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे रही। दिसंबर 2025 में क्रिसमस के दिन अमेरिकी सेना ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे। ट्रंप ने इसे ISIS के आतंकवादियों पर सीधा प्रहार बताया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा, लेकिन बातचीत से स्थिति सुधरी। नाइजीरिया ने अमेरिका से ट्रेनिंग और इंटेलिजेंस सपोर्ट मांगा, जिसके जवाब में यह तैनाती हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीति में धार्मिक उत्पीड़न (खासकर ईसाइयों की सुरक्षा) को प्राथमिकता मिल रही है, जो उनकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।

नाइजीरिया की 24 करोड़ की आबादी ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच लगभग समान रूप से बंटी हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि हिंसा का शिकार केवल ईसाई नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोग हो रहे हैं। वास्तव में, अधिकांश हमले मुस्लिम बहुल उत्तरी क्षेत्र में होते हैं, जिससे हताहत होने वालों में मुस्लिम नागरिकों की संख्या अधिक है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

हाल के महीनों में यह संकट और गहरा गया है क्योंकि पड़ोसी साहेल क्षेत्र के आतंकी समूह भी नाइजीरिया में घुसपैठ कर रहे हैं। ‘जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन’ जैसे समूहों ने पिछले साल पहली बार नाइजीरियाई धरती पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। दिसंबर में अमेरिकी सेना ने उत्तर-पश्चिम में ISIL से जुड़े लड़ाकों पर हवाई हमले किए थे। अब 100 सैन्य कर्मियों की यह नई तैनाती दर्शाती है कि वाशिंगटन और अबुजा के बीच सैन्य सहयोग फिर से मजबूत हो रहा है।

यह तैनाती जंग को तेज करने का संकेत दे सकती है, लेकिन सीमित रूप से। अमेरिकी सैनिक सीधे फायरिंग में नहीं उतरेंगे, बल्कि नाइजीरियाई सेना को बेहतर ट्रेनिंग, ड्रोन इंटेलिजेंस, टारगेट पहचान और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देंगे। इससे नाइजीरियाई फोर्सेस की क्षमता बढ़ेगी और आतंकवादियों पर दबाव बढ़ सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN