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- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों को झटका, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने उनके ग्लोबल टैरिफ़ रद्द किए
- सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के बहुमत से टैरिफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 10 से 50% तक के टैरिफ़ लागू किए थे.
- ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकॉनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल करते हुए टैरिफ़ लगाए थे.
- ट्रंप ने दावा किया था कि उनके लागू किए गए टैरिफ़ से अमेरिकी फ़ैक्ट्रियों को फ़ायदा होगा और कामकाज को बढ़ावा मिलेगा
- अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने ट्रंप के ज़्यादातर टैरिफ़ ग़ैरक़ानूनी बताए, लेकिन इन्हें हटाया नहीं.
- टैरिफ़ को ग़ैरक़ानूनी बताने पर अपील कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ व्हाइट हाउस सुप्रीम कोर्ट गया था
अपडेटेड एक घंटा पहले
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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन ग्लोबल टैरिफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है, जो पिछले साल लागू किए गए थे.
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल ही दूसरे देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर टैक्स लगाने का एलान किया था. उनका कहना था कि इससे अमेरिकी फ़ैक्ट्रियों को फ़ायदा होगा.
इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से मंज़ूरी नहीं ली थी, बल्कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया था.
इस क़ानून के तहत इमरजेंसी घोषित करने से ट्रंप तुरंत आदेश जारी कर सकते थे और कांग्रेस को दरकिनार कर सकते थे. लिहाज़ा, ट्रंप ने इसका फ़ायदा उठाया.
अगस्त 2025 में एक अमेरिकी अपील कोर्ट ने कहा कि ट्रंप के ज़्यादातर टैक्स ग़ैरक़ानूनी हैं, लेकिन उन्हें लागू रहने दिया गया.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री तब हुई, जब व्हाइट हाउस ने अपील कोर्ट के फ़ैसले को पलटने की मांग की.
अपने फ़ैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अपनी सीमा से बाहर जाकर अधिकारों का इस्तेमाल किया और नेशनल इमरजेंसी के लिए बने क़ानून का सहारा लिया.
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़, इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को टैरिफ़ लगाने की इजाज़त नहीं देता. सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया.
ट्रंप की पहली प्रतिक्रिया
बीबीसी संवाददाता अर्न्ड डिबशमैन जूनियर के मुताबिक़ डोनाल्ड ट्रंप ने इस फ़ैसले को ‘शर्मनाक’ बताया.
अमेरिकी राज्यों के गवर्नर की एक मीटिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही.
कुछ टैरिफ़ रहेंगे बरक़रार
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट राष्ट्रपति को किसी आपात स्थिति में व्यापार को “नियंत्रित” करने का अधिकार देता है.
ट्रंप ने पहली बार फ़रवरी 2025 में इसका इस्तेमाल किया.
उन्होंने चीन, मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर टैक्स लगाया.
ट्रंप ने इस क़ानून का इस्तेमाल करते हुए फिर अप्रैल में लगभग हर देश से आने वाले सामान पर 10% से 50% तक टैक्स लगाने का आदेश दिया.
हालांकि, ट्रंप के लागू किए गए सारे टैरिफ़ नहीं हटे हैं.
स्टील, एल्युमीनियम, लकड़ी और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े टैरिफ़ प्रभावित नहीं हुए.
ये टैरिफ़ 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत लगाए गए थे, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता जताई गई थी.
कोर्ट का फ़ैसला- ‘ट्रंप की ताक़त पर रोक’
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एंथनी जर्चर, बीबीसी संवाददाता
डोनाल्ड ट्रंप महीनों से इस बात की चेतावनी दे रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का एक संभावित फैसला अमेरिका के लिए भयंकर परिणाम लेकर आएगा और उनके टैरिफ लगाने की क्षमता को सीमित करेगा.
लेकिन ऐसा लगा जैसे सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चिंताओं की ‘परवाह’ नहीं की और छह न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ फैसला सुनाया.
न्यायाधीशों ने कहा कि टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का काम नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की शक्ति है और जिस कानून का ट्रंप ने अपनी कानूनी रक्षा में हवाला दिया, यानी 1977 का इमरजेंसी इकॉनॉमिक पावर्स एक्ट, उसने ट्रंप को इतनी व्यापक शक्तियां नहीं दी थीं.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकार के व्यापक इस्तेमाल पर रोक का प्रतीक है.
पिछले साल अधिकांश न्यायाधीश ट्रंप के एजेंडे के पक्ष में दिखाई दे रहे थे खासकर आप्रवासन और संघीय सरकार को पुनर्गठित करने के मामलों में, जबकि इससे संबंधित कई अपीलों पर कोर्ट में सुनवाई जारी थी.
इसके अलावा जन्म अधिकार नागरिकता को समाप्त करने की ट्रंप की कोशिश और कथित अनियमितताओं के आधार पर फेडरल रिजर्व गवर्नर को हटाने की कोशिश पर भी विवाद जारी था.
हो सकता है इन मोर्चों पर भी आने वाले महीनों में ट्रंप को कोर्ट से झटका लगे.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या होगा असर
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ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटव के अजय श्रीवास्तव के मुताबिक़ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी असर होगा.
रेसीप्रोकल टैरिफ़ हट जाने से अब भारत को अमेरिका के कुल निर्यात के 55 फ़ीसदी हिस्से पर अब 18 प्रतिशत टैक्स नहीं देना होगा.
यानी अब उन पर स्टैंडर्ड एमएफ़एन टैरिफ़ ही लगेंगे.
भारत के बाक़ी निर्यात पर सेक्शन 232 के तहत टैरिफ़ जारी रहेंगे.
यानी स्टील और एल्युमीनियम पर 50 फ़ीसदी और कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% टैक्स लगेंगे.
वहीं स्मार्टफ़ोन, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और दवाइयों के कुल 40 प्रतिशत निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ़ नहीं लगेगा.
इस बदलाव की वजह से भारत को अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर पुनर्विचार करना चाहिए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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