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एक घंटा पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जंग को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के ज़रिये उन्होंने कहा कि वह ईरान के ख़िलाफ़ जंग को जल्द ख़त्म करने पर विचार कर रहे हैं.
लेकिन दूसरी तरफ़ ऐसी भी रिपोर्ट है कि ज़मीनी सेना उतारने की संभावनाओं पर अमेरिका विचार कर रहा है.
जंग ख़त्म करने को लेकर ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, “हम ईरान के आतंकी शासन के संदर्भ में मध्य पूर्व में अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बहुत करीब हैं.”
हालाँकि ईरान युद्ध को खत्म करने के संदर्भ में उन्होंने एक बात और कही, और वो थी जंग के दिन से चर्चा में रहे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर. ट्रंप ने कहा, “इसे (होर्मुज़ स्ट्रेट) की निगरानी करने और सुरक्षा का जिम्मा उन देशों को उठाना चाहिए, जो इसका इस्तेमाल करते हैं.”
एक अनुमान के मुताबिक़, दुनिया का लगभग 20 फ़ीसदी तेल आमतौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुज़रता है.
ट्रंप ने कहा, “अगर हमसे कहा गया, तो हम इन देशों को होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा से जुड़ी उनकी कोशिशों में मदद करेंगे, लेकिन ईरान के ख़तरे के ख़त्म हो जाने के बाद इसकी ज़रूरत नहीं होनी चाहिए. अहम बात यह है कि इन देशों के लिए यह एक आसान सैन्य अभियान होगा.”
ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ जंग में अब तक हासिल की गई उपलब्धियों का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और ईरान के मिलिट्री इंडस्ट्रियल बेस को तबाह कर दिया गया है. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ईरान कभी परमाणु हथियार बनाने के क़रीब न पहुंच पाए.
इसके अलावा ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपने सहयोगियों- इसराइल, सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और अन्य को देशों को उच्चतम स्तर पर सुरक्षा प्रदान की है.
‘ट्रंप का बयान सहयोगियों को शायद पसंद न आए’
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बीबीसी संवाददाता एंथनी ज़र्चर के मुताबिक़, वॉशिंगटन से वेस्ट पाम बीच के लिए एयर फ़ोर्स वन की उड़ान के लगभग बीच में, प्रेस पूल को ट्रंप की ट्रुथ सोशल पर की गई ताज़ा पोस्ट के प्रिंटआउट दिए गए, जिसमें उन्होंने ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियानों को “धीरे-धीरे समाप्त करने” की बात कही थी.
यह वही तरीका है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति उन सोशल मीडिया संदेशों के लिए करते हैं, जिन्हें वे ख़ास तौर पर ज़्यादा प्रचारित करना चाहते हैं.
उन्होंने पिछले साल अक्तूबर में भी ऐसा ही किया था, जब हम दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक के बाद अमेरिका लौट रहे थे.
आज का ईरान से जुड़ा संदेश काफी सोच-समझकर तैयार किया गया लगता है, जिसमें ईरान युद्ध में अमेरिका के सैन्य उद्देश्यों की क्रमबद्ध सूची दी गई है.
विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ फ़्लोरिडा जा रहे ट्रंप ने ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने शब्दों का चुनाव कूटनीतिक सावधानी के साथ किया है.
हालांकि, यह संदेश कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा की अगुवाई नहीं करेगा, अमेरिका के सहयोगियों को शायद ज़्यादा पसंद न आए.
होर्मुज़ पर ट्रंप ने कब क्या बोला

होर्मुज़ स्ट्रेट इस पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए लगातार ध्यान का केंद्र बना रहा है. उन्होंने इसे फिर से जहाज़ों के लिए खोलने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया है और साथ ही नेटो सहयोगियों के कथित समर्थन की कमी की आलोचना भी की है.
3 मार्च को, जब ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज़ को “आग लगा देने” की धमकी दी, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि “ज़रूरत पड़ी तो अमेरिकी नौसेना टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू करेगी.”
10 मार्च को उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल की आवाजाही को रोकने के लिए “कुछ भी करता है”, तो अमेरिका उस पर पहले से बीस गुना ज़्यादा कड़ा प्रहार करेगा.”
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस संकरे समुद्री रास्ते को खोलने में सहयोगी देशों की भागीदारी ज़रूरी है.
14 मार्च को उन्होंने कहा कि “कई देश, ख़ासकर वे जो इससे प्रभावित हैं, उन्हें अपने युद्धपोत भेजने चाहिए.”
18 मार्च को ट्रंप ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका ईरानी शासन को “ख़त्म” कर दे, तो होर्मुज़ स्ट्रेट का क्या होगा और सुझाव दिया कि “जो देश इसका इस्तेमाल करते हैं, वे ही इसकी ज़िम्मेदारी उठाएं.”
आज इससे पहले, उन्होंने नेटो देशों की आलोचना करते हुए कहा कि वे “तेल की ऊंची क़ीमतों की शिकायत तो करते हैं, लेकिन होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने जैसे आसान सैन्य कदम उठाने में मदद नहीं करना चाहते.”
ज़मीनी सेना उतारने की तैयारी- रिपोर्ट
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एकतरफ़ जहां ट्रंप ईरान में सैन्य अभियान जल्द ख़त्म करने का दावा कर रहे हैं, वहीं बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारी ईरान में ज़मीनी सैनिकों की तैनाती की संभावना को लेकर विस्तृत तैयारियां कर रहे हैं.
यह जानकारी कई ऐसे अधिकारियों के हवाले से दी गई है, जिन्हें इन चर्चाओं की जानकारी है.
रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के क़दम की योजना बनाने के लिए विशेष अनुरोध कर रहे हैं.
सीबीएस के अनुसार, योजना में इस बात पर भी चर्चा शामिल है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान में तैनात होते हैं, तो ईरानी सैनिकों को हिरासत में लेने की स्थिति को कैसे संभाला जाएगा.
शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने जब कहा था कि अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ अपने अभियानों को “धीरे-धीरे समाप्त करने” पर विचार कर रहा है. इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि वह युद्धविराम (सीज़फायर) नहीं चाहते.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले पत्रकारों से कहा था कि वह “कहीं भी” ज़मीनी सैनिक भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं, और साथ ही जोड़ा, “अगर मैं ऐसा करता, तो मैं आपको निश्चित रूप से नहीं बताता.”
शुक्रवार को कथित सैनिक तैनाती की ख़बरों पर अमेरिकी रक्षा विभाग ने बीबीसी के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया.
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों की ज़िम्मेदारी संभालने वाला यूएस सेंट्रल कमांड भी संभावित सैनिक तैनाती पर किसी तरह की अटकल लगाने से इनकार कर चुका है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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