Source :- LIVE HINDUSTAN
DA hike in july 2026: देश में दूध, पेट्रोल, डीजल, CNG और सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने महंगाई का दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई 2026 में होने वाले DA हाइक से बड़ी राहत की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई सरकार पर DA बढ़ाने का दबाव बना सकती है।
DA hike in july 2026: देशभर में बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। दूध, सब्जियां, पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर जुलाई 2026 में होने वाले महंगाई भत्ते (DA) बढ़ोतरी पर टिक गई है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार इस बार महंगाई के असर को देखते हुए एक अच्छा DA हाइक दे सकती है, ताकि बढ़ते खर्चों से कुछ राहत मिल सके। आइए जरा विस्तार से इसको समझते हैं।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च तेजी से बढ़ा है। कई शहरों में दूध की कीमतों में इजाफा हुआ है, जबकि सब्जियों के दाम भी ऊपर बने हुए हैं। इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों ने ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले सामानों की कीमतों पर पड़ रहा है, यानी आम आदमी को हर तरफ से महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन और पेंशनर्स भी सरकार से DA में अच्छी बढ़ोतरी की डिमांड कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा DA महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। इसी साल जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने DA और DR में 2% की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद कुल DA 58% से बढ़कर 60% हो गया था। इसका फायदा करीब 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को मिला था। लेकिन उसके बाद से महंगाई और ज्यादा बढ़ गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में रिटेल महंगाई दर 3.48% तक पहुंच गई, जबकि फूड इन्फ्लेशन 4.20% रही। वहीं, थोक महंगाई भी फ्यूल और बिजली की कीमतों के कारण बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो भारत में महंगाई और बढ़ सकती है।
जुलाई 2026 में DA बढ़ने की संभावना
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक बाजार (BankBazaar) के CEO आदिल शेट्टी के मुताबिक DA पूरी तरह CPI-IW यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित होता है। इसमें दूध, सब्जियां, ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतों को ध्यान में रखा जाता है। ऐसे में अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो जुलाई 2026 में DA बढ़ने की संभावना मजबूत हो सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार फैसला लेने से पहले यह भी देखेगी कि महंगाई अस्थायी या लंबे समय तक रहने वाली है। बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी की वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह का कहना है कि सिर्फ कुछ वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से बड़ा DA हाइक तय नहीं किया जा सकता है। सरकार को पूरे आर्थिक माहौल और महंगाई के ट्रेंड को ध्यान में रखना होगा।
इस बीच अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता ने भी तेल बाजार को प्रभावित किया है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है। इसका असर फिर से खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा।
ऐसे माहौल में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि सरकार जुलाई 2026 के DA रिवीजन में राहत देने वाला फैसला ले सकती है, क्योंकि बढ़ती महंगाई के बीच DA ही वह सहारा है, जो कर्मचारियों की वास्तविक आय को कुछ हद तक सुरक्षित रखने का काम करता है।
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