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जब पार्टनर ना करे सच्चे प्यार की कद्र, तो प्रेमानंद जी महाराज के ये शब्द दिल पर लगाएंगे मरहम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संक्षेप:

हम अक्सर इस कशमकश में अपनी मानसिक शांति खो देते हैं कि आखिर कमी कहां रह गई। ऐसे भावुक भंवर में फंसे मन को सही दिशा दिखाने का सामर्थ्य केवल उन महापुरुषों के पास होता है, जिन्होंने प्रेम को उसकी पराकाष्ठा पर जिया है’।

प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन अकसर जीवन से जुड़ी उन मुश्किलों का हल बन जाते हैं, जहां व्यक्ति खुद को या तो अकेला या फिर बेहद कमजोर महसूस करने लगता है। फरवरी का महीना वैलेंटाइन वीक के लिए फेमस होता है। ऐसे में प्रेमी जोड़े हों या शादीशुदा कपल्स ज्यादातर लोगों की एक कॉमन शिकायत अपने पार्टनर से बनी रहती है कि उनका पार्टनर या तो उनकी कद्र नहीं करता या फिर उनके सच्चे प्यार को समझ नहीं पाता है। इस तरह की समस्या से परेशान लोगों के लिए प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ‘रिश्तों के उस मोड़ पर खड़े होना सबसे ज्यादा दर्दनाक होता है, जहां आप अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, फिर भी सामने वाले की नजरों में वो प्यार ‘नाकाफी’ या ‘अनदेखा’ रह जाता है। हम अक्सर इस कशमकश में अपनी मानसिक शांति खो देते हैं कि आखिर कमी कहां रह गई। ऐसे भावुक भंवर में फंसे मन को सही दिशा दिखाने का सामर्थ्य केवल उन महापुरुषों के पास होता है, जिन्होंने प्रेम को उसकी पराकाष्ठा पर जिया है’। अगर आपकी भी अपने पार्टनर से यह शिकायत है कि साथी को आपके सच्चे प्यार की कद्र क्यों नहीं है तो प्रेमानंद जी महाराज के ये संदेश आपको इस कठिन प्रश्न का उत्तर देने वाले हैं।

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1. अपनी ‘अपेक्षा’ को त्यागें

महाराज जी अक्सर कहते हैं कि संसार में हम जिसे प्रेम कहते हैं, वह अक्सर ‘व्यापार’ होता है-‘मैं तुम्हें प्यार करूं और तुम भी मुझे प्यार करो।’ यदि सामने वाला आपके प्रेम को नहीं समझ रहा, तो समझ लें कि आपका प्रेम अभी सांसारिक स्तर पर है। निस्वार्थ प्रेम वह है जिसमें सामने वाले के व्यवहार से आपके प्रेम की तीव्रता कम न हो।

2. प्रेम का रुख ‘परमात्मा’ की ओर मोड़ें

महाराज जी कहते हैं कि ‘संसार से प्यार करोगे तो रोना पड़ेगा, भगवान से करोगे तो तर जाओगे।’ जिसका मतलब है कि मनुष्य की बुद्धि और हृदय सीमित हैं, वे आपके निस्वार्थ भाव को कभी पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए, अपनी प्रेम की ऊर्जा को ठाकुर जी (कृष्ण) की सेवा और सुमिरन में लगाएं, वह आपकी हर भावना को समझते हैं।

3. ‘जबरदस्ती’ प्रेम नहीं मांगा जाता

महाराज जी कहते हैं कि यदि सामने वाला आपके प्रेम की कद्र नहीं कर रहा, तो उसके पीछे पड़कर अपनी गरिमा न खोएं। प्रेम कोई भीख नहीं है। आप अपना कर्तव्य निभाते रहें, लेकिन मानसिक रूप से उनसे जुड़ने की जगह अपने आराध्य से जुड़ें।

4. मौन और धैर्य का सहारा लें

विवाद करने या बार-बार स्पष्टीकरण देने से प्रेम नहीं बढ़ता। महाराज जी कहते हैं कि शांति से अपने स्वभाव को शुद्ध रखें। यदि आपका प्रेम सात्विक है, तो समय आने पर सामने वाले को उसकी अनुभूति खुद हो जाएगी, और यदि नहीं भी होती, तो आपकी आंतरिक शांति भंग नहीं होनी चाहिए।

5. उसे स्वतंत्र छोड़ दें

सच्चा प्रेमी वह है जो अपने प्रिय की खुशी चाहे। अगर सामने वाला आपके साथ खुश नहीं है या आपके प्रेम को नहीं समझ पा रहा, तो उसे उसकी मानसिक स्थिति पर छोड़ देना ही श्रेष्ठ है। खुद को भगवान के चरणों में समर्पित कर दें, क्योंकि अंततः वही एकमात्र सच्चे प्रेमी हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN