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खामेनेई की मौत के बाद नई लीडरशिप ने काम करना शुरू कर दिया, तगड़े पलटवार की चेतावनी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अंतरिम नेतृत्व परिषद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत गठित की गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका के प्रमुख ग़ोलाम हुसैन मोहसिनी एजेई और गार्जियन काउंसिल के सदस्य अयतुल्लाह अलीरेज़ा आरफ़ी शामिल हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में अंतरिम नेतृत्व परिषद ने काम शुरू कर दिया है। खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के हमले में हुई, जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने कर दी है। यह घटना लगभग 37 वर्षों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई के शासन के अंत का प्रतीक है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने राज्य टीवी पर रिकॉर्डेड वीडियो बयान में घोषणा की कि अंतरिम नेतृत्व परिषद ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने कहा कि परिषद अब काम कर रही है। देश इमाम खुमैनी की ओर से निर्धारित मार्ग पर पूरी शक्ति से आगे बढ़ेगा, जो इस्लामी गणराज्य के संस्थापक थे।

अंतरिम नेतृत्व परिषद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत गठित की गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका के प्रमुख ग़ोलाम हुसैन मोहसिनी एजेई और गार्जियन काउंसिल के सदस्य अयतुल्लाह अलीरेज़ा आरफ़ी शामिल हैं। इस परिषद का मुख्य उद्देश्य नया सर्वोच्च नेता चुने जाने तक देश की नेतृत्व जिम्मेदारियां संभालना है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स जल्द से जल्द नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस परिषद ने तुरंत काम शुरू कर दिया है ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। ईरान ने खामेनेई की मौत पर 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

पलटवार की धमकी दे रहा ईरान

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपने बयान में खामेनेई की मौत को एक बड़ी त्रासदी बताते हुए कहा कि ईरान इमाम खुमैनी के रास्ते पर अडिग रहेगा। उन्होंने सैन्य बलों को निर्देश दिया कि वे दुश्मन के ठिकानों को कुचलने का काम जारी रखें और मजबूती से जवाब दें। यह बयान ईरान की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि देश कमजोर नहीं हुआ है और क्षेत्रीय संघर्ष में अपनी स्थिति मजबूत रखेगा। ईरान ने पहले ही दुश्मन देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है और आगे भी ऐसा करने की बात कही है।

अंतरिम परिषद के सामने कई चुनौतियां

अंतरिम परिषद की सक्रियता से यह साफ है कि तेहरान सत्ता हस्तांतरण को पूरा करने पर जोर दे रहा है। यह घटना मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। खामेनेई के लंबे शासन में ईरान ने क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाया था, लेकिन अब नई नेतृत्व चुनौतियों का सामना करेगा। अंतरिम परिषद का गठन और उसका तत्काल काम शुरू करना ईरान की संस्थागत स्थिरता को दर्शाता है। हालांकि, आंतरिक और बाहरी दबावों के बीच नया सर्वोच्च नेता चुनना आसान नहीं होगा। फिलहाल ईरान के सामने कई चुनौतियां नजर आ रही हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN