Source :- LIVE HINDUSTAN
लंदन की सड़कों पर इन दिनों रोबो टैक्सीज खूब नजर आ रही हैं। यह टैक्सियां एआई सिस्टम से लैस हैं। यह सड़क पर टहलने वालों और साइकिल चलाने वालों को बचाते हुए चल रही हैं। यह लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं।
लंदन की सड़कों पर इन दिनों रोबो टैक्सीज खूब नजर आ रही हैं। यह टैक्सियां एआई सिस्टम से लैस हैं। यह सड़क पर टहलने वालों और साइकिल चलाने वालों को बचाते हुए चल रही हैं। यह लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही हैं। असल में यह ब्रिटिश स्टार्टअप वेव टेक्नोलॉजीज की टैक्सियां हैं जो टेस्ट रन के तहत चल रही हैं। रोबो टैक्सियों का यह टेस्ट रन, ब्रिटिश सरकार द्वारा किए जाने वाले ट्रायल से पहले हो रहा है। इस ट्रायल में अमेरिकी कंपनी वेमो और चीन की बैदू भी इस पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने वाली हैं। इस तरह लंदन ग्लोबल रोबोटैक्सी कॉम्पटीशन का मैदान बन जाएगा।
कैसा रहा है पुराना अनुभव
लंदन में चलने के लिए तैयार रोबो टैक्सीज में वैमो भी शामिल है। इसकी मालिक गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट है। यह कंपनी 2026 के तीसरे क्वॉर्टर में लंदन के पैसेंजर्स के लिए अपनी सेवाएं शुरू करने वाली है। वैमो के अधिकारी उन चिंताओं को दूर करते हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि कंपनी अचानक से लंदन की गलियों में रोबो टैक्सीज की बाढ़ ला देगी। कंपनी का कहना है कि 2024 में शुरू होने के बाद से वह सैन फ्रांसिस्को में कुल 1000 वाहन चला रही है। वैमो के प्रवक्ता ईथन टेचर ने कहाकि हम यहां किसी को रिप्लेस करने नहीं, बल्कि लोगों के लिए विकल्प उपलब्ध कराने आए हैं। वैमो की अपनी ऐप है जिसके जरिए सवारी मंगाई जा सकती है। इसकी कीमतें काफी कॉम्पटीटिव होंगी और किराया बाजार के अनुसार होगा।
कैसे किया गया है इन कारों को तैयार
इसी तरह से वैवे की फोर्ड कार भी रोबो टैक्सीज लाने की तैयारी में है। वैवे ने अपनी कारों के ड्राइविंग डेटा को इकट्ठा करके एआई की ट्रेनिंग दी है। इसके जरिए कार में यह डेटा फीड किया गया है कि आखिर दुनिया में कारें कैसे चलती हैं। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक सेल्फ-ड्राइविंग के लिए यह बेहद अहम है, क्योंकि हर बार जब आप सड़क पर जाते हैं, एक नया अनुभव होता है।
कैसा रहा हालिया अनुभव
वैवे की फोर्ड कंपनी ने हाल ही में अपनी कार का डेमो किया था। इस दौरान कार ने करीब पांच किलोमीटर का सफर तय किया। यह सफर उत्तरी लंदन में तय किया गया। इस दौरान कार की रफ्तार करीब 30 किमी प्रतिघंटा रही। यह रफ्तार स्पीड लिमिट के दायरे में रही। वैसे तो पूरा सफर बेहद आसान रहा, लेकिन एक ट्रैफिक लाइट पर कार ने अचानक ब्रेक लगाया। इस दौरान यात्रियों को झटका लगा।
लंदन के लिए क्यों चैलेंजिंग
लंदन की व्यस्त गलियां और पुरानी सड़कें काफी चैलेंजिंग हैं। ऐसे में रोबो टैक्सियों को एक समाधान माना जा रहा है। हालांकि रोबो टैक्सीज को लंदन के ब्लैक कैब ड्राइवर्स के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। लाइसेंसधारी टैक्सी ड्राइवर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री स्टीवन मैक्नामारा, कहते हैं कि लंदन की सड़कें रोमन कालीन हैं। यह अलग तरह की हैं। यह अमेरिकी शहरों की तरह ग्रिड लेआउट में नहीं हैं। ऐसे में रोबो टैक्सीज के लिए यहां पर बहुत आसानी नहीं होने वाली है।
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