Home  लाइफस्टाइल समाचार क्या एयर फ्रायर के इस्तेमाल से बढ़ रहा है कैंसर का रिस्क?...

क्या एयर फ्रायर के इस्तेमाल से बढ़ रहा है कैंसर का रिस्क? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया पूरा सच!

6
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

Cancer Risk: एयर फ्रायर को ले कर सोशल मीडिया पर एक दावा किया जा रहा है, जिसके मुताबिक एयर फ्रायर में बना खाना कैंसर का कारण बन सकता है। क्या वाकई इस दावे में कुछ सच्चाई है या नहीं? कैंसर विशेषज्ञ डॉ वर्तिका ने इसी बारे में बताया है।

आजकल हेल्दी कुकिंग के नाम पर एयर फ्रायर लगभग हर रसोई का हिस्सा बन चुका है। एयर फ्रायर का सबसे बड़ा फायदा है कि इसमें कम तेल में ही वो सारे फूड्स बन जाते हैं, जिन्हें तेल में डीप फ्राई करने की जरूरत पड़ती है। हालांकि एयर फ्रायर को ले कर सोशल मीडिया पर एक दावा किया जा रहा है, जिसने लोगों के बीच डर बैठा दिया है। दावे के मुताबिक एयर फ्रायर में बना खाना कैंसर का कारण बन सकता है। इसके पीछे की वजह बताई जाती है कि एयर फ्रायर में बने फूड में एक्रिलामाइड नाम का कंपाउंड बनता है, जो कैंसर को जन्म दे सकता है। अब सवाल है कि क्या वाकई इस दावे में कुछ सच्चाई है या नहीं? कैंसर विशेषज्ञ डॉ वर्तिका विश्वनी ने इसी बारे में बताया है। आइए जानते हैं-

सबसे पहले समझें एयर फ्रायर का साइंस

एयर फ्रायर में बना फूड सेहत के लिए नुकसानदायक है या नहीं, ये जानने से पहले समझना जरूरी है कि एयर फ्रायर काम कैसे करता है। दरअसल एयर फ्रायर ओवन का मिनी वर्जन है, जिसमें एक फैन लगा हुआ होता है। ये फैन गर्म हवा को 160-200° C टेंपरेचर पर सर्कुलेट करता है, जिससे फूड फ्राई होता है। जब ये हॉट एयर फूड के संपर्क में आती है, खासतौर से स्टार्ची फूड के, तो मैइलार्ड रिएक्शन से ब्राउनिंग होती है और एक्रिलामाइड बनता है। इसी एक्रिलामाइड से कैंसर का खतरा बताया जाता है।

सिर्फ एयर फ्रायर में ही नहीं बनता एक्रिलामाइड

डॉ वर्तिका कहती हैं कि एक्रिलामाइड सिर्फ एयर फ्रायर में ही नहीं बनता है, बल्कि आप जो भी फूड तेल में तलते हैं, जैसे पकोड़ा, समोसा, ब्रेड पकोड़ा, सभी में बनता है। इसके अलावा बेकिंग और रोस्टिंग के दौरान भी एक्रिलामाइड बनता है।

क्या एयर फ्रायर में बने एक्रिलामाइड से कैंसर होता है?

ऑन्कोलॉजिस्ट बताती हैं कि एक्रिलामाइड को ग्रुप 2A कार्सिनोजेनिक कैटिगरी में रखा गया है। जिसका मतलब है कि इंसानों में ये कैंसर का कारण बन सकता है, हालांकि ये अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हो पाया है। जो भी रिसर्च अभी तक हुई हैं वो चूहों पर हुई हैं, जिन्हें हाई डोज में एक्रिलामाइड दिया गया था। यहां ध्यान देने वाली बात है कि एयर फ्रायर वाले फूड में काफी कम मात्रा में एक्रिलामाइड बनता है, जो तेल में तले हुए फूड से भी कम होता है।

एयर फ्रायर में फूड बनाते हुए ध्यान रखें ये बातें

डॉ वर्तिका कहती हैं कि एयर फ्रायर में फूड बनाना डीप फ्राई करने से कहीं बेहतर है। इसमें तेल भी कम लगता है, टाइम भी कम लगता है और सिर्फ सर्फेस हीटिंग होती है, ना कि अंदर का स्टार्च कुक होता है। इसलिए डीप फ्राई की जगह आप बेझिझक एयर फ्रायर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि फूड को बहुत ज्यादा ब्राउन ना करें, सिर्फ गोल्डन होने तक पकाएं। ज्यादा जले हुए फूड में एक्रिलामाइड की मात्रा भी ज्यादा बनती है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN