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कौन थे ईरानी जनरल अली लारीजानी? हत्या कर इजरायल ने ईरान को दे दिया बहुत गहरा जख्म

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान ने बुधवार तड़के आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसके शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई है। बासिज प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी की भी मौत हो गई है।

पश्चिम एशिया में बीते तीन सप्ताह से जारी युद्ध के बीच इजरायल ने ईरान को बहुत गहरा ज़ख्म दे दिया है। इस बार टॉप कमांडरों को निशाना बनाते हुए इजरायल ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी और बासिज प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी की हत्या कर दी है। इजरायली सेना द्वारा मंगलवार को यह दावा किए जाने के बाद ईरान ने बुधवार को इस खबर की पुष्टि कर दी है। जाहिर है यह खबर सामने आते ही ईरान आग बबूला हो गया है। इसकी वजह यह है कि ईरान के लिए अली लारिजानी महज एक सैन्य कमांडर नहीं थे।

लारिजानी को ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जा रहा था। ईरान परिषद के अनुसार इस हमले में लारीजानी के साथ उनके बेटे और सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य लोग भी मारे गए हैं। एक बयान जारी कर ईरान ने लारीजानी के लंबे राजनीतिक करियर की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसी शख्सियत बताया जिसने जिंदगी के आखिरी क्षणों तक ईरान की प्रगति और बाहरी खतरों के खिलाफ एकजुटता के लिए काम किया। 67 साल के लारिजानी को आखिरी बार बीते शुक्रवार को तेहरान में अल-कुद्स डे परेड में सार्वजनिक रूप से देखा गया था।

कौन थे अली लारीजानी?

अली लारिजानी दशकों तक ईरान की राजनीति में एक शांत और व्यावहारिक चेहरा माने जाते थे, जो एक तरफ पश्चिम देशों के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत करते थे और दूसरी तरफ दर्शनशास्त्र पर किताबें भी लिखते थे। अली लारिजानी का जन्म 3 जून 1958 को इराक के नजफ में हुआ था, लेकिन उनका परिवार ईरान के अमोल शहर से था। उनका परिवार इतना प्रभावशाली था कि 2009 में टाइम मैगजीन ने उन्हें “ईरान का केनेडी परिवार” बताया था। उनके पिता मिर्जा हाशेम अमोली एक बड़े धार्मिक विद्वान थे। लारिजानी ने 20 साल की उम्र में फरीदेह मोताहरी से शादी की थी, जो इस्लामिक शासन के संस्थापक रुहोल्लाह खोमैनी के करीबी सहयोगी मोर्तेजा मोताहरी की बेटी हैं।

दर्शनशास्त्र की पढ़ाई

ईरान के अन्य नेताओं की तुलना में लारिजानी की पढ़ाई अलग रही। उन्होंने 1979 में शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से गणित और कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली और बाद में तेहरान यूनिवर्सिटी से पश्चिमी दर्शनशास्त्र में मास्टर्स और पीएचडी की। उन्होंने जर्मन दार्शनिक इमानुएल कांट पर शोध भी किया था।

सरकार में निभाई कई जिम्मेदारियां

1979 की क्रांति के बाद उन्होंने 1980 के दशक में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में काम किया और बाद में सरकार में शामिल हुए। 2005 में वह राष्ट्रपति चुनाव लड़े लेकिन सफल नहीं हो सके। उसी साल उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव और मुख्य परमाणु वार्ताकार बनाया गया। 2020 के बाद उन्होंने दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन 2021 और 2024 में गार्जियन काउंसिल ने उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया। हालांकि अगस्त 2025 में उन्हें फिर से सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बना दिया गया। इसके बाद उनका रुख और सख्त हो गया। अक्टूबर 2025 में उन्होंने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के साथ सहयोग समझौता खत्म कर दिया।

अमेरिका को दी थी धमकी

सख्त रुख के बावजूद लारिजानी को एक व्यावहारिक नेता माना जाता था, जो बातचीत के जरिए समाधान निकालने में भरोसा रखते थे। हाल ही में वह ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में भी शामिल थे। उन्होंने कहा था कि बातचीत ही सही रास्ता है, लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद उन्होंने साफ कर दिया था कि ईरान अब अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान में घुसे तो उन्हें मार दिया जाएगा। 13 मार्च को हमलों के बीच वह तेहरान की सड़कों पर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ प्रदर्शन में भी शामिल हुए और लोगों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने मुस्लिम देशों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।

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