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किशोर कुमार ने नहीं चुकाई थी कैंटीन की उधारी, फिर इसी पर बना दिया ये सुपरहिट गाना, आज भी गुनगुनाते हैं लोग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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 किशोर कुमार को आज भी कोई टक्कर नहीं दे सका। उनके अंदर एक खास बात ये थी कि किशोर कुमार किसी भी सिचुएशन पर गाना बना देते थे। एक ऐसा ही सुपरहिट गाना उनकी रियल लाइफ से इंस्पायर है।

बॉलीवुड के जाने माने सिंगर-एक्टर किशोर कुमार आज भी अपने फैंस के दिलों पर राज करते हैं। किशोर ने कई फिल्मों में एक्टिंग के साथ-साथ कई आइकॉनिक गाने गाए। किशोर कुमार को आज भी कोई टक्कर नहीं दे सका। उनके अंदर एक खास बात ये थी कि किशोर कुमार किसी भी सिचुएशन पर गाना बना देते थे। एक ऐसा ही सुपरहिट गाना उनकी रियल लाइफ से इंस्पायर है। इस गाने ने अपने जमाने में धूम मचा दी थी। आइए जानते हैं कौन सा है वो गाना?

ये थी वो फिल्म

हम बात रहे हैं साल 1958 में रिलीज हुई फिल्म ‘चलती का नाम गाड़ी’ फिल्म के गाने ‘पांच रुपैया बारह आना’ की। इस फिल्म में किशोर कुमार और मधुबाला लीड रोल में थे। उनके अलावा अशोक कुमार, अनूप कुमार और केएन सिंह भी अहम किरदार में थे। खास बात ये है कि इस फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ किशोर कुमार ने इसके गाने भी गाने भी गाए। ‘पांच रुपैया बारह आना’ आज भी लोगों के जुबां पर है।

‘पांच रुपैया बारह आना’ गाने के पीछे की कहानी

क्या आप जानते हैं ‘पांच रुपैया बारह आना’ गाने के पीछे भी कहानी है। दरअसल, अशोक कुमार पर इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज के कैंटीन वाले का 5 रुपये 12 आना का उधार था, जिसको लेकर वो मस्ती में गाने गाते थे। इस बारे में नेफ्यू अमित कुमार ने रिवील किया था, जब वो 2002 में कैंटीन पहुंचे थे। ये गाना काफी हिट हुआ था।

डायरेक्टर ने तीन घंटे पहले किया इनकार…

इस फिल्म से जुड़ी एक और दिलचस्प बात ये थी कि डायरेक्टर ने तीन घंटे पहले ही फिल्म को करने से मना कर दिया था। दरअसल, ‘चलती का नाम गाड़ी’ फिल्म का निर्देशन पहले बंगाली डायरेक्टर कमाल मजूमदार करने वाले थे, लेकिन मुहूर्त के तीन घंटे पहले ही उन्होंने इस फिल्म को करने से इनकार कर दिया। इसकी वजह उन्होंने ये बताई थी कि वो तीनों गांगुली ब्रदर्स को लेकर हिंदी फिल्म डायरेक्ट नहीं कर पाएंगे।

फिर इस डायरेक्टर ने संभाली कमान

जब कमाल ने फिल्म करने इनकार कर दिया तो किशोर कुमार, सत्यन बोस के पास गए और बात बन गई। इस फिल्म के लिए अशोक कुमार और अनूप कुमार को किशोर कुमार ने ही बनाया था। सिर्फ यही नहीं फिल्म के लिए पिता की कार का एक कांसेप्ट भी उन्होंने ही लिखा था। यंग किशोर कुमार, खंडवा से लेकर बंबई (मुंबई) तक गाड़ी से गए थे और उस ही दौरान उन्हें इसका आइडिया आया था। इस फिल्म को IMDb पर 8 रेटिंग मिली है।

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