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कनाडा में खालिस्तानियों के बुरे दिन! झंडे फहराने पर बैन, मंदिरों के बाहर उपद्रव पर जेल; बिल पास

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Source :- LIVE HINDUSTAN

कनाडा की संसद ने ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ पास किया है। अब वहां खालिस्तानी झंडे फहराने और मंदिरों के बाहर डराने-धमकाने पर सख्त बैन लगेगा। भारत-कनाडा रिश्तों के लिए इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जानिए पूरी खबर।

कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स ने बुधवार को एक ऐतिहासिक बिल पास किया है, जिसके तहत बब्बर खालसा जैसे खालिस्तानी समूहों के झंडे और अन्य आतंकवादी प्रतीकों का प्रदर्शन करना गैरकानूनी हो जाएगा। साथ ही, धार्मिक स्थलों के बाहर लोगों को डराना-धमकाना या उनका रास्ता रोकना भी अब अपराध की श्रेणी में आएगा।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली कनाडा की लिबरल सरकार का राजनीतिक रूप से विवादास्पद नया घृणा-विरोधी विधेयक (एंटी-हेट बिल) ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में अपनी अंतिम बाधा पार कर चुका है और अब इसे मंजूरी के लिए सीनेट में भेजा जाएगा। इस बिल C-9 को ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ नाम दिया गया है। यह क्रिमिनल कोड (आपराधिक संहिता) में नए अपराधों का प्रस्ताव करता है। इसके तहत कुछ विशेष घृणा या आतंकवाद से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल करके सार्वजनिक रूप से पहचान योग्य समूहों के खिलाफ जानबूझकर नफरत को बढ़ावा देना अपराध माना जाएगा। यह विधेयक बुधवार रात को ब्लॉक क्यूबेकोइस पार्टी के समर्थन से तीसरे चरण की वोटिंग (थर्ड रीडिंग) में पारित हो गया। मुख्य विपक्षी दल कंजर्वेटिव और एनडीपी (NDP) ने इस कानून के खिलाफ मतदान किया।

बिल से जुड़ी मुख्य बातें

कॉम्बैटिंग हेट एक्ट: इस बिल को औपचारिक रूप से यही नाम दिया गया है। हाउस ऑफ कॉमन्स से पास होने के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए कनाडाई सीनेट में भेजा जाएगा।

आतंकवाद के महिमामंडन पर रोक: यह नया कानून ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की आड़ में खालिस्तानी झंडे फहराने और खुलेआम खालिस्तानी साहित्य बांटकर आतंकवाद का महिमामंडन करने पर सख्त पाबंदी लगाता है।

आतंकी संगठनों पर नकेल: इस बिल के लागू होने से बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) जैसे संगठनों के लिए सार्वजनिक रूप से काम करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। ध्यान रहे कि इन दोनों ही संगठनों को भारत और कनाडा में आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है।

‘धार्मिक छूट’ हटाने पर हुआ समझौता

लिबरल पार्टी को ब्लॉक क्यूबेकोइस का समर्थन एक विशेष शर्त पर मिला। लिबरल्स ने बिल में एक ऐसा क्लॉज शामिल किया है जो कनाडा के हेट स्पीच (घृणा भाषण) कानून से ‘धार्मिक छूट’ को खत्म कर देगा। वर्तमान में, आपराधिक संहिता में हेट स्पीच के लिए एक छूट का प्रावधान है। इसके अनुसार, ‘यदि कोई व्यक्ति सद्भावपूर्ण तरीके से, किसी धार्मिक विषय पर अपनी राय रखता है या किसी धार्मिक ग्रंथ में अपने विश्वास के आधार पर तर्क देकर अपनी बात स्थापित करने का प्रयास करता है’ तो उसे हेट स्पीच नहीं माना जाता है। नया बिल इस छूट को खत्म कर देगा।

कंजर्वेटिव्स ने इस धार्मिक छूट को हटाने वाले प्रावधान का कड़ा विरोध करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर “हमला” करार दिया है। कई धार्मिक समूहों ने भी इसे हटाए जाने पर गहरी चिंता जताई है। कैनेडियन सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन जैसे नागरिक अधिकार समूहों का भी मानना है कि यह बिल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को आपराधिक बना सकता है और सरकार से असहमति जताने वाली आवाजों को दबा सकता है।

सरकार का पक्ष और अगला कदम

इस बिल को पेश करने वाले और ब्लॉक क्यूबेकोइस के साथ समझौता कराने वाले न्याय मंत्री सीन फ्रेजर ने विरोधियों की आलोचनाओं को खारिज किया है। उनका कहना है कि नया कानून किसी की आस्था को अपराध नहीं बनाएगा। अब यह बिल सीनेट (उच्च सदन) के पास जाएगा, जहां कानून बनने से पहले इसका गहन अध्ययन किया जाएगा। सीनेट के पास अभी भी इस कानून में बदलाव के लिए अपने सुझाव देने का अधिकार है।

भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए बड़ी राहत

इस बिल को भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह समुदाय पिछले कई दशकों से कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा उत्पीड़न का सामना कर रहा था। खालिस्तानी समर्थकों द्वारा अक्सर हिंदू मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थानों में तोड़फोड़ की जाती रही है और वहां जाने वाले श्रद्धालुओं के रास्ते बंद किए जाते रहे हैं।

खालिस्तान आंदोलन और कनाडा में उसका सुरक्षित ठिकाना

खालिस्तान आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत के पंजाब राज्य को अलग कर सिखों के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना है। इन समूहों ने दशकों तक भारत में एक हिंसक विद्रोह चलाया, जो 1990 के दशक में आकर काफी कमजोर पड़ गया। भारत में अपनी जमीन खोने के बाद, इन खालिस्तानी समूहों ने कनाडा जैसे देशों में अपने सुरक्षित ठिकाने बना लिए, जहां वे धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर फलते-फूलते रहे।

भारत-कनाडा संबंध

कनाडा में खालिस्तानियों को मिली सुरक्षित पनाह और वहां की राजनीति में उनके प्रभाव के कारण भारत और कनाडा के संबंधों में लंबे समय से तनाव रहा है। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के खालिस्तानी नेताओं के साथ करीबी रिश्ते माने जाते थे। 2023 में ट्रूडो ने भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। इसके बाद ट्रूडो द्वारा भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करने और भारत पर संगठित अपराध नेटवर्क चलाने का आरोप लगाने से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। यह खबर बताती है कि मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की शुरुआत हुई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN