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‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना लता मंगेशकर नहीं आशा भोसले गाने वाली थी, कर ली थी रिहर्सल लेकिन फिर…

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प्रदीप जी ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाने की दस या बारह पंक्तियां नहीं, बल्कि सौ से भी ज्यादा पंक्तियां लिखी थीं। हालांकि, इसमें से महज सोलह पंक्तियां ही गाने में ली गई। गाने के एक-एक बोल ने लोगों के दिलों को छुआ।

बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर आशा भोसले ने किरयर में कई आइकॉनिक गाने इस इंडस्ट्री को दिए हैं। अपने करियर में आशा ने अपनी आवाज से कई अभिनेत्रियों को हिट कर दिया। उनकी आवाज में ऐसा जादू है कि आज भी उनके चाहने वाले उनके गानों को काफी पसंद करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं आशा भोसले के हाथ एक से एक ऐसा छिन गया था, जो आज इतिहास के पन्नों में दर्ज है। आइए जानते हैं वो कौन है वो गाना और किसने गाया?

ये है वो गाना

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वो ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना है। ये गाना चीन युद्ध में देश की सीमाओं पर प्राण गंवाने वाले शहीदों की स्मृति में यह गीत लिखा गया था। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने को बेहद ही कम समय में लिखना था और इस काम को प्रदीप जी ने पूरा किया था।

गाने की सौ पंक्तियों लिखी गई थीं

प्रदीप जी ने इस गाने की दस या बारह पंक्तियां नहीं, बल्कि सौ से भी ज्यादा पंक्तियां लिखी थीं। हालांकि, इसमें से महज सोलह पंक्तियां ही गाने में ली गई। गाने के एक-एक बोल ने लोगों के दिलों को छुआ।

लता नहीं आशा गाने वाली थी ये गाना

आपको बता दें कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गानेके लिए पहली पसंद लता मंगेशकर नहीं, बल्कि आशा भोसले थीं। इस गीत की रिहर्सल आशा से करवाई गई थी। लेकिन जब लता ने इस गाने के सुना तो उन्होंने इस गाने को गाने की अपनी इच्छा जाहिर की। हालांकि, इस पर आशा ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। यह गीत इतिहास बना।

पहली बार गाना सुनकर रो पड़ीं थीं लता

ये बात शायद ही आपको पता हो कि जब इस गाने को प्रदीप जी ने गुनगुनाया तो उसे सुनकर लता मंगेशकर रो पड़ी थीं। बस फिर क्या था उन्होंने तुरंत इस गाने के लिए हां कर दी थी। लेकिन उन्होंने तब एक ही शर्त रखी कि जब इस गाने का रिहर्सल होगा तो प्रदीप को खुद मौजूद रहना होगा और वो इसके लिए मान गए। फिर जो कुछ हुआ, वो इतिहास बन गया।

आशा भोसले के बारे में

बता दें कि आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर, 1933 में हुआ है। उन्होंने 1948 में ‘चुनरिया’ से करियर की शुरुआत की थी। पिछले 7 दशकों से इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। अपने करियर में आशा ने हिंदी, मराठी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में हजारों गाने गाए हैं। उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (2000) पद्म विभूषण (2008) से भी नवाजा जा चुका है।

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