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‘उम्रक़ैद भी काफ़ी नहीं’: तमिलनाडु में 9 पुलिसकर्मियों को दोहरी फांसी की सज़ा

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Source :- BBC INDIA

सथानकुलम जयराज, बेनिक्स मामला

49 मिनट पहले

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मदुरै की एक अदालत ने सातानुकुलम पुलिस स्टेशन में बाप-बेटे की मौत के मामले में 9 लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई है. इसके अलावा सभी दोषियों पर भारी ज़ुर्माना भी लगाया गया है.

तूतीकोरिन ज़िले के सातानुकुलम के व्यापारी जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को 19 जून 2020 को कोरोना काल के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया और बुरी तरह पीटा.

इसके बाद 21 जून को दोनों को कोविलपट्टी जेल में रखा गया. 22 जून की रात क़रीब 9 बजे बेनिक्स की मौत हो गई, जबकि अगली सुबह जयराज की भी मौत हो गई.

इस मामले ने पूरे देश में बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया. इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने खुद संज्ञान लेते हुए पुलिस से रिपोर्ट मांगी. बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया.

इस मामले में मुख्य अभियुक्त सातानुकुलम थाने के इंस्पेक्टर श्रीधर थे. उनके अलावा कई अन्य पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया.

सभी 10 अभियुक्तों को सस्पेंड कर गिरफ़्तार किया गया और मदुरै सेंट्रल जेल में रखा गया. इनमें से एक अभियुक्त पालदुरई की अगस्त 2020 में कोविड से मौत हो गई.

‘मानवीय गरिमा का उल्लंघन’

इंस्पेक्टर श्रीधर, असिस्टेंट इंस्पेक्टर बालकृष्णन और रघु गणेश

सीबीआई ने इस मामले में दो भागों में 2,427 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. केस की सुनवाई मदुरै की फ़र्स्ट एडिशनल सेशंस कोर्ट में हुई और सभी अभियुक्तों की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज कर दी गईं.

23 मार्च को अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया और 6 अप्रैल को सज़ा का एलान किया.

जज मुथुकुमारन ने सज़ा सुनाने से पहले कई कड़ी टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, “उन्होंने दोनों को मारने के इरादे से ऐसा किया. जब पूछा गया कि इस मामले में किस तरह की सज़ा दी जानी चाहिए, तो केंद्र सरकार ने कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा सज़ा दी जानी चाहिए. इसी तरह तमिलनाडु सरकार ने भी कहा कि दोषियों को ज़्यादा से ज़्यादा सज़ा दी जानी चाहिए.”

जज ने कहा कि यह “मानवीय गरिमा का पूरी तरह उल्लंघन” है.

उन्होंने कहा, “कोर्ट इसे यूं ही नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता. बदलने का मौका दिए जाने के बाद भी वे नहीं बदले हैं. उन पर इस तरह हमला सिर्फ़ इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने कोरोना काल में अपनी दुकान (मोबाइल शॉप) खोली थी. अगर मद्रास हाई कोर्ट ने इस केस की खुद संज्ञान लिया नहीं होता, तो यह केस उनके शवों को दफ़नाने से पहले ही दफ़ना दिया गया होता.”

जज ने कहा, “उन्होंने निहत्थे लोगों पर हमला किया. उन्हें माफ़ नहीं किया जाना चाहिए. उम्र या पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर उन्हें कम सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. वे सभी शिक्षित हैं. पुलिस, जिसका काम जनता की रक्षा करना था, उन्होंने उन पर इस तरह हमला किया जैसे बाड़ ही फसलों को ख़त्म कर दे.”

उन्होंने कहा कि इस कृत्य को देखकर उनका दिल दुखता है, “बेनिक्स की मां के दुख को कोई कम नहीं कर सकता. एक परिवार उजड़ गया है. उनके लिए उम्रक़ैद भी काफ़ी नहीं होगी.”

जज ने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है.

जज ने हर एक दोषी के लिए सज़ा का विवरण सुनाते हुए कहा, “वे सोच सकते हैं कि ऐसा अपराध करने के बाद वे 14 साल में छूट जाएंगे. लेकिन अदालत ऐसा होने देने के लिए तैयार नहीं है.”

किसको कितनी सज़ा और ज़ुर्माना

बेनिक्स की मां और बहन

इमेज स्रोत, Handout

मुख्य दोषी इंस्पेक्टर श्रीधर समेत सभी 9 अभियुक्तों को डबल डेथ सेंटेंस (दो बार फांसी) के अलावा अलग-अलग धाराओं में एक से लेकर सात साल की जेल की सज़ा और कुल 76.38 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया है.

अदालत ने इंस्पेक्टर श्रीधर पर 24.10 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

दूसरे दोषी बालकृष्णन को क़ानून की अलग-अलग धाराओं के तहत एक साल और सात साल के कारावास, दोहरी मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई और 16.80 लाॉख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

तीसरे दोषी रघुगणेश को क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक साल और सात साल की क़ैद, दोहरी मौत की सज़ा और 5.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.

चौथे दोषी हेड कॉन्स्टेबल मुरुगन को दोहरी मौत की सज़ा के साथ कानून की अलग-अलग धाराओं के तहत एक साल से लेकर सात साल की क़ैद और 10.10 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

पांचवें दोषी सामदुरई को क़ानून की धाराओं के तहत दोहरी मौत की सज़ा, एक से लेकर सात साल की क़ैद और 5.60 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

छठे दोषी मुथुराजा को क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक से लेकर सात साल की क़ैद और दोहरी मौत की सज़ा सुनाई गई. इसके अलावा, 3.20 लाख रुपये का ज़ुर्माना भी लगाया गया.

सातवें दोषी सेल्लादुरई को दोहरी मौत की सज़ा के साथ क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक से सात साल की क़ैद की सज़ा दी गई और 14.40 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया.

आठवें दोषी थॉमस फ़्रांसिस को क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोहरी मौत की सज़ा के साथ एक से सात साल की क़ैद और 10.54 लाख रुपये का ज़ुर्माना सुनाया गया.

नौवें दोषी वेलुमुथु को भी दोहरी मौत की सज़ा के साथ क़ानून की विभिन्न धाराओं के तहत एक से सात साल की क़ैद और 10.54 लाख रुपये का ज़ुर्माना सुनाया गया.

बेनिक्स की बहन ने क्या कहा?

बेनिक्स की बहन ने पत्रकारों से कहा, “2020 में जांच के नाम पर मेरे पिता और भाई की बेरहमी से हत्या की गई. 6 साल बाद भी हमें उम्मीद थी कि हमें न्याय मिलेगा, और आज वह मिला.”

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ उनके परिवार नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी न्याय है.

उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि किसी और परिवार के साथ ऐसा न हो. अगर दोषी आगे अपील करेंगे, तो हम भी अदालत जाएंगे और आख़िरी सांस तक लड़ेंगे.”

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि ऐसे मामले दोबारा नहीं होने चाहिए. जज ने उम्मीद जताई, “हम आशा करते हैं कि यह दोबारा नहीं होगा.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS