Home विश्व समाचार उन्होंने हमारी चिप इंडस्ट्री चुरा ली… चीन के साथ ताइवान का सौदा...

उन्होंने हमारी चिप इंडस्ट्री चुरा ली… चीन के साथ ताइवान का सौदा कर आए ट्रंप? मच गई खलबली

14
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के बाद ताइवान संकट गहराया। $250 अरब की चिप डील के बाद ट्रंप ने ताइवान को दी ‘शांत रहने’ की चेतावनी। जानिए जिनपिंग और ताइवान का रिएक्शन।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के ऐतिहासिक दौरे से वापस लौट आए हैं। करीब एक दशक बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का ये पहला चीन दौरा था। लेकिन उनके इस दौरे के बाद ताइवान को लेकर दुनिया भर में खलबली मच गई है। जिस ताइवान के साथ अमेरिका ने हाल ही में चिप इंडस्ट्री को लेकर एक बड़ी डील की थी, उसी ताइवान को अब ट्रंप ने चीन के सामने दबने और ‘शांत रहने’ की नसीहत दे दी है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की जड़ क्या है, ‘चिप इंडस्ट्री’ का क्या कनेक्शन है, जिनपिंग ने ट्रंप से क्या कहा और ताइवान इस पर कैसे प्रतिक्रिया दे रहा है।

“हमारी चिप इंडस्ट्री चुरा ली” और 250 अरब डॉलर की डील

यह पूरा विवाद सेमीकंडक्टर और AI चिप्स के इर्द-गिर्द घूमता है। डोनाल्ड ट्रंप पूर्व में कई बार आरोप लगा चुके हैं कि ताइवान ने अमेरिका का चिप बिजनेस “चुरा” लिया है। इसी को वापस अमेरिका लाने के लिए जनवरी 2026 में अमेरिका और ताइवान के बीच 250 अरब डॉलर की एक ऐतिहासिक ट्रेड डील हुई थी। इस डील के तहत ताइवान ने अमेरिकी टेक और चिप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 250 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था, ताकि अमेरिका में सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन को वापस लाया जा सके। बदले में अमेरिका ने ताइवानी सामानों पर टैरिफ 20% से घटाकर 15% कर दिया था। इस डील से अमेरिका ने अपना चिप सेक्टर तो सुरक्षित कर लिया, लेकिन चीन इस बात से बुरी तरह चिढ़ गया।

बीजिंग में शी जिनपिंग की ट्रंप को सीधी धमकी

मई 2026 के इस दौरे में जब ट्रंप और शी जिनपिंग आमने-सामने बैठे, तो ताइवान सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा।

जिनपिंग की रेड लाइन: चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी जिनपिंग ने ट्रंप को दो टूक चेतावनी दी कि ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे अहम है।

टकराव की चेतावनी: जिनपिंग ने साफ कहा कि अमेरिका ताइवान के मामले में “अतिरिक्त सावधानी” बरते। अगर ताइवान मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया, तो दोनों देशों (अमेरिका और चीन) के बीच भयंकर “टकराव और झड़प” हो सकती है। चीन की कोशिश है कि अमेरिका ताइवान को दिए जाने वाले 14 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार पैकेज को रद्द कर दे।

ट्रंप ने ऐसा क्या कर दिया जिससे मच गई खलबली?

चीन की इस धमकी के बाद, ताइवान को उम्मीद थी कि ट्रंप अमेरिका के पुराने रुख पर कायम रहते हुए उसे कड़ा जवाब देंगे। लेकिन ट्रंप के बयान ने ताइवान सहित पूरी दुनिया को चौंका दिया। ऐसा लगने लगा जैसे चिप डील पूरी होने के बाद ट्रंप ताइवान को लेकर चीन के साथ किसी ‘अघोषित समझौते’ पर आ गए हों। दौरे के समापन पर ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ताइवान को सीधे तौर पर चेतावनी दे डाली।

हम 9500 मील दूर जाकर नहीं लड़ सकते: ट्रंप ने कहा कि चीन एक विशाल और शक्तिशाली देश है, जबकि ताइवान एक छोटा सा द्वीप है। उन्होंने कहा, “अगर आप संभावनाओं को देखें, तो चीन एक बहुत-बहुत शक्तिशाली और बड़ा देश है। वहीं, ताइवान एक बहुत छोटा-सा द्वीप है। जरा सोचिए- ताइवान चीन से महज 59 मील दूर है। जबकि हम (अमेरिका) 9500 मील दूर हैं। यह थोड़ी मुश्किल समस्या है।” ट्रंप ने आगे कहा, “अगर आप इतिहास देखें, तो ताइवान का विकास इसलिए हुआ क्योंकि हमारे यहां ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें पता ही नहीं था कि वे आखिर कर क्या रहे हैं। उन्होंने (ताइवान ने) हमारी चिप इंडस्ट्री चुरा ली।”

खुद को स्वतंत्र देश घोषित ना करे ताइवान- ट्रंप

ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ से बातचीत में यह भी कहा कि शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक चीन संभवतः ताइवान के खिलाफ कोई आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। ट्रंप ने कहा, ”यह ताइवान पर कब्जे का मामला नहीं है। वे (चीन) सिर्फ यह नहीं चाहता कि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित करे।” उन्होंने कहा, ”जब तक मैं (सत्ता) में हूं, मुझे नहीं लगता कि वे कुछ करेंगे। लेकिन मेरे बाद वे ऐसा कर सकते हैं।” ट्रंप ने कहा, ”मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे। हम युद्ध नहीं चाहते। अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो मुझे लगता है कि चीन भी इससे संतुष्ट रहेगा।”

ट्रंप ने ताइवान को चेतावनी दी कि वह खुद को औपचारिक रूप से स्वतंत्र घोषित न करे। उन्होंने कहा, “हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई यह कहे कि चलो हम स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।” ट्रंप ने कहा कि ताइवान को थोड़ा शांत रहना चाहिए और यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए।

ताइवान का रिएक्शन: “भविष्य हम तय करेंगे”

ताइवान ने शनिवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए खुद को एक “संप्रभु और स्वतंत्र लोकतांत्रिक राष्ट्र” बताया है। ताइवान का यह स्पष्टीकरण तब आया है, जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को औपचारिक रूप से अपनी आजादी की घोषणा करने से बचने की हिदायत दी थी। डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ही अपना बीजिंग का राजकीय दौरा खत्म किया है। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप पर ताइवान का समर्थन न करने का दबाव बनाया। दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उस पर कब्जा करने की धमकी देता रहा है। जिनपिंग ने ट्रंप से साफ कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर उठाया गया कोई भी गलत कदम दोनों देशों के बीच “टकराव” का कारण बन सकता है।

ट्रंप के इस बदले हुए रुख से ताइवान में गहरी चिंता और नाराजगी है। ताइवान जो खुद को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है, उसने अमेरिका के इस ढुलमुल रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है:

केवल जनता को है अधिकार: ताइवान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर ने ट्रंप के बयान के बाद स्पष्ट किया कि केवल ताइवान की जनता ही लोकतांत्रिक तरीके से अपने भविष्य का फैसला कर सकती है, कोई और नहीं।

राष्ट्रपति का रुख: ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का स्पष्ट मानना है कि ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्रता घोषित करने की कोई जरूरत ही नहीं है, क्योंकि वह पहले से ही एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को चीन ‘समस्या पैदा करने वाला’ मानता है। ताजा घटनाक्रमों से यह साफ है कि अमेरिका ने ताइवान से चिप निवेश (250 अरब डॉलर) तो हासिल कर लिया है, लेकिन सैन्य मोर्चे पर ट्रंप चीन से सीधे उलझने से बच रहे हैं।

हथियारों की बिक्री को लेकर असमंजस

हाल ही में ताइवान की संसद ने अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए 25 अरब डॉलर का रक्षा बजट पास किया है। लेकिन ट्रंप ने हथियारों की इस बिक्री को अमेरिका के लिए एक “बहुत अच्छा सौदेबाजी का मोहरा (बार्गेनिंग चिप)” बताकर ताइवान की चिंता बढ़ा दी है।

पहले अमेरिका यह कहता था कि ताइवान को हथियार बेचने के मामले में वह चीन से कोई सलाह नहीं लेगा। लेकिन अब ट्रंप का कहना है कि वे इस सौदे पर जल्द ही फैसला लेंगे। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को याद दिलाया है कि हथियारों की बिक्री केवल एक सुरक्षा वादा नहीं है, बल्कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने का एक अहम हिस्सा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह रवैया ताइवान के लिए चिंताजनक हो सकता है:

चीन से करीबी: ‘नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी’ के त्सेंग वेई-फेंग का मानना है कि ट्रंप प्रशासन चीन के साथ बेहतर रिश्ते बनाने के लिए ताइवान को दिए जाने वाले हथियारों के पैकेज में कुछ बदलाव कर सकता है, ताकि चीन को खुश किया जा सके।

सुरक्षा वादों पर सवाल: ‘नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी’ के प्रोफेसर लेव नचमैन के मुताबिक, ताइवान यही नहीं सुनना चाहता था कि हथियारों को एक ‘बार्गेनिंग चिप’ की तरह इस्तेमाल किया जाए। ताइवान को उम्मीद थी कि हथियारों की बिक्री पर कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन ट्रंप के बयान से ऐसा लग रहा है कि अमेरिका अपनी पुरानी सुरक्षा गारंटियों से पीछे हट रहा है।

(इनपुट एजेंसी)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN