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ईरान युद्ध में क्या सऊदी अरब खेल रहा बड़ा गेम, ट्रंप से क्यों जंग जारी रखने की मनुहार?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के 25वें दिन एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को जारी रखने का आग्रह किया है।

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के 25वें दिन एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को जारी रखने का आग्रह किया है। उन्होंने इस संघर्ष को क्षेत्र को पूरी तरह नया आकार देने का ‘ऐतिहासिक अवसर’ बताया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में क्राउन प्रिंस ने ट्रंप के साथ हुई कई बातचीत में ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका और इजरायल का मौजूदा सैन्य अभियान मध्य पूर्व को नया रूप देने का दुर्लभ मौका है। प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का मानना है कि ईरान खाड़ी देशों के लिए दीर्घकालिक खतरा बना हुआ है, जिसका समाधान केवल तेहरान की मौजूदा सरकार को हटाकर ही संभव है।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। संघर्ष के बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजार और लंबे युद्ध की आशंका को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान को गंभीर खतरा मानते हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब की चिंताएं अलग हैं, खासकर एक अस्थिर या विफल ईरानी राज्य से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को लेकर। हालांकि इन रिपोर्टों के बावजूद सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से युद्ध को लंबा खींचने का समर्थन करने से इनकार किया है। एक आधिकारिक बयान में सऊदी सरकार ने कहा है कि सऊदी अरब साम्राज्य ने संघर्ष शुरू होने से पहले भी हमेशा इसके शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।

बयान में आगे कहा गया कि वर्तमान में सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा है। ईरान ने कूटनीतिक रास्ता छोड़कर खतरनाक टकराव का रास्ता चुना है, जिससे सभी पक्षों को नुकसान हो रहा है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान ईरान को ही उठाना पड़ रहा है। इस युद्ध के कारण सऊदी अरब को पहले ही गंभीर आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने तेल बाजारों को बाधित कर दिया है और प्रमुख बुनियादी ढांचे को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे खाड़ी देशों के तेल निर्यात पर असर पड़ा है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने समेत और सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है तथा तेहरान की सरकार को कमजोर करने के लिए जमीनी अभियानों की संभावना तक का सुझाव दिया है। दूसरी ओर जानकारों ने चेतावनी दी है कि सऊदी अरब एक जटिल दुविधा में फंसा हुआ है। ईरान को कमजोर करने से रणनीतिक फायदा तो हो सकता है, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा भी बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो सऊदी अरब की विजन 2030 जैसी महत्वाकांक्षी आर्थिक योजनाएं खतरे में पड़ सकती हैं। लंबा युद्ध निवेशकों को हतोत्साहित कर सकता है, ऊर्जा निर्यात बाधित कर सकता है और देश के वित्तीय संसाधनों पर भारी दबाव डाल सकता है, ठीक उसी समय जब सऊदी अरब बड़े आर्थिक सुधारों को लागू कर रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN