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ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन को बचाने में सीआईए ने कैसे निभाया अहम रोल

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Source :- BBC INDIA

एक तस्वीर में जले हुए विमान का मलबा दिख रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह ईरान में फंसे अमेरिकी एयरमैन की तलाश के दौरान अमेरिकी मिशन में नष्ट हुआ था. रेतीली ज़मीन पर धातु के टुकड़ों और धुएँ के बीच दो प्रोपेलर जैसे हिस्से नज़र आ रहे हैं.

इमेज स्रोत, Reuters

अमेरिकी सेना ने ईरान में अपने एक लड़ाकू विमान के लापता क्रू सदस्य को एक नाटकीय मिशन में बचा लिया है. इस फ़ाइटर जेट को वहां के एक दूरदराज़ इलाके में ईरान ने मार गिराया था.

ये सब कैसे हुआ ये अब भी पूरी तरह साफ़ नहीं हैं, लेकिन दुश्मन इलाके में फंसे एयरमैन को निकालने का ऑपरेशन बेहद जटिल था.

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इस मिशन में स्पेशल फ़ोर्सेज़ के दर्जनों जवानों के साथ अमेरिकी लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर भी शामिल थे. अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई.

रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “हमने ईरान के पहाड़ों की गहराई से गंभीर रूप से घायल और बेहद बहादुर एफ़-15 क्रू सदस्य को बचा लिया है.”

लेकिन इस एयरमैन की मुश्किलें शुक्रवार से शुरू हुईं, जब खबर आई कि दक्षिणी ईरान के ऊपर उड़ रहे एक एफ़-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया. इस विमान में एक वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर और एक पायलट सवार थे.

यह 20 साल से ज़्यादा समय में पहली घटना थी, जब दुश्मन की गोलीबारी में किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया गया.

इस एफ़-15ई स्ट्राइक ईगल में सवार अमेरिकी सेना के ये दोनों अधिकारी विमान से इजेक्ट करने में कामयाब रहे. पायलट को उसी दिन बचा लिया गया था, लेकिन दूसरा क्रू सदस्य लापता था.

ईरान ने ज़िंदा पकड़ने पर घोषित किया था इनाम

दक्षिणी ईरान के ऊपर उड़ रहे एक एफ़-15 लड़ाकू विमान को ईरान ने मार गिराया (तस्वीर: 5 अप्रैल)

इमेज स्रोत, Islamic Revolutionary Guard Corps/Anadolu via Getty Images

इसके बाद अमेरिका ने उसे खोजने का अभियान शुरू कर दिया.

वहीं ईरान ने इस अमेरिकी क्रू मेंबर को ज़िंदा पकड़ने के लिए 66 हज़ार डॉलर (क़रीब 62 लाख रुपए) का इनाम भी घोषित कर दिया.

सोशल मीडिया पर साझा किए गए कुछ वीडियो में कई हथियारबंद नागरिक उसे खोजते हुए दिखाई दे रहे थे. हालांकि बीबीसी इन वीडियोज़ की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ज़मीन पर उतरने के बाद उस अधिकारी के पास अपनी हिफ़ाज़त के लिए सिर्फ़ एक हैंडगन थी.

ऐसी स्थिति के लिए एयरमैन को पहले से ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें अपना बीकन सिग्नल ऑन करना, किसी ऊंची जगह तक पहुंचना, खुद को छिपाना और संचार स्थापित करना शामिल होता है.

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार एयरमैन ने पहाड़ की एक दरार में खुद को छिपा लिया था और बीकन का इस्तेमाल बहुत सीमित रखा, क्योंकि उसे डर था कि इसका सिग्नल ईरान के हाथ लग सकता है.

इसके बाद वह कथित तौर पर अपने बचाव दल के पहुंचने का इंतज़ार करता रहा.

सीआईए का रोल

एफ़-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों की फ़ाइल फ़ोटो

इमेज स्रोत, Getty Images

अमेरिकी मीडिया से बात करने वाले ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन में सीआईए ने बेहद अहम भूमिका निभाई.

अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी ने ही एयरमैन की सटीक लोकेशन पहाड़ की एक दरार तक ट्रैक की और यह जानकारी पेंटागन को दी.

ट्रंप ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना बना रहे अमेरिकी अधिकारी उसकी लोकेशन पर “24 घंटे नज़र” रखे हुए थे.

राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे दुश्मन भी हमारे अफ़सर की तलाश में जुटे थे और हर घंटे उसके और करीब पहुंचते जा रहे थे.”

रिपोर्टों के मुताबिक सीआईए ने एक भ्रामक अभियान भी चलाया और ईरान के भीतर यह खबर फैलाई कि अमेरिकी बल दूसरे एयरमैन को पहले ही खोज चुके हैं.

‘अमेरिका ने भेजे दर्जनों विमान’

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SOURCE : BBC NEWS