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ईरान ने अमेरिका को याद दिलाया वियतनाम का जख्म, ट्रंप के जीत के दावों पर कसा तंज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को वियतनाम युद्ध का जख्म याद दिलाया है। उन्होंने कहा कि जैसे वियतनाम के युद्ध में जमीनी हकीकत कुछ और थी और वाइट हाउस कुछ और बताता था, ठीक उसी तरह ईरान में भी वह यही कर रहा है। ट्रंप जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन उनके फाइटर जेट नुकसान उठा रहे हैं।

Iran war latest update: पश्चिम एशिया में जारी जंग अब 21वें दिन में पहुंच गई है। दोनों तरफ से एक-दूसरे के ऊपर लगातार हमले किए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा युद्ध के शुरुआती दिनों से ही दावा किया जा रहा है कि युद्ध को जीता जा चुका है, बस कुछ समय की बात है। ट्रंप के इन दावों पर ईरान की तरफ से तंज कसा गया है। अमेरिकियों को वियतनाम युद्ध की याद दिलाते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि लोगों को अभी भी वह युद्ध याद है, जब वहां (वियतनाम में) हजारों लोग मारे जा रहे थे और नतीजा लगभग साफ हो चुका था, फिर भी वाइट हाउस जनता को जीत का झूठा दिलासा देता था। आज भी वही हालात हो रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर ट्रंप द्वारा किए जा रहे जीत के दावों पर परोक्ष रूप से हमला बोला। उन्होंने कहा, “अमेरिकी आज भी उस बात को नहीं भूले हैं, जब वियतनाम की जंग में सैंकड़ों अमेरिकी सैनिक मारे जा रहे थे। युद्ध का नतीजा लगभग साफ हो चुका था कि अमेरिका हार चुका है। लेकिन इसके बाद भी जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड को देश वापस आकर भरोसा दिलाने के लिए कहा गया कि अमेरिका जीत रहा है। लेकिन इसकी हकीकत सभी को पता थी। अमेरिकी मीडिया भी उस युद्ध को भूला नहीं है, तभी मोर्चे से आने वाली ब्रीफिंग्स को ‘फाइव ओक्लॉक फॉलीस’ के नाम से बदनाम किया गया था।

आज भी वियतनाम जैसा हाल- अराघची

अराघची ने वियतनाम युद्ध की स्तिथि को वर्तमान ईरान युद्ध से जोड़ते हुए कहा कि आज इस संघर्ष में भी अमेरिका का हाल वही है। उन्होंने लिखा, “आज के दौर में देखें तो स्क्रिप्ट वही है, बस मंच अलग है। रोज पीट हेगसेथ सामने आते हैं और ऐसी बातें करते हैं, जो हकीकत से अलग हैं। अमेरिकी सरकार जमीनी हकीकत से अलग बात कहती है। जब अमेरिकी अधिकारी यह दावा कर रहे होते हैं कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम खत्म हो चुका है, उसी दौरान उनके एक एफ-35 पर हमला हो जाता है। वह कहते हैं कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, तभी उनका यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड वापस लौट जाता है। यूएसएस अब्राहम लिंकन दूर हटता नजर आता है। अमेरिका के लिए दशक बदल गया है, लेकिन नारा वही है पुराना- हम जीत रहे हैं।”

क्या है अमेरिका का वियतनाम जख्म?

अमेरिकी सेना द्वारा शीत युद्ध के दौरान लड़ा गया वियतनाम युद्ध 20 साल तक चला। 1955 में शुरू हुआ यह युद्ध 1975 में जाकर खत्म हुआ था। दरअसल, उस समय पर वियतनाम दो हिस्सों में बंटा हुआ था। उत्तरी वियतनाम पर कम्युनिस्ट शासन था, जबकि दक्षिणी वियतनाम के स्थानीय शासन को अमेरिका कास समर्थन प्राप्त था।

1955 में अमेरिका यह कहकर युद्ध में उतरा था कि अगर सेना नहीं भेजी गई, तो पूरे वियतनाम पर कम्युनिस्टों का कब्जा हो जाएगा और फिर वहां से पूरे एशिया पर। कम्युनिज्म को रोकने के नाम पर अमेरिका युद्ध में कूद गया। युद्ध के शुरू होने के बाद अमेरिकी सेना लगातार यह दावा करती रही कि वह युद्ध जीत रही है। सेना के जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड जनता को यह समझाते रहे कि दुश्मन वहां लगातार कमजोर हो रहा है। हालांकि, युद्ध की जमीनी हकीकत कुछ ओर ही थी।

वियतनाम के स्थानीय लोग एक संगठन बनाकर अमेरिकी सेना पर टूट पड़े। गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से इस युद्ध में जंगलों में, सुरंगे बनाकर अमेरिकी सेना को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने भी स्थानीय लोगों को जमकर निशाना बनाया। इस युद्ध में लाखों वियतनामी लोग मारे गए और 58 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई।

वाइट हाउस ने इस युद्ध को संभालने की बहुत कोशिश की लेकिन वह इसमें नाकामयाब रहा। वर्ष 1968 में उत्तरी वियतनाम ने दक्षिणी वियतनाम पर हमला कर दिया। इससे स्थिति साफ हो गई कि दुश्मन कमजोर नहीं हुआ है। अमेरिकी जनता में इस युद्ध को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया। और आखिरकार अमेरिका को 1973 में धीरे-धीरे अपनी सेना को वापस बुलाना शुरू करना पड़ा। 1975 में उत्तर वियतनाम ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया। यानी जिस उद्देश्य के लिए अमेरिका ने अपने हजारों सैनिक खो दिए और 20 साल लगा दिए, आखिरकार वह एक बड़ी हार साबित हुई।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN