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ईरान के शीर्ष नेतृत्व में भारी अंदरूनी कलह उजागर हुई है। कट्टरपंथी कमांडर वाहिदी ने सत्ता संघर्ष जीत लिया है, जिससे कूटनीति के पक्षधर गालिबाफ के इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। जानें इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर इसका क्या असर होगा।
अमेरिका स्थित प्रमुख थिंक टैंक, इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की एक नई रिपोर्ट में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच चल रही भारी खींचतान का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में बातचीत और कूटनीति के मुद्दे पर कट्टरपंथी और नरमपंथी गुटों के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष में कट्टरपंथियों ने जीत हासिल कर ली है।
सत्ता संघर्ष में कट्टरपंथियों (वाहिदी) की जीत
ISW के आकलन के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबियों ने संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ और अन्य नरमपंथी अधिकारियों की कोशिशों को लगातार नाकाम किया है। गालिबाफ चाहते थे कि ईरानी शासन अमेरिका या पश्चिमी देशों के साथ बातचीत में थोड़ा ‘लचीला रुख’ अपनाए ताकि कूटनीतिक रास्ते खुल सकें। इसके विपरीत, जनरल वाहिदी ने इस आंतरिक लड़ाई में जीत हासिल कर ली है। अब वह युद्ध और वार्ता को लेकर ईरान की नीति तय करेंगे, जो पूरी तरह से सख्त और समझौता न करने वाली होगी।
वाहिदी के इस दबदबे का सीधा मतलब है कि वह नरमपंथियों की तुलना में अमेरिका के साथ सीधे टकराव या युद्ध का जोखिम उठाने को अधिक तैयार हैं। इससे भविष्य में अमेरिका-ईरान वार्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
गालिबाफ का घटता प्रभाव और संभावित इस्तीफा
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय गालिबाफ के पास ईरान की नीतियों को बदलने की कोई खास ताकत नहीं बची है। पश्चिमी मीडिया के सूत्रों के हवाले से ISW ने कहा है कि गालिबाफ अंदरूनी मतभेदों से काफी हताश हो चुके हैं और उन्होंने वार्ता दल से इस्तीफा देने का मन बना लिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया गया है कि परमाणु रियायतों को लेकर हुए विवाद के कारण वह पहले ही अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं।
ईरान का ‘एकजुटता’ दिखाने का प्रयास
ISW द्वारा ईरान के नेतृत्व में दरार की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ईरानी सरकार दुनिया को अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। शुक्रवार को ईरान के नेतृत्व ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष गालिबाफ और न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई की एक साथ तस्वीर शेयर की। इसका मकसद अमेरिकी दावों को खारिज करना और यह जताना था कि पूरा देश एक साथ खड़ा है।
गालिबाफ का बयान
विवादों के केंद्र में रहे गालिबाफ ने खुद सोशल मीडिया पर लिखा- ईरान में कोई कट्टरपंथी या नरमपंथी नहीं है; हम सभी ‘ईरानी’ और ‘क्रांतिकारी’ हैं। हम देश और सरकार की अटूट एकता और सर्वोच्च नेता के पूर्ण आज्ञापालन के साथ हमलावर अपराधियों को उनके किए पर पछताने पर मजबूर कर देंगे। एक ईश्वर, एक नेता, एक राष्ट्र और एक ही रास्ता है; और वह रास्ता ईरान की जीत का है।
इस्लामाबाद में अहम त्रिपक्षीय वार्ता
यह पूरी कूटनीतिक और आंतरिक उथल-पुथल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 24 अप्रैल को ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर 25 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं।
‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत के बाद अराघची, विटकॉफ और कुशनर के बीच एक सीधी त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है। एक तरफ ईरान का आधिकारिक ढांचा दुनिया के सामने अपनी एकता का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ISW की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि पर्दे के पीछे ईरान की नीतियां अब पूरी तरह से कट्टरपंथियों के नियंत्रण में जा रही हैं। इस्लामाबाद में होने वाली ये बैठकें इस बात का लिटमस टेस्ट होंगी कि क्या ईरान वास्तव में कोई कूटनीतिक समाधान चाहता है, या वाहिदी के नेतृत्व में वह टकराव का रास्ता ही चुनेगा।
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