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ईरान की जंग से क्या भारत में एलपीजी संकट और गहराएगा?

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Source :- BBC INDIA

एलपीजी

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2 घंटे पहले

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मध्य पूर्व में छिड़े संघर्ष का साया अब दुनिया की तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ने लगा है.

इस वजह से भारत के अलावा कई अन्य देशों में संकट बढ़ता जा रहा है.

नौ मार्च की शाम को तेल और गैस के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ज़बरदस्त हलचल शुरू हुई. इसकी जड़ स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते आने वाले तेल की सप्लाई का बाधित होना है.

लेकिन भारत में तेल और गैस सप्लाई की कमी को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सप्लाई की ‘कोई किल्लत नहीं’ है और ‘घबराने की ज़रूरत नहीं’ है.

ईरान पर अमेरिका और इसराइल के ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित कर दिया है.

इसी रास्ते से चीन, जापान और भारत समेत कई देशों को तेल और गैस की सप्लाई होती है. बीते 24 घंटों में हालात तेज़ी से बदले हैं.

भारत में रेस्टोरेंट उद्योग की ओर से कमर्शियल कुकिंग सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा आने की शिकायतों के बीच भारतीय पेट्रोलियम मंत्री ने निर्बाध आपूर्ति का वादा किया है.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “भारत की ऊर्जा आयात अलग-अलग स्रोतों और रास्तों से जारी है. हमने युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद कदम उठाए हैं ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को 100% सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई मिले. बाकी उद्योगों को भी 70-80% तक सप्लाई मिलती रहे.”

मोहम्मद रिज़वान

तेल के दामों में उथल-पुथल

तेल

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सोमवार शाम बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की क़ीमत नौ मार्च को प्रति बैरल 100 डॉलर के पार चली गई थी, लेकिन 10 मार्च को इसमें करीब 10% की गिरावट आई. इससे पहले यह बढ़त स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में लंबे समय तक रुकावट की आशंका के कारण हुई थी.

लेकिन इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध “लगभग खत्म हो चुका है.” उनके इस बयान के बाद क़ीमतों में यह गिरावट आई.

इससे पहले बाज़ार में काफ़ी उतार-चढ़ाव देखा गया था और मध्य पूर्व में उत्पादन घटने के कारण पिछले हफ्ते क़ीमतें 30% से ज़्यादा उछल गई थीं.

सऊदी अरामको के सीईओ ने चेतावनी दी कि अगर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ लंबे समय तक बंद रहा तो इसका वैश्विक बाज़ारों पर “भारी असर” पड़ सकता है. उनका कहना है कि ऐसा होने पर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से जुड़े तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा एक महीने के भीतर रुक सकता है.

अरामको के सीईओ अमीन नासेर ने पत्रकारों को बताया, “दुनिया के तेल बाज़ारों के लिए इसके विनाशकारी नतीजे हो सकते हैं. रुकावट जितनी लंबी चलेगी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर उतना ही गंभीर होगा. हम पहले भी कई रुकावटों का सामना कर चुके हैं, लेकिन यह अब तक क्षेत्र के तेल और गैस उद्योग के सामने आया सबसे बड़ा संकट है.”

उधर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका-इसराइल का ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह बन गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते होने वाली तेल और गैस की ढुलाई पर निर्भर तेल उत्पादन जल्द रुक सकता है.

पुतिन ने कहा कि रूस, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है और जिसके पास प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा भंडार है, यूरोपीय ग्राहकों के साथ फिर से काम करने के लिए तैयार है अगर वे लंबी अवधि के सहयोग की तरफ लौटना चाहें.

भारत पर असर

एलपीजी

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दुनिया में तेल की क़ीमतों से भी तेज़ी से लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की कीमतें बढ़ रही हैं. दरअसल एलएनजी का प्रमुख उत्पादक देश क़तर है और क़तर ने इसका उत्पादन रोक दिया है.

यूरोप और एशिया पर इसका असर दिखने लगा है. भारत में कंपनियों ने मार्च की शुरुआत से ही एहतियात के तौर पर औद्योगिक गैस आपूर्ति में करीब 20% तक कटौती कर दी है.

पाकिस्तान ने बढ़ती कीमतों के कारण स्कूल बंद करने जैसे आपात कदम उठाए हैं और सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले ईंधन भत्ते में भी कटौती की है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक भारत है और इसने पिछले हफ्ते ही आपात उपायों का इस्तेमाल करते हुए रिफ़ाइनरियों को घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए हैं. इसके कारण हॉस्पिटैलिटी उद्योग को पर्याप्त आपूर्ति पाने में मुश्किल हो रही है.

भारत के तेल मंत्रालय ने कहा है कि उसने रेस्तरां और अन्य उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी मांगों की समीक्षा के लिए एक पैनल बनाया है. यह कदम उद्योग संगठनों की अपील के बाद उठाया गया.

पांच लाख से अधिक रेस्तरां का प्रतिनिधित्व करने वाले नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने सोमवार को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखकर कहा, “रेस्तरां उद्योग अपने संचालन के लिए मुख्य रूप से कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर है. अगर इसमें किसी तरह की बाधा आती है तो बड़े पैमाने पर रेस्तरां के बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है.”

वहीं फ़ेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशंस ऑफ़ इंडिया ने भी सरकार से मदद मांगी है. उधर भारतीय कंपनियों ने लगभग एक साल बाद पहली बार एलपीजी की क़ीमतों में बीते शनिवार को बढ़ोतरी की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पुणे नगर निगम ने एलपीजी के घटकों जैसे प्रोपेन और ब्यूटेन के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध के कारण शहर के गैस शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है.

ब्लूमबर्ग के अनुसार, हालात के मद्देनज़र ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी), गेल और रिलायंस की ओर से संचालित पेट्रोकेमिकल संयंत्रों के साथ-साथ बिजली संयंत्रों को आपूर्ति कम की जा सकती है या पूरी तरह से बंद की जा सकती है.

भारत की एलपीजी आयात पर निर्भरता

एलएनजी

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समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, भारत लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का दुनिया में चौथा सबसे बड़ा और एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है.

ये आयात मुख्य रूप से मध्य पूर्व से किए जाते हैं, जहां अभी संघर्ष चल रहा है.

अल जज़ीरा के मुताबिक़, क़तर एलएनजी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और उसने इसका उत्पादन रोक दिया है.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, भारत मध्य पूर्व से अपनी ज़रूरत का अधिकांश एलपीजी और दो तिहाई एलएनजी ख़रीदता है.

मंगलवार को भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, “मध्य पूर्व में चल रहे मौजूदा संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से एलएनजी की शिपमेंट बाधित है. नए नियम बराबर वितरण को सुनिश्चित करने और प्रमुख सेक्टर्स के लिए लगातार उपलब्धता बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं.”

दरअसल मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि एलएनजी की आपूर्ति को घरों, परिवहन क्षेत्र और एलपीजी उत्पादन के लिए प्राथमिकता दी जाए.

अन्य क्षेत्रों, जैसे उर्वरक संयंत्र और चाय उद्योग, को उनकी खपत की ज़रूरत का लगभग 70 से 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी, जो “संचालन उपलब्धता” पर निर्भर करेगी.

इस कमी को पूरा करने के लिए पेट्रोकेमिकल इकाइयों और बिजली संयंत्रों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति को पूरी तरह या आंशिक रूप से कम किया जाएगा.

भारत के कई उद्योग, जिनमें सिरेमिक और टाइल बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं, पहले ही कह चुकी हैं कि उन्हें गैस आपूर्ति में कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को मुख्य रूप से खाद्यान्न, दवाओं, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने, उनकी क़ीमतों को नियंत्रित करने और कालाबाज़ारी को रोकने के लिए लागू कर दिया है.

हालांकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में मालवाहक जहाज़ों को सुरक्षा देने के ट्रंप के बयान के बाद बाज़ार में घबराहट कम हुई है और क़ीमतें भी नीचे आई हैं.

भारत में उद्योगों की प्रतिक्रिया

विजय के शेट्टी

शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में सबसे बड़े तेल भंडार डिपो पर हमले के बाद क़ीमतों में अचानक उछाल आया, जिसका असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा.

मंगलवार को भारत का सेंसेक्स पांच प्रतिशत टूट गया. हालांकि बुधवार को सेंसेक्स में 600 अंकों से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

एशियाई बाज़ारों में भी यही रुझान देखने को मिला. मंगलवार को जापान का निक्केई 3% नीचे पहुंच गया था, जबकि बुधवार को 2% उछला. इसी तरह हांग कांग का शेयर सूचकांक 3.5% नीचे था, जो बुधवार को 1.2% बढ़ा.

उधर भारत में उद्योगों की ओर से घबराहट के संकेत लगातार आने लगे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को आपूर्ति में कमी की सूचना दी है. एनआरएआई ने रेस्टोरेंट के लिए निश्चित कोटा की मांग की है.

इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एएचएआर) के अध्यक्ष विजय के शेट्टी ने एएनआई से कहा, “बीते दो दिनों से संकट बढ़ा है. 20% रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं. मुझे पूरे मुंबई से संदेश आ रहे हैं कि एलपीजी की ब्लैकमार्केटिंग हो रही है. कंज्यूमर प्रोटेक्शन मिनिस्टर छगन भुजबल ने हमें आश्वासन दिया है कि वो इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे और समस्या का हल ढूंढेंगे.”

बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुब्रमण्यम होल्ला ने एएनआई से कहा, “अभी तक कुछ भी बंद नहीं हुआ है क्योंकि हमने स्टॉक कर लिया था. लेकिन अगले तीन-चार दिनों में हमें नहीं पता कि क्या होने वाला है. अगर सप्लाई बंद होती है तो बिजली से चलने वाले उपकरणों का सहारा लेना पड़ेगा.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS