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इस्लामाबाद वार्ताः जेडी वेंस ने कहा- नहीं हो सका कोई समझौता, हमने ईरान को फ़ाइनल ऑफ़र दे दिया है

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Source :- BBC INDIA

जेडी वेंस

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3 घंटे पहले

पढ़ने का समय: 7 मिनट

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव देकर जा रहे हैं कि यही हमारा अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है. हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं.”

इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने बातचीत को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में अच्छा काम किया ताकि एक समझौता हो सके.”

उन्होंने कहा, “हम 21 घंटे से इस पर हैं लेकिन बुरी ख़बर ये है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके.”

उन्होंने कहा, “हमने अपनी सीमा स्पष्ट कर दी है. उन्होंने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है. बातचीत में जो भी कमियां थीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं. उन्होंने शानदार काम किया.”

उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की. साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अब पाकिस्तान छोड़ रहा है.

बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, फ़िलहाल उपराष्ट्रपति अमेरिका के लिए रवाना हो चुके हैं.

बीबीसी के सुरक्षा सूत्रों को मिले एक वीडियो में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति को पाकिस्तानी सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इसहाक़ डार और गृह मंत्री मोहसिन नकवी को विदाई देते हुए देखा जा सकता है.

इससे पहले ईरान और अमेरिकी प्रतिनिधि मंडलों के बीच शनिवार को शुरू हुई इस्लामाबाद वार्ता देर रात तक चली. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.

बीबीसी संवाददाता क्रिस्टल हेज़ के अनुसार, इस्लामाबाद समय के अनुसार, सुबह 4.50 बजे तक बातचीत जारी रही.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सेरेना होटल में यह वार्ता चल रही थी.

वार्ता ख़त्म होने से पहले, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ेई ने एक्स पर जानकारी दी कि पाकिस्तान के सद्भावपूर्ण प्रयासों और मध्यस्थता के तहत सुबह शुरू हुई कठिन वार्ता अब तक बिना किसी रुकावट के जारी है. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों और लिखित मसौदों का आदान-प्रदान हुआ है.”

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इन वार्ताओं के दौरान होर्मुज़ स्ट्रेट, परमाणु मुद्दे, जंग में हुए नुक़सान के मुआवज़े, प्रतिबंधों को हटाने और क्षेत्र में जंग की पूर्ण समाप्ति पर चर्चा हुई.

बातचीत ख़त्म होने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि ईरान के साथ समझौता होता है या नहीं, इससे उन्हें “कोई फर्क नहीं पड़ता.”

उधर, फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान से इस “अवसर का फ़ायदा उठाने” और “स्थायी तनाव कम करने का रास्ता निकालने” की अपील की थी.

मैक्रों ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि उन्होंने मसूद पेज़ेश्कियन से बात की और क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी वाले समझौते पर जोर दिया, जिसमें सभी देश शामिल हों. साथ ही होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की मांग की और लेबनान समेत संघर्ष विराम के महत्व पर भी जोर दिया.

‘ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोकना मुख्य मुद्दा’

जेडी वांस और शहबाज़ शरीफ़

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वेंस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सवालों के जवाब देते हुए कहा, “सीधी बात यह है कि हमें ईरान से साफ़ और ठोस प्रतिबद्धता चाहिए कि वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही ऐसे साधन जुटाएगा, जिनसे वह जल्दी परमाणु हथियार बना सके.”

उन्होंने इसे डोनाल्ड ट्रंप का ‘मुख्य लक्ष्य’ बताया.

वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “तबाह कर दिया गया है”, लेकिन उन्होंने इस बता पर भी ज़ोर दिया कि भविष्य में ईरान के परमाणु हथियार विकसित न करने के लिए “मजबूत और बुनियादी राजनीतिक इच्छाशक्ति” की ज़रूरत है.

“हमें अभी तक ऐसी प्रतिबद्धता दिखाई नहीं दी है. हमें उम्मीद है कि वह मिलेगी.”

वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान ईरान की फ़्रीज़ की कई संपत्तियों पर बातचीत हुई.

उन्होंने कहा, “हमने उन सभी मुद्दों पर बात की और उनसे आगे के कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई.”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुँच पाए, जहाँ ईरान हमारे प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो.”

बातचीत के दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मेरा मानना है कि हम काफ़ी लचीले थे और हमने काफ़ी सहूलियत देने वाला रुख़ अपनाया.”

ट्रंप ने क्या कहा था?

ट्रंप

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इससे पहले इस्लामाबाद में जारी वार्ता पर ट्रंप ने कहा था, “देखते हैं क्या होता है, लेकिन मुझे इससे फ़र्क नहीं पड़ता.”

पाकिस्तान में बातचीत जारी रहने के बीच ट्रंप व्हाइट हाउस में मीडिया से बात कर रहे थे.

ट्रंप ने अपने उस दावे को फिर दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और नेतृत्व को ख़त्म कर दिया है और अब होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने पर काम कर रहा है.

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यह काम उन देशों के लिए कर रहा है जो “डरे हुए या कमजोर या सस्ते हैं हमें नाटो से मदद नहीं मिली.”

ट्रंप ने कहा, “चाहे जो हो, हम जीतेंगे. हमने उस देश को पूरी तरह हरा दिया है.”

होर्मुज़ में अमेरिकी नौसेना का डिस्ट्रॉयर

होर्मुज़ स्ट्रेट

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अमेरिकी सेंटकॉम ने एक्स पर दावा किया अमेरिकी नौसेना होर्मुज़ स्ट्रेट में बारूदी सुरंग हटाने की तैयारी कर रही है और दो जहाज़ वहां से गुजर चुके हैं.

सेंटकॉम ने लिखा, “अमेरिकी बलों ने होर्मुज़ स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों को हटाने का काम शुरू कर दिया है. और अमेरिकी नेवी के दो गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर ने इस अभियान को अंजाम दिया है. यूएसएस फ़ैंक ई पीटर्सन और यूएसएस माइकल मर्फ़ी होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुजरा है.”

सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “आज हमने एक नया रास्ता बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और हम जल्द ही इस सुरक्षित मार्ग को समुद्री इस्तेमाल के साथ साझा करेंगे ताकि निर्बाध कमर्शियल आवाजाही को प्रोत्साहित किया जा सके.”

हालांकि ईरान ने इस दावे का खंडन किया है. फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, सशस्त्र बल मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा, “सेंटकॉम कमांडर का यह दावा पूरी तरह ख़ारिज किया जाता है. किसी भी जहाज़ के गुजरने की पहल इस्लामी गणराज्य ईरान की सेना के हाथ में है.”

लेबनान को लेकर नेतन्याहू ने क्या कहा?

नेतन्याहू

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ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में सबसे बड़ी बाधा रहे लेबनान के मुद्दे पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने लेबनान के साथ शांति वार्ता को मंज़ूरी दे दी है.

दरअसर, ईरान की शर्त थी कि युद्ध विराम में लेबनान को भी शामिल किया जाए.

नेतन्याहू ने कहा कि लेबनान ने पिछले एक महीने में कई बार बातचीत शुरू करने के लिए संपर्क किया.

नेतन्याहू ने कहा, “हम दो शर्तें चाहते हैं. हिज़्बुल्लाह को निःशस्त्र किया जाए और आने वाली पीढ़ियों तक टिकाऊ वास्तविक शांति समझौता हो.”

दोनों देशों के अमेरिका में राजदूत अगले हफ्ते वॉशिंगटन में मिलने पर सहमत हुए हैं, जहां संघर्ष विराम की घोषणा की कोशिश होगी.

हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के ख़िलाफ़ अभियान अभी ख़त्म नहीं हुआ है, “हम अभी भी उनसे लड़ रहे हैं. अभी और काम बाकी है.”

उन्होंने कहा कि ईरान में अभी भी संवर्धित सामग्री (यूरेनियम) मौजूद है, जिसे हटाना ज़रूरी है.

आधी सदी बाद अमेरिका-ईरान की आमने-सामने बातचीत

इस्लामाबाद में बीबीसी की मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता लीज़ डूसेट के मुताबिक़, क़रीब 50 साल की दुश्मनी और दो युद्धों के बाद अमेरिका और ईरान आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हैं.

यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो दोनों पक्षों के उच्च स्तर के प्रतिनिधित्व और बातचीत की इच्छा के कारण संभव हुआ है.

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय इस्लामाबाद पहुंचा जब उसने कूटनीति पर गहरा अविश्वास जताया था. पिछले साल और इस साल अमेरिका के साथ उसकी बातचीत जंग की वजह से टूट गई थी.

इसी कारण ईरान ने वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी, खासकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत की शर्त रखी थी. इस बातचीत में वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं.

साल 2015 में जब ईरान और विश्व शक्तियों के बीच परमाणु समझौता हुआ था, तब इसमें 18 महीने लगे थे.

ट्रंप तेज़ नतीजों को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं.

यह सिर्फ शुरुआत है, लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण हालात में यह शुरुआत भी अहम मानी जा रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS