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अमेरिका और ईरान के बीच 6 हफ्ते से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। सीजफायर खत्म होने से पहले इस्लामाबाद या जिनेवा में बातचीत संभव है। ट्रंप ने भी समझौते के संकेत दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें।
अमेरिका और ईरान जल्द ही दूसरे दौर की कूटनीतिक वार्ता शुरू कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच पिछले छह हफ्तों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दो अमेरिकी अधिकारियों और घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के अनुसार, दोनों देश अगले सप्ताह मौजूदा युद्धविराम के समाप्त होने से पहले एक समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे आमने-सामने बैठकर नई बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) के सूत्रों के अनुसार, वार्ता के नए दौर को लेकर अभी चर्चा चल ही रही है। वहीं मध्यस्थता करने वाले देशों में से एक के राजनयिक ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि तेहरान और वाशिंगटन बातचीत के लिए पूरी तरह सहमत हो गए हैं। इन सभी चारों सूत्रों ने कूटनीतिक संवेदनशीलता के कारण नाम न छापने की शर्त पर एपी को यह जानकारी दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार की वार्ता में भी पिछली बार के स्तर के ही उच्च अधिकारी या प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे या नहीं।
कहां और कब हो सकती है वार्ता?
राजनयिक और अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वार्ता की मेजबानी के लिए एक बार फिर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के नाम पर चर्चा हो रही है। इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों ने जिनेवा (स्विट्जरलैंड) को भी एक संभावित विकल्प बताया है। हालांकि, अभी तक स्थान और समय को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि यह वार्ता गुरुवार को हो सकती है।
ट्रंप का बयान और वाइट हाउस की प्रतिक्रिया
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं से बातचीत में इस ओर इशारा करते हुए कहा था कि ‘दूसरे पक्ष ने हमसे संपर्क किया है। वे एक समझौता करना चाहते हैं।’ दूसरी ओर, इस पूरे मामले और संभावित नई वार्ता पर टिप्पणी के लिए जब वाइट हाउस से संपर्क किया गया, तो उनकी तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला।
अमेरिका-ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द संभव: पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच अगले दौर की बातचीत जल्द ही होने की उम्मीद है। शनिवार को दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत 1979 के बाद अपनी तरह की पहली वार्ता थी, जिसमें दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि, वीकेंड पर पाकिस्तान में हुई इस लंबी बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष युद्ध को खत्म करने के लिए किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुंचने में विफल रहे।
सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे प्रयास
सोमवार को संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि वार्ता के बाद एक तरह के ‘संतोष की भावना’ है, क्योंकि अब तक कोई नकारात्मक घटनाक्रम सामने नहीं आया है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, जब आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान इस क्षेत्र के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया कि अंतिम फैसले अल्लाह के हाथ में हैं।
अमेरिका का रुख: वार्ता क्यों विफल रही?
इस्लामाबाद में हुई इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था। वेंस ने कहा कि ईरानी पक्ष ने युद्ध समाप्त करने की वाशिंगटन की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, जबकि अमेरिका ने अपनी तरफ से अंतिम और सबसे बेहतरीन पेशकश सामने रखी थी। वार्ता विफल होने के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत इसलिए विफल रही क्योंकि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
युद्ध का बैकग्राउंड और पाकिस्तान की भूमिका
दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में पाकिस्तान ने कूटनीतिक पहल का नेतृत्व किया है। यह इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उस अपील के बाद संभव हो सका, जिसके चलते युद्ध में अस्थायी विराम लगा था। गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप पड़ गया है।
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