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इधर ईरान में उलझी दुनिया, उधर रूस ने कर दिया कांड; यूरोप की पाइपलाइनों पर निशाना

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान युद्ध में उलझी दुनिया के लिए रूस ने बड़ा सरप्राइज प्लान कर लिया था। ब्रिटिश आर्मी के मुताबिक उन्होंने एक महीने की लगातार निगरानी के  बाद रूस के एक बड़े हमले को रोक दिया है। इस हमले में रूस समुद्र में मौजूद इंटरनेट केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बना रहा था।

Russia Ukraine War: पूरी दुनिया का ध्यान इस वक्त पश्चिम एशिया में जारी जंग पर लगा हुआ है। ऐसे में रूस की तरफ से यूरोप में एक बड़ा ऐक्शन लिया गया है। ब्रिटेन ने दावा किया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के भीतर मौजूद केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की है, जिसे उन्होंने नार्वे के साथ मिलकर महीने भर के सैन्य अभियान के जरिए नाकाम कर दिया है। अभी तक ब्रिटेन के इन दावों को लेकर क्रेमलिन की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हैली ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि रूस की तरफ से इस ‘दुर्भावनापूर्ण गतिविधि’ की कोशिश काफी पहले से की जा रही थी। उन्होंने बताया, “यह अभियान दो महीने से भी ज्यादा समय से चल रहा था। इसमें एक फ्रिगेट, विमान और सैकड़ों सैन्यकर्मी, रूसी अटैक सबमरीन और दो जासूसी पनडुब्बियां भी शामिल थीं। लेकिन, जब ब्रिटिश और सहयोगी सेना ने उनका प्रतिरोध किया, तो वह पीछे हट गए।”

किसी भी हरकत के गंभीर परिणाम होंगे: ब्रिटेन

ब्रिटिश रक्षा सचिव ने रूस के इस अभियान को लेकर मॉस्को को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “हम समुद्र में पाइपलाइनों और केबलों के निकट आपकी गतिविधियों को देख रहे हैं। अगर इन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे।”

हीली ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुतिन चाहते हैं कि दुनिया का ध्यान रूस और यूक्रेन युद्ध से हटकर पश्चिम एशिया की तरफ हो जाए। लेकिन ब्रिटेन ऐसा नहीं होने देगा। लंदन आज भी रूस को ही सबसे बड़ा खतरा मानता है। उन्होंने कहा, “हम पुतिन के ऊपर से अपनी नजर को नहीं हटाएंगे।”

रूस से सीधा टकराव नहीं: ब्रिटेन

हीली ने बताया कि ब्रिटेन इस क्षेत्र में लगातार रूस की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। इस अभियान के दौरान भी रॉयल नेवी ने सीधे टकराव के बजाय निगरानी औऱ गोपनीयता भंग करने के सिद्धांत को अपनाया। हीली ने कहा, “हमने उनकी गोपनीयता को पूरी तरह से भंग कर दिया। हमने उन्हें बताया कि वह खुले समुद्र में हमारे निशाने पर हैं। गोपनीयता भंग होने के बाद उन्होंने अपने मिशन को भी छोड़ दिया और पीछे हट गए।”

उन्होंने कहा, “एक महीने तक निगरानी रखने के बाद जैसे ही हमने उन्हें काउंटर किया, वैसे ही वह हमारे जलक्षेत्र से निकलकर रूस की और लौट गईं। हमारी केवल्स और पाइपलाइन पूरी तरह से सुरक्षित हैं, उन्हें कोई भी नुकसान नहीं हुआ है।” बकौल हीली, रूसी नौसेना जिस केवल और पाइपलाइन को निशाना बना रही थी, वह दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन्हीं केवल्स के जरिए दुनिया का 99 फीसदी डेटा ट्रैफिक गुजरता है। इसके अलावा यूरोप के लिए यह पाइपलाइन भी बहुत महत्वपूर्ण है।

बता दें, रूस की तरफ से ब्रिटेन के करीब आने की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब ट्रंप नाटो को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रहे हैं। ईरान के खिलाफ युद्ध में नाटो देशों के साथ न आने को लेकर भी ट्रंप ने उन्हें कायर तक करार दे दिया था। इससे पहले भी ट्रंप इन यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए कह चुके हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN