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इजरायल-अमेरिका के सामने ईरान की 4 शर्तें, रूस को ‘थैंक्स’ कहने की वजह क्या?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस में ईरानी राजदूत काजेम जलाली ने बड़ा बयान दिया है। बुधवार को उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए तेहरान, अमेरिका और इजरायल के सामने चार प्रमुख मांगें रखता है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस में ईरानी राजदूत काजेम जलाली ने बड़ा बयान दिया है। बुधवार को उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए तेहरान, अमेरिका और इजरायल के सामने चार प्रमुख मांगें रखता है। इस दौरान राजदूत जलाली ने संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों के लिए रूस और अन्य देशों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मध्यस्थों की भूमिका और प्रयासों की हम सराहना करते हैं, लेकिन हमारा मानना है कि शांति उनकी मांगों के पूर्ण पालन पर ही निर्भर करती है।

रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS से बात करते हुए जलाली ने ईरान की चार मांगों के बारे में जानकरी दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि इसके बिना युद्ध खत्म होने की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। जलाली के अनुसार…

  • आक्रामकता और आतंकवादी कृत्यों का अंतिम एवं पूर्ण रूप से खात्मा
  • आक्रामकता और युद्ध की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस एवं विश्वसनीय गारंटी प्रदान करना
  • भौतिक एवं नैतिक क्षति के लिए पूर्ण मुआवजा
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा की रक्षा के लिए होर्मुज में ईरान के कानूनी अधिकार क्षेत्र का सम्मान

उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा कायम करने के किसी भी रचनात्मक एवं ईमानदार प्रयास का स्वागत करता है। हालांकि, किसी भी पहल या प्रस्तावित योजना में जमीनी हकीकतों तथा इन कानूनी और राजनीतिक शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी है। जलाली ने जोर देकर कहा कि ईरान आत्मरक्षा का अपना अंतर्निहित अधिकार तब तक इस्तेमाल करता रहेगा, जब तक खतरे का स्रोत पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी बताया कि रूस समेत अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ तेहरान हमेशा विचारों का आदान-प्रदान और समन्वय करता रहता है।

जलाली का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी (SVR) के प्रमुख सर्गेई नारिशकिन ने कहा कि उनकी एजेंसी ईरान संबंधी स्थिति पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के संपर्क में है। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, एक अप्रैल को दिए गए बयान में नारिशकिन ने इस बात की पुष्टि की।

बता दें कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे प्रमुख मुस्लिम देश मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान युद्ध को रोकने के लिए ‘बिचौलिये’ के तौर पर काम कर रहे हैं, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान शामिल है। हालांकि, अभी तक इन प्रयासों से कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN