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अभी और क्रैश होगा शेयर बाजार? 19000 अंक के नीचे तक जा सकता है निफ्टी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स ने अपने ऑल टाइम हाई से 12000 अंकों की गिरावट देखी है तो निफ्टी भी बुरी तरह बिखर चुका है। इस माहौल के बीच अब वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने जो चेतावनी दी है, उससे निवेशकों की टेंशन बढ़ सकती है।

ईरान की इजराइल और अमेरिका से जंग ने दुनियाभर के शेयर बाजार को रेंगने पर मजबूर कर दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार भी अछूता नहीं है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स ने अपने ऑल टाइम हाई से 12000 अंकों की गिरावट देखी है तो निफ्टी भी बुरी तरह बिखर चुका है। इस माहौल के बीच अब वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने जो चेतावनी दी है, उससे निवेशकों की टेंशन बढ़ सकती है।

क्या कहा ब्रोकरेज ने?

बर्नस्टीन ने कहा कि भले ही ईरान से जुड़ा मौजूदा युद्ध जल्द खत्म हो जाए लेकिन इसके असर भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरे और दूरगामी हो सकते हैं। ब्रोकरेज के अनुसार यह संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो यह भारत के लिए 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (GFC) जैसा झटका बन सकता है। ऐसी स्थिति में ना सिर्फ भारत की आर्थिक वृद्धि दर में बड़ी गिरावट आ सकती है बल्कि शेयर बाजार भी क्रैश हो सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक आर्थिक वृद्धि दर करीब 5% या उससे नीचे आ जाए तो हैरानी नहीं होगी। ब्रोकरेज के मुताबिक महंगाई 10% के आसपास पहुंचने का खतरा रहेगा। बर्नस्टीन ने यह भी चेताया कि हालात ऐसे रहे तो रुपया, डॉलर के मुकाबले 110 के पार जा सकता है। शेयर बाजार को लेकर ब्रोकरेज ने कहा कि निफ्टी का साल के अंत का टारगेट घटाकर 26000 कर दिया है, जो पहले 28100 था। ब्रोकरेज के मुताबिक सबसे खराब स्थिति में निफ्टी 20000 अंक से नीचे आ सकता है। गिरावट ऐसी भी हो सकती है कि निफ्टी 19000 अंक से नीचे आ जाए।

महंगाई है सबसे बड़ा खतरा

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक महंगाई बड़ा खतरा है। पिछले कुछ समय से भारत में महंगाई नियंत्रित थी, खासकर खाद्य महंगाई में गिरावट देखी गई। लेकिन अब ऊंचे क्रूड के कारण परिवहन, ईंधन और अन्य क्षेत्रों में कीमतें बढ़ सकती हैं इसके साथ ही मौसम भी जोखिम बढ़ा रहा है। इस साल बारिश कम हो सकती है और खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं। इन कारकों के चलते महंगाई RBI के 6% के दायरे को पार कर सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि चालू खाता अब दोस्त से दुश्मन बनता जा रहा है। बर्नस्टीन का कहना है कि भारत ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में मजबूत सेवा निर्यात और रेमिटेंस की बदौलत चौथी तिमाही में सरप्लस दर्ज किया था लेकिन अब उसे दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ तो कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण आयात बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ रहा है और दूसरी तरफ मध्य-पूर्व में चल रही उथल-पुथल के कारण खाड़ी देशों से आने वाला रेमिटेंस कम हो गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN