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अब ईरानी पाताल लोक में मचेगी तबाही? पहली बार UK से बंकर-बस्टर बम गिराने की तैयारी; B‑1B लांसर तैनात

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Source :- LIVE HINDUSTAN

B-1B लांसर लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला भारी बमवर्षक विमान है, जो बड़ी मात्रा में पारंपरिक बम ले जा सकता है। यदि इन्हें बंकर-बस्टर हथियारों से लैस किया जाता है तो वे भूमिगत सैन्य ठिकानों और मिसाइल भंडार जैसे कठिन लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की अमेरिका को धमकी देने के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज कर दिया है। इसके तहत पहली बार अमेरिका ब्रिटिश एयरबेस का इस्तेमाल कर ईरान पर हमले करने की तैयारी में है। इसके लिए अमेरिका ने तीन B‑1B लांसर बमवर्षक विमान ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर रेडी टू मूव तैनात कर रखा है। माना जा रहा है कि यह ब्रिटिश ठिकाने से ईरान पर अमेरिकी हमलों का पहला बड़ा मिशन हो सकता है। B-1B लांसर एक लंबी दूरी का स्ट्रेटेजिक बॉम्बर है जो बड़े पारंपरिक पेलोड ले जाने में सक्षम है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार एयरबेस पर ग्राउंड क्रू को JDAM (Joint Direct Attack Munition) किट से लैस बंकर-बस्टर बमों को विमान में लोड करते हुए देखा गया। ये किट सामान्य बमों को GPS-निर्देशित सटीक हथियार में बदल देती हैं। इन किट्स को 500 पाउंड के Mk-82, 1,000 पाउंड के Mk-83 और 2,000 पाउंड के Mk-84 बमों पर लगाया जा सकता है। इन्हें BLU-109 जैसे पेनिट्रेटर बमों पर भी लगाया जा सकता है, जो भूमिगत या मजबूत सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं।

बंकर-बस्टर क्या है?

बंकर-बस्टर (Bunker Buster) बम विशेष रूप से जमीन के बहुत नीचे दबे सैन्य ठिकानों, कंक्रीट बंकरों और सुरंगों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए उच्च-क्षमता वाले हथियार हैं। इनमें कठोर स्टील का आवरण होता है जो फटने से पहले भूमिगत गहराई में पैठ बनाता है। ये बम कंक्रीट या चट्टान की कई परतों को भेदने में सक्षम होते हैं। अमेरिकी GBU-57 MOP (मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर) लगभग 200 फीट (60 मीटर) से अधिक गहराई तक जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार B-1B लांसर लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला भारी बमवर्षक विमान है, जो बड़ी मात्रा में पारंपरिक बम ले जा सकता है। यदि इन्हें बंकर-बस्टर हथियारों से लैस किया जाता है तो वे भूमिगत सैन्य ठिकानों और मिसाइल भंडार जैसे कठिन लक्ष्यों को भी निशाना बना सकते हैं। इससे साफ है कि अमेरिका की तैयारी अब ईरान के पाताल लोक में भी तबाही मचाने की है।

ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल

इस बीच, इस जंग में अब ब्रिटेन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जब ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने हमले शुरू किए थे, तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने कहा था कि ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग सीधे हमलों के लिए नहीं करने देंगे। हालांकि 1 मार्च को रुख बदलते हुए लंदन ने अमेरिकी अनुरोध को मंजूरी दे दी, यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य “रक्षा के लिए स्रोत पर ही मिसाइलों को नष्ट करना” है। यह फैसला तब लिया गया जब साइप्रस में एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ था।

मध्य-पूर्व में बढ़ी सैन्य गतिविधि

युद्ध शुरू होने के बाद ब्रिटेन ने पूर्वी भूमध्यसागर में अतिरिक्त सैन्य संसाधन भी तैनात किए हैं और ईरानी मिसाइल व ड्रोन हमलों को रोकने के लिए सहयोगी देशों के साथ ऑपरेशन चला रहा है। हालांकि ब्रिटेन में इस युद्ध को लेकर जनता में समर्थन सीमित है। YouGov के एक सर्वे के अनुसार केवल 10% लोगों ने ही ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जोरदार समर्थन किया है, जबकि 37% ने इसका कड़ा विरोध जताया है। एक अन्य सर्वे में 61% लोगों ने कहा कि ईरान पर हमले के पीछे अमेरिका के कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN