Source :- LIVE HINDUSTAN
Tips to stay calm around people who provoke you : ऐसे लोगों के आसपास शांत रहना आसान नहीं होता। लेकिन सच यह है कि शांत रहना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी असल ताकत है। आइए जानते हैं जब कोई भड़काने की कोशिश करें, तो कौन से 6 तरीके आपका ‘सुकून’ बचाए रखने में आपकी मदद कर सकते हैं।
Tips to stay calm around people who provoke you : जब कोई आपको जानबूझकर उकसाता है, तो वह असल में आपके दिमागी सुकून का रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा होता है। ऐसे पल में किसी भी व्यक्ति को गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन इस समय जो व्यक्ति चुप्पी या अपना संयम बनाए रखता है, वह किसी कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति होती है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि उकसावे के बीच शांत रहना एक ‘सुपरपावर’ की तरह काम करता है, जो न केवल विवाद को खत्म करता है बल्कि सामने वाले के इरादों को भी पूरी तरह पस्त कर देता है।
गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनैत कहती हैं कि हर किसी व्यक्ति की जिंदगी में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो उन्हें जानबूझकर या अनजाने में उकसाते रहते हैं। वे ताने मारते हैं, चुभती हुई बातें कहते हैं, आपकी कमजोरी पकड़ लेते हैं या बार-बार वही मुद्दा उठाते हैं, जो आपको परेशान करता है। ऐसे लोगों के आसपास शांत रहना आसान नहीं होता। दिल तेज धड़कने लगता है, गुस्सा आता है और तुरंत जवाब देने का मन करता है। लेकिन सच यह है कि शांत रहना कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी असल ताकत है। आइए जानते हैं जब कोई भड़काने की कोशिश करें, तो कौन से 6 तरीके आपका ‘सुकून’ बचाए रखने में आपकी मदद कर सकते हैं।
जब कोई आपको उकसाए, तब शांत रहने के लिए अपनाएं ये 6 तरीके
तुरंत रिएक्ट करने की जगह रुकना सीखें : उकसाने वाली बात सुनते ही दिमाग अलर्ट हो जाता है। शरीर लड़ने या जवाब देने के लिए तैयार हो जाता है। ऐसे समय सबसे पहले जरूरी है रुकना। गहरी सांस लेना, कुछ सेकंड चुप रहना, नजरें थोड़ा हटाना, ये छोटे कदम शरीर को संकेत देते हैं कि अभी खतरा नहीं है। हर बात का तुरंत जवाब देना जरूरी नहीं होता। कई बार चुप रहना ही सबसे मजबूत जवाब होता है।
समझें कि उकसाना अक्सर सामने वाले की कहानी है : जो लोग बार-बार उकसाते हैं, वे अक्सर अपने अंदर की निराशा, असुरक्षा या गुस्से को बाहर निकाल रहे होते हैं। उनका व्यवहार आपके बारे में कम और उनके बारे में ज्यादा बताता है। जब यह समझ आ जाती है, तो बातों का असर थोड़ा कम हो जाता है। हर टिप्पणी को व्यक्तिगत हमला मानना जरूरी नहीं है।
अपनी ट्रिगर पहचानें : हर व्यक्ति की कुछ खास बातें होती हैं, जिनसे वह जल्दी भड़क जाता है। शायद कोई आपकी क्षमता पर सवाल उठाए, या आपकी तुलना करें, या आपके अतीत की बात छेड़े। अगर आप अपने ट्रिगर पहचान लेंगे, तो आप पहले से तैयार रहेंगे। जब आपको पहले से ही पता होगा कि कौन सी बात आपको परेशान करती है, तो उस पर रिएक्ट करने से पहले खुद को संभालना आसान होगा।
सीमाएं तय करना सीखें : शांत रहना का मतलब सब सहना नहीं है। अगर कोई बार-बार सीमा पार कर रहा है, तो साफ शब्दों में कहना जरूरी है कि यह ठीक नहीं है। ‘मुझे इस तरह की बात पसंद नहीं’ या ‘इस विषय पर बात न करें’ जैसे वाक्य बहुत प्रभावी हो सकते हैं। सम्मानजनक तरीके से सीमा तय करना आपको अंदर से मजबूत बनाता है।
हर बहस जीतना जरूरी नहीं : कई बार उकसाने वाले लोग चाहते हैं कि आप रिएक्ट करें, ताकि बहस शुरू हो सके। अगर आप हर बार खुद को साबित करने लगेंगे, तो आप उनकी ऊर्जा में फंस जाएंगे। यह समझना जरूरी है कि हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं। कुछ बातों को छोड़ देना, खुद को बचाना होता है।
बाद में खुद को संभालें : अगर किसी ने आपको परेशान किया है, तो बाद में खुद को समय दें। अपने भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, टहल लें या लिख लें कि आपको कैसा लगा। भावनाओं को दबाने से वे जमा होती हैं। उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना भी शांत रहने का हिस्सा है।
सलाह- उकसाने वाले लोग हर जगह मिलेंगे। लेकिन हर बार गुस्से से जवाब देना जरूरी नहीं है। शांत रहने का मतलब यह नहीं कि आपको फर्क नहीं पड़ता। इसका मतलब यह है कि आप अपनी प्रतिक्रिया को चुन रहे हैं और यही चुनाव आपकी असली ताकत है। जब आप तय करते हैं कि सामने वाला आपके मन की शांति नहीं छीन सकता, तभी आप सच में अपने ऊपर नियंत्रण पाते हैं।
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