Source :- LIVE HINDUSTAN
Must Visit Weird Temple In Rajasthan: नवरात्रि पर्व में लोग देवी दर्शन के लिए दूर-दूर के मंदिरों में जाते हैं। वैसे तो देशभर में कई मंदिर है जहां पर भक्तों की अटूट आस्था है। वहीं राजस्थान में भी कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां की अनोखी मान्यताएं इन मंदिरों को बाकियों से खास बनाती हैं।
राजस्थान में कई मंदिर बहुत प्राचीन समय से हैं। इन मंदिरों में मौजूद देवी-देवताओं पर लोगों की अटूट श्रद्धा और भक्ति हैं। साथ ही इन मंदिरों के बारे में कई सारी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। जिन्हें सुनकर दूर-दूर से लोग इन मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वैसे तो राजस्थान के कई मंदिर बहुत ही पुराने और भव्य हैं। जिनकी बनावट और मूर्तियां बेहद खास हैं लेकिन 5 ऐसे मंदिर जिनके ऊपर भक्तों का अटूट विश्वास है।
मेहंदीपुर बाला जी का मंदिर
राजस्थान के दौसा जिले में बनी मेंहदीपुर घाटी में हनुमान जी की बाल रुप में पूजा होती है और बाला जी नाम से लोग जानते हैं। इस मंदिर में लोग भूत-प्रेत और नकारात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर में लोगों की अटूट आस्था है और कई बार यहां आने पर बहुत विचलित कर देने वाले दृश्य भी नजर आ जाते हैं।
ब्रह्मा जी का मंदिर
राजस्थान के पुष्कर जिले में एकमात्र मंदिर है जो ब्रह्मा जी को समर्पित है। इस मंदिर को 14वीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस मंदिर को देखने दूर-दूर से टूरिस्ट आते है।
बजरंग गढ़ मंदिर
राजस्थान के अजमेर में बना ये मंदिर अपने अनोखे पुजारी के लिए फेमस है। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति है और इसकी पूजा एक बंदर करता है। ये बंदर बकायदा सुबह मंदिर में पूजा के साथ ही आरती के वक्त घंटी बजाता है। माथे पर तिलक लगाता है और भक्तों को आशीर्वाद भी देता है।
करणी माता मंदिर
राजस्थान का करणी माता का मंदिर चूहों की वजह से फेमस है। इन मंदिरों में मौजूद चूहों पर लोगों की अटूट आस्था है और लोग इन चूहों का जूठा प्रसाद खाते हैं।
इडाणा माता का मंदिर
राजस्थान के बाकी मंदिरों की तरह ये मंदिर भी बेहद अद्भुत है। उदयपुर जिले से लगभग 60 किमी दूर बंबोरा में शक्तिपीठ है। जहां पर देवी मां की मूर्ति अग्नि स्नान करती है। इस मंदिर में दो से तीन महीने के अंतर पर मूर्ति में खुद से आग लग जाती है और सारा शृंगार जल जाता है लेकिन मूर्ति पूरी तरह से सेफ रहती है। इस साल पूरे 11 महीने बाद एक बार फिर जनवरी महीने में मूर्ति में खुद से अग्नि प्रज्वलित हुई। मान्यता है कि जब भक्तों के चढ़ाए चुनरी और पोशाक ज्यादा हो जाते हैं तो माता खुद से ही इस भार को अग्नि स्नान के साथ भस्म कर देती हैं।
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