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US में पाकिस्तान की भारी फजीहत, शहबाज ने ट्रंप को गार्ड के स्टाइल में किया सैल्यूट- VIDEO

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Source :- LIVE HINDUSTAN

शरीफ ने दावा किया कि ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की है। यह एक ऐसा दावा है जिसे भारतीय अधिकारियों ने तुरंत और कड़ाई से खारिज कर दिया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए इस सप्ताह अमेरिका यात्रा किसी कूटनीतिक उपलब्धि के बजाय सार्वजनिक शर्मिंदगी का सबब बन गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में शहबाज शरीफ के व्यवहार और वहां के घटनाक्रमों ने सोशल मीडिया पर मीम्स और आलोचनाओं की बाढ़ ला दी है। इस पूरी यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा उस वीडियो की हो रही है जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति ट्रंप को एक अजीबोगरीब ‘गार्ड-स्टाइल’ में सैल्यूट करते नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो के वायरल होते ही नेटिजन्स ने इसे पाकिस्तान की संप्रभुता और कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। आलोचकों का कहना है कि एक देश के प्रधानमंत्री का दूसरे राष्ट्र के प्रमुख के सामने इस तरह झुकना दोनों देशों के बीच असंतुलित शक्ति संबंधों को दर्शाता है।

ग्रुप फोटो में भी ‘हाशिए’ पर दिखे शहबाज

बैठक के दौरान केवल व्यवहार ही नहीं, बल्कि तस्वीरों ने भी पाकिस्तान की वैश्विक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। विश्व नेताओं के आधिकारिक ग्रुप फोटो में जहां डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ केंद्र में खड़े थे, वहीं शहबाज शरीफ को बिल्कुल किनारे पर जगह मिली। कूटनीतिक जानकारों ने इसे इस्लामाबाद के प्रतीकात्मक हाशिए पर जाने के रूप में देखा है।

ट्रंप ने शहबाज को खड़ा करवाया

एक अन्य असहज क्षण तब आया जब भाषण के बीच में ही ट्रंप ने शहबाज शरीफ की ओर इशारा करते हुए उन्हें खड़े होने का निर्देश दिया। इस दृश्य ने विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स को मौका दे दिया, जिन्होंने शरीफ को “ट्रंप की कठपुतली” तक कह डाला। हालांकि ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, “मुझे यह शख्स पसंद है।” इस मौखिक दिलासा के बावजूद कूटनीतिक संदेश कुछ और ही कहानी बयां कर रहा था।

जब शहबाज शरीफ को बोलने का मौका मिला तो उन्होंने ट्रंप की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने ट्रंप को शांति का दूत और दक्षिण एशिया का रक्षक करार दिया। शरीफ ने दावा किया कि ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की है। यह एक ऐसा दावा है जिसे भारतीय अधिकारियों ने तुरंत और कड़ाई से खारिज कर दिया।

शहबाज शरीफ की इस यात्रा ने पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं का कहना है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से पहले संसद या अन्य दलों से कोई सलाह नहीं ली गई। सरकार पर आरोप है कि उसने फिलिस्तीन और इजरायल के प्रति पाकिस्तान की पारंपरिक विदेश नीति के साथ समझौता किया है।

40 से अधिक देशों के इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य युद्धग्रस्त गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के प्रयासों को एकजुट करना था। पाकिस्तान को इस बैठक में औपचारिक रूप से आमंत्रित तो किया गया, लेकिन उसे उन देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया जो गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल में योगदान देंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN