Source :- LIVE HINDUSTAN
Stock Market Crash: 27 फरवरी से 19 मार्च तक सेंसेक्स करीब 7,080 अंक टूटकर 81,287 से 74,207 तक आ गया है। वहीं निफ्टी में भी करीब 2,176 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और बाजार में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब भारतीय शेयर मार्केट पर पूरी तरह दिखने लगा है। लगातार बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल के कारण बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है। बीते कुछ हफ्तों में निवेशकों को जबरदस्त नुकसान हुआ है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।
27 फरवरी से 19 मार्च तक सेंसेक्स करीब 7,080 अंक टूटकर 81,287 से 74,207 तक आ गया है। वहीं निफ्टी में भी करीब 2,176 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है और बाजार में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
₹37 लाख करोड़ का भारी नुकसान
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा है। कुल मिलाकर करीब ₹37 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। सिर्फ गुरुवार को ही करीब ₹12.87 लाख करोड़ डूब गए। यह गिरावट पिछले दो सालों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट में से एक मानी जा रही है।
कच्चा तेल बना सबसे बड़ा कारण
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल बाजार गिरावट की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है। तेल 110–120 डॉलर के करीब है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। कंपनियों की लागत में इजाफा हो रहा है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बिकवाली बढ़ गई।
वैश्विक बाजारों में भी हाहाकार
मिडिल ईस्ट तनाव का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका और यूरोप के बाजारों में गिरावट हो रही है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की जा रही है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।
फेड और केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5%–3.75% पर स्थिर रखा है और साफ किया है कि महंगाई घटने तक दरों में कटौती नहीं होगी। बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने भी दरें स्थिर रखीं। इससे बाजार में लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ी है।
20 दिनों में 9% तक लुढ़का बाजार
पिछले 20 दिनों में सेंसेक्स करीब 8.71% गिरा। जबकि, निफ्टी करीब 8.65% टूटा। ब्रोकरेज फर्म नोमूरा का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो FY27 के लिए कंपनियों की कमाई में 10–15% तक गिरावट आ सकती है।
फैक्ट्स एंड फिगर
- यह 2026 की सबसे खराब शुरुआतों में शामिल।
- इस साल बाजार की शुरुआत भी बेहद कमजोर रही है।
- 1 जनवरी से 16 मार्च तक सेंसेक्स 11.4% गिरा
- पिछले 47 वर्षों में पांचवीं सबसे खराब शुरुआत
- इससे पहले 2020 (कोरोना) और 2008 (ग्लोबल क्राइसिस) में इससे बड़ी गिरावट देखी गई थी।
युद्ध, महंगा तेल और सख्त मौद्रिक नीतियों के चलते शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करने का है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



