Source :- LIVE HINDUSTAN
Quotes Of The Day: लाइफ में आगे बढ़ने और पॉजिटिविटी लाने के लिए अच्छे कामों के साथ ही अच्छी सोच की भी जरूरत होती है। और, ये अच्छी सोच, लाइफ में पॉजिटिविटी रामचरित मानस में लिखी लाइनों से भी मिल सकती है।
लाइफ में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मकता बेहद जरूरी है। और, ये पॉजिटिविटी कई बार हमारी सोच और आराध्य के साथ जुड़ी होती है। जब हम ईश्वर को कर्ता मानकर उसके बताए रास्तों पर चलने का फैसला करते हैं तो कई मुश्किलों का हल आसानी से मिल जाता है। तुलसीदास की रामचरित मानस में केवल राम-सीता का संघर्ष नहीं बल्कि जीवन का सार लिखा है। इन चौपाई और उनके अर्थ आपको लाइफ में आ रही मुश्किलों से लड़ने, पॉजिटिव रास्ता दिखाने और आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
- करम प्रधान बिस्व करि राघा
जो जस करइ सो तसु फलु चाखा
अर्थात, भगवान ने संसास में कर्म को प्रधान यानी मेन बनाया है। जो व्यक्ति इस संसार में जैसा कर्म करता है वह धरती पर वैसा ही फल भोगता है।
2) परहित बस जिन्ह करि उर दंगा,
ते नर पावहिं मोक्ष अभंगा।
अर्थात, जो भी व्यक्ति अपने जीवन को दूसरों के भलाई में लगाता है, वो मनुष्य अमरता और श्रेष्ठ फलों को पाता है।
3) जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि,
बंदउ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।
अर्थात, इस जगत की हर वस्तु और हर जीव में भगवान ही विराजमान होते हैं। इसलिए मनुष्य अर्थात मैं को सभी से विनम्रतापूर्वक सम्मान और प्रणाम करना चाहिए।
4) सूर समर करनी करहिं कहीं न जनावहीं आपु,
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु
अर्थात, बहादुर लोग मुश्किल वक्त में काम करते हैं लेकिन अपनी महानता का ढिंढोरा नहीं पीटते लेकिन जो लोग कायर या डरपोक होते हैं वो सिर्फ बहादुरी और महानता की बातें करते हैं।
5) धूम कुसंगति कारिख होई, लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई
अर्थात, बुरे लोगों का साथ इंसान को खराब कर देता है जैसे धुआं हर चीज को काला कर देता है।
6) सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहुँ मुनिनाथ।
हानि, लाभ, जीवन, मरण,यश, अपयश विधि हाँथ।
अर्थात, इस चौपाई का अर्थ बताया गया है कि मुनिनाथ ने दुःखी होकर यानि बिलखकर कहा कि हे भरत! सुनो, भविष्य में होने वाला बड़ा बलवान है। जीवन में होने वाले सभी हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं। भले ही लाभ हानि जीवन, मरण ईश्वर के हाथ हो लेकिन इन दुखों और नुकसान के बाद हमें हार मानकर बैठना नहीं चाहिए। यहीं एक चीज हैं जो मनुष्य के यानि हमारे ही हाथ में होती है, जिसे लोग ‘कर्म’ बोलते हैं अर्थात हमें हमेशा अपना अच्छा कर्म करना चाहिए।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN



