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Quote of the Day: विदुर नीति में छिपा है हर समस्या का समाधान, पढ़ें 10 जीवन बदलने वाले विचार!

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Source :- LIVE HINDUSTAN

महात्मा विदुर के दिए गए अमूल्य उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितना महाभारत काल में हुआ करते थे। तो चलिए दिन की शुरुआत महात्मा विदुर के कुछ अमूल्य विचारों के साथ करते हैं, जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन जरूर ले कर आएंगे।

हमारे इतिहास में ऐसे कई महात्मा हुए जिनकी बातें आज भी इतनी ही प्रभावशाली हैं कि जब-जब लोगों को सही रास्ता चुनने में मुश्किल होती है, तो वे इन्हीं उपदेशों की ओर देखते हैं। ऐसे ही एक विद्वान हुए महात्मा विदुर जिनके उपदेशों को ‘विदुर नीति’ कहा जाता है। ये महाभारत काल के सबसे बुद्धिमान और महत्वपूर्ण पात्रों में से एक रहे। उनके दिए गए अमूल्य उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितना महाभारत काल में हुआ करते थे। जीवन जीने का सूत्र क्या है, मानव का परम धर्म क्या है, जीवन को बेहतर और सफल कैसे बनाया जाए; जैसे तमाम विषयों पर उनकी राय आज भी लोगों का जीवन बदलने की ताकत रखती है। तो चलिए दिन की शुरुआत महात्मा विदुर के कुछ अमूल्य विचारों के साथ करते हैं, जो आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन जरूर ले कर आएंगे।

महात्मा विदुर के अमूल्य विचार हैं जीवन जीने का सूत्र

1) जो लोग दूसरों की बातें ध्यान से सुनते हैं, सोच समझकर काम करते हैं, बिना पूछे दूसरों के विषय में बात नहीं करते हैं और कोई चीज खो जाए तो उसका शोक नहीं करते हैं, वे हमेशा सुखी और शांत रहते हैं।

2) जो लोग शत्रु को मित्र बनाते हैं और मित्रों को दुख पहुंचाते हैं, हमेशा गलत काम करते हैं, ऐसे लोग मूर्ख कहलाते हैं। ये लोग जीवन में कभी भी सुख प्राप्त नहीं करते।

3) घमंड एक ऐसी बुराई है जो हमारे सभी गुणों का महत्व खत्म कर देती है। अगर कोई व्यक्ति धनी और ज्ञानी होने के बाद भी घमंड नहीं करता है तो वह हमेशा शांत रहता है।

4) जो लोग सफलता और मान सम्मान चाहते हैं, उन्हें नींद, डर, क्रोध, आलस्य और दीर्घ सूत्रता, इन बुराइयों को छोड़ देना चाहिए। दीर्घ सूत्रता यानी जो काम जल्दी हो सकते हैं, उनमें भी देरी करना।

5) क्रोध, लालच और कामभावना, ये तीनों आत्मा का नाश करने वाले नरम के तीन द्वार हैं। इन तीनों को जल्दी से जल्दी त्याग देना चाहिए।

6) जो व्यक्ति मुसीबत आने पर दुखी नहीं होता, बल्कि सावधानी के साथ आगे बढ़ता है और दुख सह लेता है, उसे शत्रु पराजित नहीं कर सकते हैं।

7) ईर्ष्या करने वाला, असंतुष्ट रहने वाला, क्रोध करने वाला, सदा शंका करने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीने वाला, ये लोग हमेशा दुखी रहते हैं।

8) व्यक्ति गलत काम अकेले करता है, लेकिन उसका आनंद बहुत से लोग उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं लेकिन अधर्म करने वाला ही पाप का भागी होता है।

9) जो व्यक्ति भलाई करने वाले लोगों में दोष नहीं निकालते हैं और उन्नति के लिए काम करते हैं, वे ही श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले होते हैं।

10) जो लोग पहले निश्चय करते हैं और फिर काम शुरू करते हैं, काम को बीच में छोड़ते नहीं हैं, समय को व्यर्थ गंवाते नहीं हैं, मन हमेशा वश में रखते हैं, वे ही विद्वान कहलाते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN