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Quote of the Day: गुस्से को कैसे करें कंट्रोल? गीता के श्लोकों में छिपा है जवाब

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Source :- LIVE HINDUSTAN

गुस्सा एक नॉर्मल इमोशन है, लेकिन अगर यह कंट्रोल से बाहर हो जाए तो रिश्तों और जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है। भगवद गीता के कुछ महत्वपूर्ण श्लोक हमें इसे समझने और नियंत्रित करने का सही रास्ता बताते हैं।

गुस्सा एक ऐसी भावना है जो हर इंसान को कभी-ना-कभी आती है। लेकिन जब यही गुस्सा बार-बार या ज्यादा बढ़ जाता है तो यह रिश्तों, फैसलों और जीवन की शांति को नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार गुस्से में लिया गया फैसला बाद में पछतावे का कारण बन जाता है। भारतीय ग्रंथ भगवद गीता जीवन की कई समस्याओं का समाधान देती है। इसमें मन को शांत रखने, भावनाओं को संतुलित करने और क्रोध पर नियंत्रण पाने के कई मार्ग बताए गए हैं। गीता के कुछ श्लोक हमें बताते हैं कि गुस्से से कैसे बचा जाए और शांत मन के साथ जीवन जिया जाए। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 महत्वपूर्ण श्लोक और उनका सिंपल मीनिंग।

1. सुख-दुख में संतुलित मन रखना

दु:खेष्वनुद्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह: |

वीतरागभयक्रोध: स्थितधीर्मुनिरुच्यते || (अध्याय 2, श्लोक 56)

  • इस श्लोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति दुख में परेशान नहीं होता और सुख में ज्यादा आसक्त नहीं होता, वही स्थिर बुद्धि वाला माना जाता है। ऐसा व्यक्ति राग, भय और क्रोध से दूर रहता है।
  • सीख: अगर हम जीवन की परिस्थितियों को संतुलित मन से स्वीकार करें, तो गुस्सा अपने-आप कम होने लगता है।

2. इच्छाओं और क्रोध पर नियंत्रण

कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् |

अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् || (अध्याय 5, श्लोक 26)

  • इस श्लोक में बताया गया है कि जो लोग कामना और क्रोध से मुक्त होते हैं और अपने मन को नियंत्रित रखते हैं, उन्हें सच्ची शांति और आनंद मिलता है।
  • सीख: जब हम अपनी इच्छाओं और भावनाओं को समझकर नियंत्रित करते हैं, तब मन में शांति आती है।

3. क्रोध से दूर रहना एक दिव्य गुण

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्याग: शान्तिरपैशुनम् |

दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् || (अध्याय 16, श्लोक 2)

  • भगवान कृष्ण बताते हैं कि अहिंसा, सत्य, दया और क्रोध से दूर रहना दिव्य गुणों में शामिल है।
  • सीख: जब हम दूसरों के प्रति दया, सत्य और सहानुभूति रखते हैं, तो गुस्से के कारण भी कम हो जाते हैं।

4. क्रोध विनाश का कारण बन सकता है

त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मन: |

काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् || (अध्याय 16, श्लोक 21)

  • इस श्लोक में कहा गया है कि काम, क्रोध और लोभ तीन ऐसे द्वार हैं जो इंसान को विनाश की ओर ले जाते हैं।
  • सीख: अगर जीवन में शांति चाहिए तो इन तीनों से दूरी बनाना जरूरी है।

5. क्रोध कैसे करता है बुद्धि को नष्ट

क्रोधाद्भवति सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम: |

स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति || (अध्याय 2, श्लोक 63)

  • इस श्लोक में बताया गया है कि क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से याददाश्त कमजोर होती है और अंत में बुद्धि नष्ट हो जाती है।
  • सीख: गुस्सा हमें सही-गलत की समझ से दूर कर सकता है।

जीवन मंत्र: भगवद गीता हमें सिखाती है कि गुस्सा जीवन का समाधान नहीं, बल्कि समस्या बन सकता है। अगर हम धैर्य, समझ और संतुलित सोच को अपनाएं, तो गु्स्से पर काबू पाया जा सकता है। इन श्लोकों की सीख को जीवन में अपनाकर हम अधिक शांत, सकारात्मक और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN